PMLA के प्रमुख प्रावधानों की समीक्षा करेगा मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाला नया पीठ
नई दिल्ली, 21 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम—PMLA के प्रमुख प्रावधानों को बरकरार रखने वाले वर्ष 2022 के विजय मदनलाल चौधरी निर्णय के विरुद्ध दायर समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय पीठ का पुनर्गठन किया है। नई पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं।
इससे पहले गठित पीठ में मुख्य न्यायाधीश के साथ न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह शामिल थे। न्यायालय में हुई कार्यवाही के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि पुरानी संरचना बनाए रखने से तीन अन्य पीठों का काम प्रभावित होता। समीक्षा याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पुनर्गठन पर आपत्ति नहीं जताई।
समीक्षा याचिकाओं में वर्ष 2022 के निर्णय के उन निष्कर्षों पर पुनर्विचार माँगा गया है जिनमें प्रवर्तन निदेशालय की तलाशी, जब्ती, गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्की संबंधी शक्तियों; आरोपी को ECIR की प्रति उपलब्ध कराने; PMLA की धारा 50 के अंतर्गत दर्ज बयानों तथा जमानत के लिए लागू कठोर ‘दोहरी शर्तों’ से जुड़े प्रश्न शामिल रहे हैं।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पीठ का पुनर्गठन अपने आप में 2022 का फैसला बदलना नहीं है। अभी केवल समीक्षा याचिकाओं की सुनवाई आगे बढ़ाने की व्यवस्था हुई है। संबंधित प्रावधान फिलहाल प्रभावी हैं; किसी बदलाव का प्रश्न समीक्षा पर न्यायालय के आगामी आदेश के बाद ही निर्धारित होगा।
