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आठवां वेतन आयोग 31 अगस्त को जयपुर आएगा: वेतन, पेंशन और भत्तों पर कर्मचारी संगठनों से दो दिन करेगा विचार-विमर्श

प्रकाशित: 28 August 2026, 10:16 am

राजस्थान के केंद्रीय कर्मचारी संगठनों को मिलेगा पक्ष रखने का अवसर; वेतन-वृद्धि पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिशत तय नहीं

जयपुर।

आठवां केंद्रीय वेतन आयोग 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को जयपुर में राजस्थान स्थित केंद्र सरकार एवं केंद्रशासित प्रदेशों के कर्मचारियों से संबंधित एसोसिएशनों, फेडरेशनों और यूनियनों के साथ विचार-विमर्श करेगा। यह बैठक राज्य सरकार के कर्मचारियों के साथ सामान्य संवाद नहीं, बल्कि राजस्थान में स्थित अथवा पंजीकृत केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के लिए निर्धारित परामर्श प्रक्रिया है।

आयोग की 3 अगस्त 2026 की आधिकारिक सूचना के अनुसार वही संगठन बैठक का समय मांग सकते थे, जिन्होंने पहले अपना ज्ञापन प्रस्तुत कर दिया था और आयोग से इससे पूर्व संवाद नहीं किया था। आवेदन की अंतिम तिथि 18 अगस्त थी। चयनित प्रतिनिधियों को बैठक का स्थान और समय ई-मेल से बताया जाना है।

वेतन आयोग क्या होता है?

केंद्रीय वेतन आयोग कोई स्थायी संवैधानिक या संसद के कानून से गठित संस्था नहीं है। इसका गठन केंद्र सरकार मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा राजपत्र में प्रकाशित संकल्प के माध्यम से करती है। सरकार आयोग के लिए “विचारणीय विषय”—Terms of Reference—निर्धारित करती है।

आयोग केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन, ग्रेच्युटी, बोनस, सेवा-सुविधाओं और कार्य परिस्थितियों का अध्ययन कर सरकार को सिफारिशें देता है। सरकार इन सिफारिशों को पूरी तरह, आंशिक रूप से अथवा संशोधनों के साथ स्वीकार कर सकती है। आयोग की रिपोर्ट अपने-आप कानून नहीं बनती; उसका वास्तविक लाभ सरकार के स्वीकृति आदेश और संशोधित वेतन नियम जारी होने के बाद मिलता है।

वेतन आयोग हर दस वर्ष में बनाना किसी कानून की अनिवार्य शर्त नहीं है, लेकिन व्यवहार में इसकी सिफारिशें लगभग दस-दस वर्ष के अंतराल पर लागू होती रही हैं। केंद्र सरकार ने भी आठवें आयोग की अधिसूचना में इस दस वर्षीय प्रवृत्ति का उल्लेख किया है।

पहला और वर्तमान वेतन आयोग

भारत का पहला केंद्रीय वेतन आयोग मई 1946 में गठित हुआ था। इसके अध्यक्ष श्रीनिवास वरदाचारियार थे और आयोग ने मई 1947 में अपनी रिपोर्ट दी। इसका मुख्य कार्य केंद्रीय असैनिक कर्मचारियों के वेतन ढांचे की समीक्षा करना था।

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन भारत सरकार ने 3 नवंबर 2025 को किया। इसकी संरचना इस प्रकार है—

  • अध्यक्ष—न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई
  • अंशकालिक सदस्य—प्रोफेसर पुलक घोष
  • सदस्य-सचिव—पंकज जैन

न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं। आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में है और इसे गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर रिपोर्ट देनी है। आवश्यकता होने पर आयोग किसी विषय पर अंतरिम रिपोर्ट भी दे सकता है।

आयोग कैसे काम करता है?

आयोग मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों, कर्मचारी और पेंशनर संगठनों से ज्ञापन मांगता है। प्रश्नावली, ऑनलाइन डेटा, विभागीय रिकॉर्ड, महंगाई, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, निजी क्षेत्र एवं सार्वजनिक उपक्रमों के वेतन, सरकारी नौकरियों की जिम्मेदारियां और राजकोषीय स्थिति का अध्ययन किया जाता है।

इसके बाद आयोग देश के विभिन्न शहरों में संगठनों से प्रत्यक्ष संवाद करता है। वेतन-स्तर, न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर, वार्षिक वेतनवृद्धि, पेंशन, पदोन्नति, भत्ते और विभिन्न संवर्गों की वेतन-विसंगतियों पर प्रस्तुतियों और प्रमाणों को दर्ज किया जाता है। जयपुर बैठक इसी राष्ट्रीय परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा है।

आयोग को केंद्रीय असैनिक और औद्योगिक कर्मचारियों, अखिल भारतीय सेवाओं, रक्षा बलों, केंद्रशासित प्रदेशों, भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग, सर्वोच्च न्यायालय तथा केंद्र के अधीन कुछ अन्य संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन और लाभों की समीक्षा करनी है।

कितने कर्मचारियों और पेंशनरों पर प्रभाव?

उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार आठवें वेतन आयोग के दायरे में लगभग 50.14 लाख केंद्रीय कर्मचारी और करीब 69 लाख केंद्रीय पेंशनर आ सकते हैं। इस प्रकार लगभग 1.19 करोड़ वर्तमान और सेवानिवृत्त केंद्रीय कार्मिक प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे।

राज्य सरकारों के कर्मचारी आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के प्रत्यक्ष लाभार्थी नहीं हैं। केंद्र की सिफारिशें लागू होने के बाद राज्य सरकारें अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार अलग समिति बनाकर अथवा संशोधनों के साथ समान वेतन ढांचा अपनाती हैं। इसलिए देश के सभी राज्यों के कर्मचारियों की संख्या जोड़कर उन्हें अभी आठवें आयोग का प्रत्यक्ष लाभार्थी बताना सही नहीं होगा। राजस्थान के कर्मचारियों को भी लाभ तभी मिलेगा, जब राज्य सरकार इस संबंध में अलग निर्णय करेगी।

पहले आयोगों में न्यूनतम मूल वेतन कैसे बढ़ा?

वेतन आयोग| अनुशंसित न्यूनतम मूल वेतन
प्रथम| ₹55
द्वितीय| ₹80
तृतीय| ₹185
चतुर्थ| ₹750
पंचम| ₹2,550
छठा| ₹7,000
सातवां| ₹18,000

इन राशियों की सीधे प्रतिशत तुलना भ्रामक हो सकती है, क्योंकि प्रत्येक नए वेतन आयोग में उस समय का महंगाई भत्ता मूल वेतन में समाहित होकर दोबारा शून्य से शुरू होता है। उदाहरणतः सातवें आयोग में न्यूनतम मूल वेतन ₹7,000 से ₹18,000 हुआ और फिटमेंट फैक्टर 2.57 रहा, लेकिन सरकार ने वास्तविक न्यूनतम वेतन-वृद्धि को कम-से-कम 14.29 प्रतिशत बताया था। अतः 2.57 फिटमेंट फैक्टर का अर्थ हाथ में मिलने वाले वेतन में 157 प्रतिशत वृद्धि नहीं था।

आठवें आयोग में कितनी वृद्धि संभव?

अभी आयोग ने न फिटमेंट फैक्टर तय किया है, न न्यूनतम वेतन और न वेतन-वृद्धि का कोई प्रतिशत घोषित किया है। कर्मचारी संगठनों की मांगों और बाजार-विश्लेषणों में फिटमेंट फैक्टर लगभग 1.82 से 2.86 तक बताया जा रहा है, जबकि कुछ संगठनों ने 3.83 तक की मांग रखी है। ये सभी मांगें अथवा अनुमान हैं—सरकारी निर्णय नहीं।

अलग-अलग वित्तीय विश्लेषण वास्तविक वेतन-वृद्धि लगभग 13 से 34 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना व्यक्त करते रहे हैं। फिलहाल 20 से 30 प्रतिशत के दायरे को केवल एक संभावित परिदृश्य माना जा सकता है, निश्चित अनुमान नहीं। कर्मचारी का वास्तविक लाभ उसके वर्तमान वेतन-स्तर, उस समय के महंगाई भत्ते, नए फिटमेंट गुणांक, भत्तों के पुनर्निर्धारण और कटौतियों पर निर्भर करेगा।

अपेक्षा से कम वृद्धि क्यों हो सकती है?

आयोग की आधिकारिक कार्य-शर्तों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सिफारिश करते समय देश की आर्थिक स्थिति, राजकोषीय अनुशासन, विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं के लिए संसाधन, गैर-अंशदायी पेंशन का खर्च और राज्य सरकारों पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव को ध्यान में रखा जाए।

यही प्रावधान संकेत देता है कि आयोग कर्मचारी अपेक्षाओं के साथ सरकारी खजाने की भुगतान क्षमता भी देखेगा। लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनरों पर प्रत्येक अतिरिक्त प्रतिशत वृद्धि से हजारों करोड़ रुपये का स्थायी वार्षिक भार बन सकता है। राज्यों को भी बाद में समान संशोधन लागू करने पर बड़ा खर्च उठाना पड़ता है। इसलिए 3.83 जैसे अत्यधिक फिटमेंट फैक्टर को स्वीकार किए जाने की संभावना राजकोषीय दृष्टि से सीमित मानी जा रही है।

जयपुर बैठक में न्यूनतम वेतन, फिटमेंट फैक्टर, वार्षिक वेतनवृद्धि, वेतन-विसंगतियां, पेंशन और भत्तों पर कर्मचारी पक्ष रखा जाएगा। अंतिम तस्वीर आयोग की रिपोर्ट और उस पर केंद्र सरकार के निर्णय के बाद ही साफ होगी। अभी किसी निश्चित फिटमेंट फैक्टर, वेतन-वृद्धि प्रतिशत अथवा संशोधित मूल वेतन को स्वीकृत बताना समयपूर्व होगा।