देश-विदेश समाचार

फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं, सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए: सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का बड़ा हलफनामा, SIR विवाद पर दी सफाई

प्रकाशित: 27 October 2026, 8:06 am

नई दिल्ली

फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं, सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए: सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का बड़ा हलफनामा, SIR विवाद पर दी सफाईचुनाव आयोग (ECI) ने उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में दाखिल अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि उसने नए मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले वैधानिक ‘फॉर्म 6’ (Form 6) में कोई संशोधन या बदलाव नहीं किया है।

आयोग ने कानून का हवाला देते हुए बताया कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत फॉर्म में किसी भी तरह के बदलाव का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं से मांगी जा रही अतिरिक्त घोषणा (Annexure D) एक अलग दस्तावेज था। ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदकों की सहूलियत के लिए इसे साथ दिखाया जा रहा था, लेकिन इस पर पैदा हुए भ्रम को दूर करने के लिए 21 अक्टूबर से ऑनलाइन व्यवस्था में भी फॉर्म 6 और SIR घोषणा को दो पूरी तरह से अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है।

यह विवाद तब गहराया जब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 का ढांचा बदलकर मतदाताओं के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। इस SIR घोषणा के तहत आवेदकों को यह जानकारी देनी पड़ रही थी कि उनका या उनके माता-पिता/दादा-दादी का नाम पुरानी (वर्ष 2002 आदि की) मतदाता सूचियों में दर्ज था या नहीं। आलोचकों और विपक्ष का तर्क था कि यह शर्त पहली बार वोट देने वाले युवाओं और उन नागरिकों के लिए एक अनुचित प्रशासनिक बाधा बन रही है जिनके परिवारों का नाम पुरानी सूचियों में नहीं था। मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने भी टिप्पणी की थी कि उसने फॉर्म 6 के किसी संशोधित रूप को मंजूरी नहीं दी है और वह आयोग के रिकॉर्ड की जांच करना चाहता है, जिसके बाद आयोग ने यह विस्तृत हलफनामा दायर किया।

फॉर्म में बदलाव के साथ-साथ यह मुद्दा चुनाव आयोग के भीतर प्रशासनिक फैसलों और कथित मतभेदों को लेकर भी विवादों में आ गया था। मीडिया रिपोर्टों के हवाले से दावा किया जा रहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) को दरकिनार कर SIR से जुड़े निर्णय एकतरफा लिए। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने बताया कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी SIR से संबंधित तीनों मुख्य आदेश तीनों सदस्यों की पूर्ण सर्वसम्मति और लिखित सहमति से पारित किए गए थे। आयोग ने यह भी साफ किया कि फाइल प्रोसेसिंग के दौरान आयुक्तों द्वारा उठाए गए सवालों या टिप्पणियों को आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

हलफनामे के अंत में चुनाव आयोग ने अदालत से आग्रह किया है कि केवल मीडिया खबरों और निराधार आशंकाओं पर आधारित इस याचिका को खारिज किया जाए। आयोग ने आश्वस्त किया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम पूरा हो चुका है, वहां से इस अतिरिक्त घोषणा की जरूरत हटा दी गई है। इसके अलावा, SIR की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद भी कोई भी पात्र नागरिक नियमानुसार मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 जमा करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा।