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सरहद पर गूंजा देशभक्ति का स्वर: एलओसी पर ‘पीओके बनेगा हिंदुस्तान’ के नारे, केरन घाटी में तिरंगे के साथ मनाया स्वतंत्रता दिवस

प्रकाशित: 17 August 2026, 3:34 am

कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा की केरन घाटी में इस बार स्वतंत्रता दिवस पर बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बसे केरन गांव में 15 अगस्त की रात किशनगंगा नदी का शांत तट आतिशबाजी और “आजाद हिंदुस्तान जिंदाबाद” तथा “पीओके बनेगा हिंदुस्तान” के नारों से गूंज उठा।केरन और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के नीलम जिले के बीच की दूरी महज 30 से 40 फीट बताई जाती है। दोनों के बीच केवल किशनगंगा (नीलम) नदी बहती है। दोनों तरफ बने मकान इतने करीब हैं कि लोग अपनी छतों से एक-दूसरे की दैनिक गतिविधियां तक देख सकते हैं। वर्ष 1947 के बाद खिंची सीमा ने एक ही परिवार और रिश्तेदारी के लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया था।किसी का चाचा उस पार रह गया तो भतीजा इस तरफ, किसी की बहन उधर ब्याही गई तो भाई इधर रह गया। वर्षों से दोनों ओर रहने वाले लोग नदी के किनारे आकर केवल हाथ हिलाकर या इशारों के जरिए अपने रिश्तेदारों का हालचाल लेते रहे हैं। शादी-ब्याह से लेकर दुख और मातम तक, दोनों तरफ के रिश्तेदार नदी के पार से ही एक-दूसरे का दर्द साझा करते रहे हैं।

पीओके से भी भारत में शामिल होने की बात

स्वतंत्रता दिवस के इस अनोखे आयोजन के बाद केरन के स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले शाम ढलते ही इलाके में डर का माहौल रहता था। गोलीबारी शुरू होते ही लोगों को बंकरों में छिपना पड़ता था। हालांकि अब परिस्थितियां काफी बदल गई हैं और लोग रात में एलओसी के किनारे खड़े होकर बेखौफ आतिशबाजी कर रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि पीओके में रहने वाले लोग उनके अपने भाई-बहन हैं। उनका कहना है कि वे वहां कठिनाइयों और कथित जुल्म का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इच्छा जताई कि यह “गैर-कुदरती लकीर” समाप्त हो और पीओके के लोग भी भारत का हिस्सा बनें।केरन के एक युवा ने बताया कि उनका ननिहाल सीमा के उस पार है। बचपन से उन्होंने अपने रिश्तेदारों को केवल नदी के किनारे खड़े होकर हाथ हिलाते हुए देखा है। उनका कहना था कि जब वे इस तरफ विकास, बिजली, मोबाइल नेटवर्क और शांति देखते हैं और दूसरी तरफ राशन तथा बिजली जैसी सुविधाओं के लिए लोगों की परेशानी की बातें सुनते हैं, तो उन्हें बेहद दुख होता है।

पहली बार एलओसी पर आतिशबाजी

स्थानीय लोगों के अनुसार, 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केरन में एलओसी के पास पहली बार इस तरह बड़े स्तर पर आतिशबाजी की गई। रात के अंधेरे में रंग-बिरंगी आतिशबाजी ने किशनगंगा नदी के आसपास के इलाके को रोशन कर दिया।आतिशबाजी देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। तिरंगे के साथ देशभक्ति के नारों से वातावरण गूंजता रहा और लोगों के चेहरों पर उत्साह तथा गर्व साफ दिखाई दिया।

देश के प्रति प्रेम और राष्ट्र को सलामी

केरन के लोगों के लिए स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन महज एक उत्सव नहीं था। स्थानीय लोगों ने इसे देश के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने, शहीदों को याद करने और तिरंगे को सलामी देने का अवसर बताया।सुबह से लेकर देर रात तक लोगों में स्वतंत्रता दिवस को लेकर उत्साह बना रहा। तिरंगे के साथ ‘जय हिंद’ के नारों ने सीमांत क्षेत्र में देशभक्ति का माहौल बना दिया।किशनगंगा के दोनों किनारों पर बसे परिवारों की दशकों पुरानी दूरियां भले ही आज भी कायम हों, लेकिन केरन में स्वतंत्रता दिवस की रात तिरंगे की रोशनी और देशभक्ति के नारों ने यह संदेश जरूर दिया कि सरहदें भौगोलिक दूरी बना सकती हैं, लेकिन रिश्तों और भावनाओं को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकतीं।