मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग: जंतर-मंतर पर बवाल, NSUI और यूथ कांग्रेस की आक्रामक हुंकार; कई प्रदर्शनकारी हिरासत में
दिल्ली
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर निर्वाचन सदन तक शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज में अनियमितताओं के गंभीर आरोपों को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर CEC की तुरंत गिरफ्तारी और उनके इस्तीफे की मांग की।
प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया और जंतर-मंतर तथा आसपास के इलाकों से करीब 90 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
इस विरोध प्रदर्शन में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) और भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ तीखा हमला बोला। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव के नेतृत्व में दिल्ली कांग्रेस, NSUI और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ITO से निर्वाचन सदन की ओर मार्च निकाला।
कांग्रेस के युवा व छात्र पंखों ने साफ कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट पवित्र है और उसे सुरक्षित रखना चुनाव आयोग की नैतिक व संवैधानिक जिम्मेदारी है। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाकर गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक ‘राहुल गांधी के सिपाही’ पीछे नहीं हटेंगे और यह लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी।
जंतर-मंतर पर मुख्य प्रदर्शन का आह्वान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) द्वारा किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अंजली भारद्वाज समेत कई प्रमुख छात्र नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर अलग-अलग थानों में भेज दिया।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया कि उनके साथ बदसलूकी की गई और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार को दबाने का प्रयास किया गया।दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस (नई दिल्ली डीसीपी) ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों ने इस कार्यक्रम या मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली थी। पुलिस प्रशासन ने बल प्रयोग या बिना नेमटैग के तैनात रहने जैसे तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बिना अनुमति एकत्रित हुई भीड़ को हटाने के लिए नियमानुसार आवश्यक और विधिक कदम उठाए गए।
