माता-पिता की देखभाल के लिए 45 दिन के सवेतन अवकाश का प्रस्ताव राज्यसभा में पेश
नई दिल्ली। कर्मचारियों को वृद्ध माता-पिता की बीमारी, चिकित्सा और देखभाल के लिए विशेष सवेतन अवकाश उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “पवित्र बंधन (माता-पिता देखभाल अवकाश) विधेयक, 2026” राज्यसभा में प्रस्तुत किया गया है। राज्यसभा सदस्य सुमित्रा बाल्मिक ने 13 मार्च 2026 को इसे निजी सदस्य विधेयक के रूप में पेश किया।
विधेयक में कर्मचारी को पूरे सेवाकाल के दौरान अधिकतम 45 दिन का माता-पिता देखभाल अवकाश देने का प्रस्ताव है। यह अवकाश पूर्ण वेतन के साथ होगा और कर्मचारी की दूसरी जमा छुट्टियों में से नहीं काटा जाएगा।
प्रस्तावित प्रावधानों में 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के जैविक, दत्तक और सौतेले माता-पिता के साथ सास-ससुर को भी शामिल किया गया है। इसका दायरा केंद्र एवं राज्य सरकारों के विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और दस या अधिक कर्मचारियों वाले निजी प्रतिष्ठानों तक रखने का प्रस्ताव है।
अवकाश के लिए चिकित्सा प्रमाणपत्र अथवा अस्पताल संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। आपात स्थिति में कर्मचारी पहले अवकाश लेकर सात कार्य दिवसों के भीतर आवश्यक प्रमाण उपलब्ध करा सकेगा। विधेयक की मंशा कर्मचारियों को नौकरी और पारिवारिक दायित्वों के बीच संतुलन बनाने में सहायता प्रदान करना है।
