स्थानीय निकाय चुनाव में मतदाता के अधिकार: संविधान, कानून और सुप्रीम कोर्ट की नजर से
स्थानीय निकाय चुनाव लोकतंत्र की सबसे निचली और नागरिक के सबसे निकट की इकाई का चुनाव है। नगर परिषद, नगरपालिका या नगर निगम का प्रतिनिधि सड़क, सफाई, जलापूर्ति, रोशनी, स्थानीय विकास और नागरिक सुविधाओं से सीधे जुड़ा होता है। इसलिए मतदाता का अधिकार केवल वोट डालने तक सीमित नहीं है; उसे स्वतंत्र, गोपनीय और जानकारी के आधार पर मतदान करने का संवैधानिक और वैधानिक संरक्षण प्राप्त है।
मतदाता सूची में नाम है तो वोट का अधिकार
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 25 के अनुसार जिस व्यक्ति का नाम किसी वार्ड की मतदाता सूची में दर्ज है, वह उस वार्ड में मतदान करने का अधिकारी है, बशर्ते उस पर कानून में निर्धारित अयोग्यता लागू न हो।
कानून यह भी स्पष्ट करता है कि कोई व्यक्ति एक से अधिक वार्ड में मतदान नहीं कर सकता और एक ही वार्ड में एक से अधिक बार मतदान भी नहीं किया जा सकता। धारा 26 के अनुसार प्रत्येक मतदाता को एक मत प्राप्त है।
चुनाव की निगरानी स्वतंत्र राज्य निर्वाचन आयोग के पास
संविधान का अनुच्छेद 243ZA नगरपालिकाओं के चुनावों की मतदाता सूची तैयार कराने तथा चुनाव के संचालन का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग को देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि नगरपालिका चुनावों के संदर्भ में राज्य निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए व्यापक संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं। कानून जहां मौन हो, वहां भी आयोग चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है, बशर्ते वे कानून के विपरीत न हों।
प्रत्याशी के बारे में जानना मतदाता का मौलिक अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव संबंधी अपने महत्वपूर्ण निर्णयों में स्थापित किया है कि मतदाता को प्रत्याशी की पृष्ठभूमि जानने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। मतदाता को उम्मीदवार के आपराधिक मामलों, संपत्ति और देनदारियों तथा शैक्षणिक योग्यता जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि वह सोच-समझकर निर्णय ले सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए “well-informed voter” यानी जानकारी रखने वाला मतदाता आवश्यक है।
दबाव या प्रलोभन से मुक्त मतदान
मतदाता का निर्णय उसका अपना होना चाहिए। किसी प्रत्याशी, राजनीतिक समूह या अन्य व्यक्ति द्वारा डर, दबाव, रिश्वत या अनुचित प्रभाव के जरिए मतदाता की स्वतंत्र पसंद को प्रभावित करना चुनाव की निष्पक्षता के विपरीत है। राजस्थान नगरपालिका अधिनियम में चुनाव अपराध और भ्रष्ट आचरण के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं। इसलिए मतदान केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं बल्कि स्वतंत्र राजनीतिक निर्णय है।
मतदान की गोपनीयता भी महत्वपूर्ण
मतदाता ने किस प्रत्याशी को वोट दिया, यह उसका निजी और गोपनीय निर्णय है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा तभी सार्थक हो सकती है जब मतदाता बिना भय के अपनी पसंद व्यक्त कर सके। इसी कारण मतदान व्यवस्था में गोपनीयता को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। किसी मतदाता को यह बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि उसने किस प्रत्याशी को मत दिया। मतदाता केवल समर्थक नहीं, निर्णयकर्ता हैसुप्रीम कोर्ट के चुनाव संबंधी निर्णयों का मूल संदेश यह है कि लोकतंत्र की गुणवत्ता इस बात पर निर्भर करती है कि मतदाता कितना जागरूक और स्वतंत्र है। इसलिए स्थानीय निकाय चुनाव में मतदाता को जाति, व्यक्तिगत संबंध, भय या तात्कालिक प्रलोभन से ऊपर उठकर उम्मीदवार की योग्यता, ईमानदारी, सार्वजनिक व्यवहार, संपत्ति संबंधी विवरण, आपराधिक पृष्ठभूमि और स्थानीय विकास के प्रति दृष्टिकोण का मूल्यांकन करना चाहिए।
स्थानीय चुनाव में मतदाता केवल किसी उम्मीदवार का समर्थक नहीं होता–वह अपने शहर के शासन का वास्तविक निर्णयकर्ता होता है।मतदान अधिकार भी है, जिम्मेदारी भी। जागरूक मतदाता ही मजबूत स्थानीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी गारंटी है।

