जंतर-मंतर छात्र आंदोलन: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला—सभी FIR रद्द, नई कार्रवाई पर भी रोक; CJP ने 5 सितंबर का मार्च लिया वापस
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर हुए आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और छात्रों पर दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों (FIRs) को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि इस मामले में प्रदर्शनकारियों पर भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
सरकार ने पूरी कीं आश्वासन से जुड़ी शर्तें
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि केंद्र सरकार अनुच्छेद 142 का सहारा लेकर प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज प्राथमिकियों को वापस लेने और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।सरकार की ओर से मिले ठोस आश्वासन और मुकदमों की वापसी के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपना विशाल विरोध मार्च वापस लेने की घोषणा कर दी है। पार्टी के प्रतिनिधि सौरव दास ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि मांगों पर सकारात्मक प्रगति को देखते हुए आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया जा रहा है।
क्या था मामला? आंदोलन की शुरुआत:
नीट पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर 20 जून से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। संसद मार्च व पुलिस कार्रवाई: 20 जुलाई को संसद की ओर निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी, जिसके बाद कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। 5 सितंबर का मार्च: पूर्व में तय कार्यक्रम के अनुसार CJP ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च का आह्वान किया था। हालांकि, केंद्र सरकार की मुकदमों की वापसी और सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख के बाद यह मार्च आधिकारिक रूप से वापस ले लिया गया है।
