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E20 पेट्रोल: आयात बचत का दावा, लेकिन उपभोक्ता के माइलेज और इंजन का क्या?

प्रकाशित: 22 August 2026, 4:26 am

मारवाड़ पत्रिका | मुद्दे और बहस

लेखक: धर्मेंद्र सुंदेशा
संस्थापक, मारवाड़ पत्रिका

भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की E20 व्यवस्था लागू हो चुकी है। सरकार के अनुसार इससे कच्चे तेल का आयात और विदेशी मुद्रा व्यय घटता है, किसानों एवं चीनी मिलों को अतिरिक्त बाजार मिलता है तथा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होती है। लेकिन उपभोक्ताओं का प्रश्न है कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ी है तो पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं हुआ और पुराने वाहनों के माइलेज तथा इंजन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

नीति आयोग और पेट्रोलियम मंत्रालय की आधिकारिक E20 रोडमैप रिपोर्ट ने स्वीकार किया था कि E10 के लिए तैयार चारपहिया वाहनों में E20 इस्तेमाल करने पर ईंधन-दक्षता लगभग 6–7 प्रतिशत और दोपहिया वाहनों में 3–4 प्रतिशत तक घट सकती है। E20 के लिए विशेष रूप से डिजाइन एवं कैलिब्रेट किए गए नए वाहनों में यह नुकसान लगभग 1–2 प्रतिशत तक सीमित हो सकता है। कम माइलेज का अर्थ है कि समान दूरी तय करने के लिए उपभोक्ता को अधिक ईंधन खरीदना पड़ सकता है।

एथेनॉल नमी सोखने वाला और पेट्रोल से अलग रासायनिक गुणों वाला ईंधन है। पुराने वाहनों के रबर पाइप, सील, प्लास्टिक, इलास्टोमर और कुछ धातु-पुर्जों की E20 से अनुकूलता को लेकर तकनीकी चिंताएँ सामने आई हैं। आधिकारिक रोडमैप ने भी E20-अनुकूल पुर्जों, इंजन कैलिब्रेशन और दीर्घकालीन टिकाऊपन परीक्षण की आवश्यकता स्वीकार की थी।

हालांकि, यह कहना भी उचित नहीं कि E20 से प्रत्येक वाहन का इंजन निश्चित रूप से खराब हो जाएगा। एआरएआई, इंडियन ऑयल और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम के परीक्षणों में गंभीर इंजन विफलता, असामान्य घिसावट या सुरक्षा संबंधी व्यापक समस्या नहीं मिली। सरकार ने भी बड़े स्तर पर प्रमाणित इंजन-विफलता की शिकायतें मिलने से इनकार किया है। वास्तविक जोखिम वाहन के निर्माण वर्ष, निर्माता की तकनीकी स्वीकृति, इंजन कैलिब्रेशन और पुर्जों की अनुकूलता पर निर्भर करता है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग से होने वाली विदेशी मुद्रा बचत अपने आप पेट्रोल पंप के खुदरा मूल्य में नहीं पहुँचती। पेट्रोल की कीमत कच्चे तेल, एथेनॉल खरीद लागत, रिफाइनिंग, परिवहन, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य वैट सहित अनेक घटकों से बनती है। इसलिए सस्ता पेट्रोल उपलब्ध कराए बिना केवल राष्ट्रीय आयात-बचत को उपभोक्ता का प्रत्यक्ष लाभ नहीं कहा जा सकता।

एथेनॉल कार्यक्रम उपयोगी हो सकता है, यदि पुराने वाहनों के लिए उपयुक्त ईंधन विकल्प उपलब्ध रहे, माइलेज नुकसान की स्पष्ट जानकारी दी जाए, वारंटी एवं मरम्मत की जिम्मेदारी निर्धारित हो, पेट्रोलियम आयात से हुई बचत का लाभ उपभोक्ता तक पहुँचे और खाद्यान्न तथा चीनी की घरेलू उपलब्धता प्रभावित न हो।

इन शर्तों के बिना E20 को निर्विवाद सफलता घोषित करना जल्दबाजी होगी। सरकार को इस नीति के आर्थिक, तकनीकी और खाद्य-सुरक्षा संबंधी प्रभावों की स्वतंत्र एवं पारदर्शी समीक्षा करानी चाहिए, ताकि ऊर्जा सुरक्षा की कीमत उपभोक्ता, वाहन मालिक और सामान्य परिवार को न चुकानी पड़े।