दिव्यांग भाई की देखभाल करने वाले बैंक अधिकारी का तबादला रद्द, हाईकोर्ट ने माना अमानवीय
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने दिव्यांग भाई की देखभाल करने वाले यूको बैंक अधिकारी राहुल अग्रवाल का लगभग एक हजार किलोमीटर दूर किया गया तबादला निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंड ने 5 अक्टूबर को सुनवाई करते हुए कहा कि सामान्य स्थानांतरण नीति लागू करते समय देखभाल करने वाले कर्मचारियों के लिए निर्धारित विशेष संरक्षण की अनदेखी नहीं की जा सकती।
अग्रवाल का भाई थैलेसीमिया से पीड़ित है और उसे 75 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता है। नियमित रक्त चढ़ाने, उपचार और दैनिक देखभाल के लिए वह अग्रवाल पर निर्भर है। बैंक ने उनका तबादला जयपुर क्षेत्र की बनेटी शाखा से अहमदाबाद क्षेत्र की भादवा शाखा में किया था।
अदालत ने पाया कि बैंक ने अपनी समान अवसर नीति के तहत उपलब्ध संरक्षण पर उचित विचार नहीं किया। पदोन्नति और लंबे समय से एक क्षेत्र में तैनाती के आधार पर विशेष परिस्थितियों की अनदेखी करते हुए किए गए तबादले को अदालत ने मनमाना और अमानवीय माना।
प्रदर्शन में मौजूद होना ही अपराध का प्रमाण नहीं, हाईकोर्ट से 23 लोगों को अंतरिम राहत
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी प्रदर्शन में मौजूद होने मात्र से व्यक्ति को वहां हुई प्रत्येक कथित आपराधिक गतिविधि का जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति फरजंद अली ने हनुमानगढ़ जिले के 23 लोगों की याचिका पर राज्य सरकार और पुलिस को नोटिस जारी करते हुए उनके विरुद्ध अंतरिम रूप से दमनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई है।
अदालत ने 28 सितंबर के आदेश में कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्रशासन को असुविधा होने मात्र से प्रदर्शन को अपराध नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसी को भीड़ से जुड़े सामान्य आरोपों और प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्ट भूमिका के बीच अंतर करना होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार किसी विशिष्ट अपराध के लिए संरक्षण नहीं देता। संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर कानूनी कार्रवाई संभव है। फिलहाल दी गई राहत अंतरिम है; आरोपों की सत्यता और याचिकाकर्ताओं की दोषमुक्ति पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
