रोजाना ₹10 का योगदान बचाएगा निराश्रित गोवंश: स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि की पहल से जुटेंगे ₹3650 करोड़
जबलपुर
मध्य प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और गोशालाओं के सुचारू संचालन के लिए गो संवर्द्धन बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने एक अनोखी जनभागीदारी की पहल की है। उन्होंने सनातन परंपरा की पहली रोटी यानी ‘गोग्रास’ प्रथा को आधुनिक समय के अनुसार नया रूप देने का सुझाव दिया है। उनका स्पष्ट मानना है कि गोवंश संरक्षण की जिम्मेदारी केवल शासन-प्रशासन पर नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि समाज को भी आगे आकर अपना दायित्व निभाना होगा।
इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के प्रत्येक गोभक्त और गोप्रेमी से रोजाना 10 रुपये एकत्रित करने की अपील की गई है। यदि प्रदेश के एक करोड़ लोग इस मुहिम से जुड़ते हैं, तो हर व्यक्ति सालाना 3,650 रुपये का योगदान देगा, जिससे कुल 3,650 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जुटाई जा सकती है। इस राशि को गोपाष्टमी के शुभ अवसर पर मध्य प्रदेश गो संवर्द्धन बोर्ड के आधिकारिक पोर्टल के जरिए जमा कराया जाएगा। इस जमा कोष से मिलने वाले ब्याज का उपयोग प्रदेश की पंजीकृत गोशालाओं के संचालन और गोवंश की देखरेख में किया जाएगा।
गोशालाओं के जमीनी संचालन को बेहतर बनाने के लिए स्वामी जी ने ग्राम पंचायतों और सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं के बीच अनुबंध (MOU) का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत मनरेगा योजना से निर्मित ग्रामीण गोशालाओं का प्रबंधन स्वयंसेवी संस्थाओं को सौंपा जाना चाहिए। वर्तमान में भी प्रदेश की लगभग 700 गोशालाएं NGOs द्वारा चलाई जा रही हैं।
स्वामी जी ने जोर देकर कहा कि गोसेवा को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिर्फ पैसे ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित मानव संसाधन और कुशल प्रबंधन की भी उतनी ही जरूरत है। संदेश को आध्यात्मिक आधार देते हुए उन्होंने कहा कि गोवंश कभी भी अनुपयोगी या अनार्थिक नहीं होता।
श्रीमद्भगवद्गीता के ‘स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्’ श्लोक का उल्लेख करते हुए उन्होंने समझाया कि धर्म के मार्ग पर किया गया छोटा सा प्रयास भी बड़े संकटों से बचा लेता है। इसलिए समाज को गोवंश के प्रति संवेदनशील बनते हुए उनके पालन और संरक्षण का सामूहिक संकल्प लेना चाहिए।
