मोटर दुर्घटना मुआवजे में गृहिणी के घरेलू योगदान को अलग महत्व, सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना में गृहिणी की मृत्यु पर मुआवजा निर्धारित करने के लिए उसके घरेलू कार्य और परिवार की देखभाल के आर्थिक मूल्य को महत्वपूर्ण मान्यता दी है।
‘Shishu Pal @ Shish Ram & Others बनाम Surjeet & Others’ मामले में न्यायमूर्ति संजय करोल द्वारा लिखे गए निर्णय में न्यायालय ने गृहिणी के घरेलू योगदान और देखभाल के आर्थिक महत्व पर विस्तार से विचार किया है।
मामला मोटर दुर्घटना में हुई मृत्यु के बाद मुआवजे की गणना से संबंधित था। सुप्रीम कोर्ट ने ‘घरेलू देखभाल की क्षति’ को मुआवजे के एक अलग आधार के रूप में मान्यता देते हुए संबंधित मामले में इसके लिए 30 हजार रुपये प्रतिमाह का मूल्य निर्धारित किया।
न्यायालय ने गृहिणी को केवल आय अर्जित नहीं करने वाले व्यक्ति के रूप में देखने के बजाय परिवार और अर्थव्यवस्था में उसके घरेलू श्रम के वास्तविक मूल्य को रेखांकित किया।

