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समाज के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ

प्रकाशित: 3 August 2026, 6:01 am अपडेट: 12 August 2026, 6:00 am

समाज के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ

भाग–1 : नशाखोरी

अंक–1 : नशा केवल व्यक्ति की आदत नहीं, पूरे समाज का संकट

नशाखोरी वर्तमान समाज के सामने खड़ी सबसे गंभीर और विनाशकारी समस्याओं में से एक है। इसे केवल शराब, अफीम, गांजा, स्मैक या किसी अन्य मादक पदार्थ के सेवन तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। नशा धीरे-धीरे मनुष्य की बुद्धि, निर्णय-क्षमता, स्वास्थ्य, चरित्र, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक संबंधों पर अधिकार कर लेता है। जब यही प्रवृत्ति बड़ी संख्या में युवाओं और वयस्कों में फैलती है, तब यह व्यक्तिगत बीमारी न रहकर सामाजिक संकट बन जाती है।

नशे की शुरुआत प्रायः उत्सुकता, मित्रों के दबाव, उत्सव, दिखावे, तनाव कम करने या क्षणिक आनंद पाने के नाम पर होती है। प्रारम्भ में व्यक्ति को लगता है कि वह कभी-कभी ही सेवन करता है और जब चाहे इसे छोड़ सकता है। धीरे-धीरे शरीर और मस्तिष्क उस पदार्थ के अभ्यस्त होने लगते हैं। पहले जितना प्रभाव पाने के लिए अधिक मात्रा की आवश्यकता पड़ती है। नशा न मिलने पर बेचैनी, चिड़चिड़ापन, घबराहट, दर्द, नींद की समस्या और मानसिक तनाव होने लगता है।

एक समय के बाद व्यक्ति नशा आनंद के लिए नहीं, बल्कि सामान्य बने रहने और पीड़ा से बचने के लिए करने लगता है। उसकी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। माता-पिता, पत्नी, बच्चे, व्यवसाय, नौकरी, प्रतिष्ठा और स्वास्थ्य पीछे छूट जाते हैं तथा नशीला पदार्थ सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाता है।

इसी अवस्था में व्यक्ति घर का सामान, पत्नी के आभूषण, खेती की जमीन, वाहन और व्यापारिक सम्पत्ति तक बेच सकता है। नशा प्राप्त करने के लिए वह झूठ, उधार, चोरी, हिंसा और अन्य अपराधों की ओर भी बढ़ सकता है। कई परिवारों में नशे के कारण घरेलू हिंसा, आर्थिक बर्बादी, बच्चों की पढ़ाई छूटना और पति-पत्नी के संबंध टूटना सामान्य होता जा रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन शराब को विषैला, मनो-सक्रिय और निर्भरता उत्पन्न करने वाला पदार्थ मानता है। शराब और अन्य नशीले पदार्थों से होने वाली हानि केवल बीमारी तक सीमित नहीं रहती। इनके कारण दुर्घटनाएं, हिंसा, आत्महानि, अपराध और पारिवारिक विघटन भी बढ़ते हैं।

इसलिए नशाखोरी को केवल व्यक्ति की कमजोरी मानना उचित नहीं है। यह परिवार, समाज, स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासन और नीति-निर्माताओं—सभी के लिए गंभीर चुनौती है। समय रहते इस संकट को समझना और सामूहिक रूप से कार्रवाई करना अत्यंत आवश्यक है।

क्रमशः… अगले अंक में पढ़िए—नशा और नशाखोरी में क्या अंतर है तथा लत के प्रमुख संकेत कौन-कौन से हैं।समाज के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ

भाग–1 : नशाखोरी

अंक–2 : नशा और नशाखोरी में अंतर कैसे पहचानें?

किसी मनो-सक्रिय पदार्थ का एक बार सेवन और उस पदार्थ की लत एक ही बात नहीं है। लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं कि कभी-कभार किया गया नशा सुरक्षित होता है। एक बार का सेवन भी दुर्घटना, विषाक्तता, हिंसा, बेहोशी या गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।

नशाखोरी या पदार्थ-निर्भरता उस अवस्था को कहा जाता है, जब व्यक्ति का अपने सेवन पर नियंत्रण कम होने लगता है। वह जानता है कि नशा उसके स्वास्थ्य, परिवार, नौकरी या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा है, फिर भी उसे छोड़ नहीं पाता।

नशे की लत के कुछ प्रमुख संकेत इस प्रकार हैं—

पदार्थ प्राप्त करने और सेवन करने की तीव्र इच्छा होना, पहले जैसा प्रभाव पाने के लिए मात्रा बढ़ाना, नशा न मिलने पर बेचैनी या शारीरिक परेशानी होना, पढ़ाई और काम में रुचि कम होना, परिवार तथा सामाजिक जिम्मेदारियों की उपेक्षा करना और बार-बार छोड़ने का प्रयास करके भी सफल न होना।

इसके अतिरिक्त नशे के लिए झूठ बोलना, उधार लेना, पैसे चुराना, घर का सामान बेचना या परिवार के सदस्यों पर दबाव डालना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।

कई बार परिवार नशे से ग्रस्त व्यक्ति को निकम्मा, अपराधी या परिवार का कलंक कहकर अपमानित करने लगता है। इससे स्थिति और बिगड़ सकती है। गंभीर लत केवल इच्छा-शक्ति की कमी नहीं होती। बार-बार नशीले पदार्थ के सेवन से मस्तिष्क की पुरस्कार-प्रणाली, तनाव-प्रणाली और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने लगती है।

धीरे-धीरे नशा व्यक्ति के लिए भोजन, परिवार, काम और सम्मान से भी अधिक महत्वपूर्ण लगने लगता है। पदार्थ से जुड़ी जगहें, मित्र और परिस्थितियां उसके भीतर तीव्र इच्छा उत्पन्न कर सकती हैं। परिणाम समझते हुए भी वह स्वयं को रोक नहीं पाता।

इसका अर्थ यह नहीं कि नशे से ग्रस्त व्यक्ति अपने व्यवहार की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है। उसे हिंसा, झूठ और गैर-जिम्मेदार व्यवहार की जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी। साथ ही परिवार और समाज को उसे उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास की सुविधा से जोड़ना चाहिए।

डांट, मारपीट, शपथ या सामाजिक बहिष्कार से गंभीर लत समाप्त नहीं होती। सही उपचार में चिकित्सकीय देखरेख, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, पारिवारिक सहयोग और जीवन की नई दिनचर्या आवश्यक होती है।

नशे से मुक्ति संभव है, लेकिन इसके लिए समस्या को समय रहते पहचानना और सहायता लेने में संकोच न करना सबसे पहला कदम है।

क्रमशः… अगले अंक में पढ़िए—नशे का इतिहास और मानव सभ्यता के साथ उसका बदलता स्वरूप।