माँ का सपना बेटी ने किया साकार: उर्मिला कुमारी सुंदेशा का एमबीबीएस में चयन
जालौर जिले के थांवला की बेटी को नीट काउंसलिंग के प्रथम चरण में नेल्लोर के मेडिकल कॉलेज में मिला प्रवेश
जालौर। जिले के थांवला गाँव की मूल निवासी उर्मिला कुमारी सुंदेशा माली ने नीट परीक्षा के माध्यम से एमबीबीएस में चयनित होकर परिवार और समाज का गौरव बढ़ाया है। नीट काउंसलिंग के प्रथम चरण में उर्मिला को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर स्थित मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला है।
सुंधा माता नगर, मालियों की बाड़ी, थांवला निवासी उर्मिला कुमारी, वेलाराम जी माली और दिवंगत कमला देवी की सुपुत्री तथा हिंदूजी की पौत्री हैं। वर्तमान में उनके पिता नेल्लोर में व्यवसाय करते हैं।
उर्मिला की सफलता के पीछे संघर्ष, अनुशासन और अपनी दिवंगत माँ के सपने को पूरा करने का दृढ़ संकल्प है। कमला देवी की हार्दिक इच्छा थी कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर डॉक्टर बने और पीड़ितों की सेवा करे। माँ के असमय निधन के बाद उर्मिला ने परिवार और घर की जिम्मेदारियों में सहयोग करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।
उर्मिला का कहना है कि उनकी माँ उन्हें डॉक्टर बनते देखना चाहती थीं। माँ की स्मृतियाँ और उनकी इच्छा ही कठिन समय में उर्मिला की सबसे बड़ी प्रेरणा बनीं। एमबीबीएस में चयन के साथ उर्मिला ने न केवल अपना लक्ष्य प्राप्त किया, बल्कि अपनी माँ के अधूरे सपने को भी साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
माँ का सपना बेटी ने सच कर दिखाया
थांवला की मिट्टी में जन्मी एक प्यारी कली,
नाम है उर्मिला कुमारी सुंदेशा माली।
जालौर की धरती, सुंधा माता नगर का मान,
मालियों की बाड़ी में गूँजा उसका सम्मान।
पिता वेलाराम जी ने हौसला सदा बढ़ाया,
दादाजी हिंदूजी का आशीर्वाद सिर पर छाया।
पर जीवन की राह में एक कमी रही गहरी,
माँ कमला देवी की स्मृतियाँ थीं सुनहरी।
माँ की इच्छा थी—“मेरी बेटी डॉक्टर बने”,
दुखियों की सेवा करे, मानवता के दीप जले।
माँ बहुत पहले इस संसार से चली गईं,
लेकिन बेटी के मन में अपना सपना छोड़ गईं।
उर्मिला ने आँसू छिपाकर घर भी सँभाला,
कठिन परिस्थितियों में स्वयं को नहीं हारा।
किताबों को साथी और मेहनत को राह बनाया,
माँ की भावनाओं से हर बार संबल पाया।
जब थककर कभी उसके कदम रुकने लगे,
माँ के सपने आँखों में फिर जगने लगे।
नीट की परीक्षा में परिश्रम रंग लाया,
पहले ही राउंड में एमबीबीएस चयन पाया।
नेल्लोर के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिला,
माँ के अधूरे सपने का सुंदर पुष्प खिला।
आज माँ भले ही सामने दिखाई नहीं देतीं,
पर बेटी की सफलता में मुस्कराती हैं यहीं।
यह केवल उर्मिला की विजय की कहानी नहीं,
माँ के विश्वास और बेटी की साधना भी यहीं।
जिस बेटी ने दुःख को अपनी शक्ति बनाया,
उसने माँ का सपना सच करके दिखाया।
उर्मिला, तुम्हारी सफलता यही संदेश सुनाए—
सच्ची मेहनत के आगे हर बाधा झुक जाए।
कल जब तुम सफेद कोट पहनकर सेवा करोगी,
हर रोगी की दुआ में अपनी माँ को पाओगी।
