राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति देवेंद्र कच्छवाहा का कार्यकाल बढ़ा
जिला न्यायपालिका से राजस्थान हाईकोर्ट तक का रहा न्यायिक सफर, उपभोक्ता हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए
जोधपुर। राजस्थान सरकार ने राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष एवं राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति देवेंद्र कच्छवाहा का कार्यकाल बढ़ा दिया है। उनका चार वर्ष का कार्यकाल 26 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा था। उपभोक्ता मामलात विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब वे 67 वर्ष की आयु पूरी होने अथवा नए अध्यक्ष की नियुक्ति होने तक—जो भी पहले हो—पद पर बने रहेंगे।
यह विस्तार राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका में हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों की पृष्ठभूमि में किया गया है। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जिला एवं राज्य उपभोक्ता आयोगों में नई नियमित नियुक्तियाँ होने तक रिक्तता से बचने के संबंध में निर्देश दिए थे। बाद में 9 जुलाई के आदेश में राज्य आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल नियमानुसार अधिकतम 67 वर्ष की आयु तक जारी रखने का मार्ग स्पष्ट किया गया।
न्यायमूर्ति देवेंद्र कच्छवाहा का जन्म 3 मई 1960 को जोधपुर में हुआ। उन्होंने बीए और एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की। वे राजस्थान उच्च न्यायिक सेवा के अधिकारी रहे और राजस्थान के विभिन्न जिलों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में सेवाएँ दीं। उदयपुर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहते हुए उन्होंने बाल विवाह के विरुद्ध जन-जागरूकता अभियान जैसी गतिविधियों में भी भाग लिया।
केंद्र सरकार ने 4 मार्च 2020 को उनकी राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद पर नियुक्ति का आदेश जारी किया। उन्होंने 6 मार्च 2020 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महान्ति के समक्ष शपथ ली। करीब दो वर्ष तक राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश रहने के बाद अप्रैल 2022 में उन्हें विदाई दी गई और मई 2022 में वे सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद राजस्थान सरकार ने उन्हें राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया।
राज्य आयोग में उनके नेतृत्व वाली पीठ ने बीमा, बैंकिंग, आवास, सेवा में कमी और भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले सुने। वर्ष 2026 के एक बीमा प्रकरण में आयोग ने कहा कि वास्तविक दुर्घटना दावे को केवल एफआईआर में देरी अथवा पोस्टमार्टम नहीं होने जैसे तकनीकी आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता। आयोग ने बीमा कंपनी को ₹15 लाख के दावे का 75 प्रतिशत, यानी ₹11.25 लाख, नौ प्रतिशत ब्याज और वाद-व्यय सहित भुगतान करने का निर्देश दिया।
भ्रामक विज्ञापन से संबंधित एक अन्य चर्चित मामले में न्यायमूर्ति कच्छवाहा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अभिनेता सलमान खान और पान-मसाला कंपनी की पुनरीक्षण याचिकाएँ खारिज कर दी थीं। आयोग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि ऐसे मामलों पर केवल केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ही कार्रवाई कर सकता है। इस निर्णय ने जिला स्तर पर उपभोक्ताओं को प्रभावी राहत उपलब्ध कराने की व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया।
न्यायमूर्ति कच्छवाहा के कार्यकाल-विस्तार से राज्य उपभोक्ता आयोग में नेतृत्व की निरंतरता बनी रहेगी। लंबित प्रकरणों के निस्तारण तथा जिला उपभोक्ता आयोगों के न्यायिक मार्गदर्शन की दृष्टि से भी इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
