अनंत चतुर्दशी 2026 : महत्व, महात्म्य, पूजा-विधान, व्रत-कथा और अनंत सूत्र का रहस्य
आलेख :- महिपाल सिंह
अनंत चतुर्दशी हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है। यह भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है और भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा, व्रत तथा 14 गांठ वाले अनंत सूत्र के धारण से जुड़ा है। इसी दिन गणेशोत्सव का समापन होने के कारण अनेक स्थानों पर गणेश प्रतिमा का विसर्जन भी किया जाता है।
वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी शुक्रवार, 25 सितंबर को है। उपलब्ध पंचांग स्रोतों के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात से शुरू होकर 25 सितंबर की रात तक रहेगी; स्थानीय शहर के अनुसार पूजा और विसर्जन के मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
अनंत चतुर्दशी का क्या अर्थ है?

‘अनंत’ का अर्थ है—जिसका कोई अंत नहीं। धार्मिक परंपरा में इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना की जाती है।
भक्त भगवान विष्णु से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि, संकटों से रक्षा और जीवन में स्थिरता की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अनंत व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से मनुष्य के जीवन में शुभता आती है। हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से सिद्ध परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
🪔 अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व

- भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा
इस दिन भगवान विष्णु को अनंत भगवान के रूप में पूजा जाता है। शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। - अनंत सूत्र का विशेष महत्व
पूजा के बाद 14 गांठ वाला अनंत सूत्र धारण किया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में सूत्र बांधने का तरीका भिन्न हो सकता है। कई उत्तर भारतीय परंपराओं में पुरुष दाहिनी कलाई और महिलाएं बाईं कलाई पर सूत्र धारण करती हैं। - चौदह गांठों का रहस्य
धार्मिक परंपरा में 14 गांठों को चौदह लोकों आदि के प्रतीक के रूप में समझाया जाता है। इसीलिए सूत्र में 14 गांठों का विशेष महत्व माना गया है। - गणेशोत्सव का समापन
अनंत चतुर्दशी गणेशोत्सव के समापन से भी जुड़ी हुई है। जिन स्थानों पर दस दिवसीय गणेशोत्सव मनाया जाता है, वहां इस दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

🌿 अनंत चतुर्दशी की पूजा सामग्री
- पूजा के लिए सामान्यतः निम्न सामग्री रखी जा सकती है
- भगवान विष्णु/अनंत भगवान का चित्र या प्रतिमा
- पीला या लाल कपड़ा
- चौकी
- कलश
- जल
- आम के पत्ते
- नारियल
- रोली/कुमकुम
- चंदन
- अक्षत
- पीले या अन्य सुगंधित पुष्प
- तुलसी दल
- धूप एवं दीप
- घी
- फल
- पंचामृत
- मिठाई
- नैवेद्य
- 14 गांठ वाला अनंत सूत्र
- दक्षिणा
- कथा-पुस्तिका
पूजा सामग्री में स्थानीय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है।
🪔 अनंत चतुर्दशी की संपूर्ण पूजा-विधि

पहला चरण — स्नान और संकल्प
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाएं।
भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए मन में संकल्प लें—
“मैं श्रद्धापूर्वक भगवान अनंत की पूजा एवं अनंत व्रत का पालन कर रहा/रही हूं। भगवान मेरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।”
दूसरा चरण — कलश स्थापना
चौकी पर कलश स्थापित करें। कलश में स्वच्छ जल भरें। उसमें आवश्यकतानुसार अक्षत, सुपारी आदि रखें और ऊपर आम के पत्ते तथा नारियल रखें।
इसके बाद भगवान विष्णु/अनंत भगवान का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
तीसरा चरण — भगवान विष्णु का पूजन
भगवान को—
चंदन
अक्षत
पुष्प
तुलसी
धूप
दीप
नैवेद्य
फल
अर्पित करें।
भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए मंत्र का जाप करें—
“ॐ अनन्ताय नमः।”
इस मंत्र का 14 या 108 बार जाप अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार किया जा सकता है।
🧵 अनंत सूत्र कैसे तैयार करें?

अनंत चतुर्दशी का सबसे प्रमुख प्रतीक अनंत सूत्र है।
सामान्य रूप से सूती अथवा रेशमी धागे को पूजा में रखा जाता है और उसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। कुछ परंपराओं में धागे को हल्दी आदि से पीला किया जाता है।
पूजा के समय अनंत सूत्र को भगवान के सामने रखकर चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद मंत्र और प्रार्थना के साथ इसे धारण किया जाता है।
सूत्र बांधने की परंपरा
कई परंपराओं में—
पुरुष — दाहिनी कलाई
महिला — बाईं कलाई
पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। परिवार या क्षेत्र की परंपरा अलग हो तो उसका पालन किया जा सकता है।
📖 अनंत चतुर्दशी की प्रसिद्ध व्रत कथा

अनंत चतुर्दशी की कथा का संबंध सुशीला और कौंडिन्य ऋषि से बताया जाता है।
कथा के अनुसार सुशीला ने कुछ महिलाओं को भगवान अनंत की पूजा करते देखा। पूछने पर उन्हें अनंत व्रत और 14 गांठ वाले अनंत सूत्र के बारे में जानकारी मिली। सुशीला ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया और अनंत सूत्र धारण किया।
बाद में कौंडिन्य ऋषि की नजर उस सूत्र पर पड़ी। उन्होंने उसके महत्व को समझे बिना उसे उतारकर नष्ट कर दिया। इसके बाद उनके जीवन में अनेक कठिनाइयां आने लगीं।
कौंडिन्य ऋषि को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने भगवान अनंत की आराधना की और अनंत व्रत का महत्व समझा। कथा में आगे भगवान अनंत की कृपा से उनके जीवन में पुनः सुख और समृद्धि आने का वर्णन मिलता है।
इस कथा का मुख्य संदेश है कि श्रद्धा, संयम, विश्वास और अपने कर्मों के प्रति जिम्मेदारी जीवन में महत्वपूर्ण हैं।
🏹 महाभारत से भी जुड़ा है अनंत व्रत
अनंत चतुर्दशी की परंपरा को महाभारत की कथा से भी जोड़ा जाता है।
धार्मिक कथा के अनुसार वनवास के समय पांडवों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था। तब श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को भगवान अनंत का व्रत करने की सलाह दी। युधिष्ठिर ने विधिपूर्वक अनंत व्रत किया।
इसी कथा परंपरा में अनंत व्रत को संकटों के समय धैर्य, विश्वास और भगवान की शरण का प्रतीक माना गया है।
🌸 अनंत चतुर्दशी व्रत का फल क्या माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत से निम्न आध्यात्मिक एवं पारिवारिक फल जुड़े बताए जाते हैं—
🪷 1. सुख-समृद्धि
मान्यता है कि भगवान अनंत की पूजा करने से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है।
🪷 2. संकटों से रक्षा
भक्त भगवान से परिवार को कठिनाइयों और संकटों से बचाने की प्रार्थना करते हैं।
🪷 3. मन की शांति
व्रत, पूजा, मंत्र-जाप और संयम को मानसिक एकाग्रता तथा आध्यात्मिक शांति से जोड़ा जाता है।
🪷 4. परिवार में सौहार्द
यह पर्व परिवार के सदस्यों को एक साथ पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करने का अवसर देता है।
🪷 5. मनोकामना की पूर्ति
धार्मिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं में अनंत व्रत को मनोरथ सिद्धि से जोड़ा गया है।
ध्यान दें: ये धार्मिक मान्यताएं हैं। किसी विशेष भौतिक परिणाम या मनोकामना पूरी होने की गारंटी के रूप में इन्हें प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
🌿 व्रत में क्या खाएं?
व्रत की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार बदलती है। सामान्यतः व्रती—
फलदूध
दही
पंचामृत
मखाना
साबूदाना
सिंघाड़े/कुट्टू का आटा
व्रत के अनुकूल भोजन
ले सकते हैं।
जो लोग कठोर उपवास करते हैं वे अन्न का सेवन नहीं करते। स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार व्रत का स्वरूप रखना चाहिए।
🕉️ पूजा के बाद क्या करें?
पूजा पूरी होने के बाद—
अनंत भगवान की आरती करें।
व्रत कथा सुनें/पढ़ें।
अनंत सूत्र धारण करें।
भगवान को नैवेद्य अर्पित करें।
प्रसाद ग्रहण करें।
सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें।
जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या अन्न दान करना शुभ माना जाता है।
परंपरागत कथा-विधान में दान, भोजन और दक्षिणा का भी उल्लेख मिलता है।
🐘 गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी का एक दूसरा प्रमुख पक्ष गणेश विसर्जन है।
गणेश चतुर्थी पर स्थापित की गई प्रतिमा का विसर्जन कई स्थानों पर अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है। विसर्जन से पहले भगवान गणेश की पूजा, आरती और नैवेद्य किया जाता है। इसके बाद श्रद्धापूर्वक प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है।विसर्जन का आध्यात्मिक संदेश यह भी माना जाता है कि ईश्वर के प्रति प्रेम और श्रद्धा स्थायी है, जबकि भौतिक रूप अस्थायी है।
पर्यावरण की दृष्टि से प्रतिमा विसर्जन स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित कृत्रिम तालाब/निर्धारित विसर्जन स्थल पर करना अधिक उचित है।
🌺 अनंत चतुर्दशी का आध्यात्मिक संदेश
अनंत चतुर्दशी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन के कुछ महत्वपूर्ण संदेश भी देती है—
अनंत सूत्र हमें निरंतरता की याद दिलाता है।
14 गांठें हमें धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं से जोड़ती हैं।
व्रत संयम का संदेश देता है।
पूजा श्रद्धा और एकाग्रता सिखाती है।
दान समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाता है।
और गणेश विसर्जन हमें परिवर्तन तथा अनित्यता को स्वीकार करने का संदेश देता है।
निष्कर्ष :-
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना, अनंत सूत्र धारण, व्रत-कथा और गणेशोत्सव के समापन का महत्वपूर्ण पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान अनंत की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। 14 गांठों वाला अनंत सूत्र इस पर्व की प्रमुख पहचान है। वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार


