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चुनावी शुचिता पर घमासान: मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर महाभियोग और ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर गर्माई राजनीति

प्रकाशित: 24 October 2026, 8:10 am

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं और तथाकथित ‘वोट चोरी’ को लेकर मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर सीईसी को हटाने और 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को रद्द करने की मांग की है, साथ ही संसद में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव (Impeachment Motion) लाने के लिए नोटिस की तैयारी पूरी कर ली है।

संसदीय नियमों के तहत इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पुष्टि की है कि यदि विपक्ष औपचारिक प्रस्ताव पेश करता है, तो तय संवैधानिक नियमों के अनुसार उसकी समीक्षा की जाएगी। महाभियोग की यह प्रक्रिया न्यायाधीश जांच अधिनियम (Judges Inquiry Act) के तहत संचालित होती है, जिसमें 100 सदस्यों के हस्ताक्षर वाले नोटिस के बाद सुप्रीम कोर्ट के जज, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद की तीन सदस्यीय समिति आरोपों की जांच करती है।

आज तक के महत्वपूर्ण घटनाक्रम एवं बिंदु:

विपक्ष का आरोप और विरोध-प्रदर्शन: विपक्षी दलों का मुख्य आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान चुनाव आयोग ने मनमाने ढंग से काम किया है। इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं ने देशव्यापी विरोध रैलियों का आयोजन किया है और नवंबर के अंत तक और भी बड़े अभियानों की रूपरेखा तैयार की है।

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद: रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयोग के भीतर भी कुछ निर्णयों पर असहमति दर्ज की गई थी, जिससे इस विवाद ने और जोर पकड़ा।

लोकसभा अध्यक्ष का रुख: ओम बिरला ने स्पष्ट किया है कि भारत में सर्वोच्च पदों पर आसीन अधिकारियों को हटाने के लिए एक स्पष्ट संवैधानिक प्रक्रिया है। संसद का मानसून सत्र अभी औपचारिक रूप से अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बावजूद सत्रावसान (Prorogue) नहीं हुआ है, जिससे नए प्रस्तावों को पेश करने की संभावना पर चर्चा तेज है।

न्यायालय का रुख: सुप्रीम कोर्ट में भी इस प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कुछ फैसलों से जुड़ी याचिकाओं पर विचार चल रहा है, हालाँकि अदालत ने सीईसी के कामकाज पर तुरंत रोक लगाने से इनकार करते हुए नोटिस जारी किए हैं।संसद से लेकर सड़कों तक चुनाव आयोग की निष्पक्षता का यह मुद्दा वर्तमान राजनीति का सबसे बड़ा संवेदनशील केंद्र बना हुआ है।