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OBC आरक्षण और क्रीमी लेयर का दायरा: माता-पिता की आय पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की याचिका और भविष्य की दिशा

प्रकाशित: 1 September 2026, 12:42 pm

नई दिल्ली

अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए ‘क्रीमी लेयर’ (Creamy Layer) के निर्धारण का दायरा एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुँच गया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर उस फैसले पर पुनर्विचार या स्पष्टीकरण की मांग की है, जिसमें अदालत ने कहा था कि केवल माता-पिता की आय के आधार पर किसी उम्मीदवार को क्रीमी लेयर की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने विशेष पीठ गठित कर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की है, जिससे सिविल सेवा परीक्षा (UPSC CSE 2025) समेत देश की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले लाखों युवाओं का भविष्य और आरक्षण का ढांचा प्रभावित हो सकता है।

इस पूरे कानूनी विवाद की शुरुआत सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले से हुई थी, जिसमें अदालत ने माना था कि अन्य पिछड़ा वर्ग में सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के मूल्यांकन के लिए केवल परिवार की कुल वार्षिक आय ही एकमात्र पैमाना नहीं हो सकती। अदालत का तर्क था कि पद, सामाजिक स्थिति और सेवा के प्रकार को अलग रखते हुए केवल सकल आय के आधार पर किसी अभ्यर्थी को आरक्षण के लाभ से बाहर करना इंद्रा साहनी मामले (1992) के ऐतिहासिक निर्णय के सिद्धांतों से परे जा सकता है।​

हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि फैसले के भूतपेक्षी प्रभाव (Retrospective Application) और केवल आय को आधार न बनाने के निर्देश से प्रशासनिक स्तर पर प्रमाण-पत्र जारी करने और चयन प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने में तकनीकी व्यावहारिक जटिलताएँ आ रही हैं। केंद्र ने विशेष रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की चल रही सिविल सेवा भर्ती प्रक्रिया 2025 का हवाला देते हुए जल्द स्पष्टता की मांग की है। यदि क्रीमी लेयर की परिभाषा और लागू होने की तिथि में बदलाव होता है, तो चयनित उम्मीदवारों की सूची और आरक्षण श्रेणी के वितरण पर इसका प्रत्यक्ष असर पड़ेगा।​

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला सामाजिक न्याय के संवैधानिक विचार और प्रशासनिक सुगमता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में अत्यंत निर्णायक साबित होगा। क्रीमी लेयर का मूल उद्देश्य आरक्षण का लाभ केवल उन ज़रूरतमंदों तक पहुँचाना है जो वाकई सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ द्वारा इस मुद्दे पर आने वाला अंतिम रुख यह तय करेगा कि भविष्य में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए OBC क्रीमी लेयर का निर्धारण किस मानक पर किया जाएगा।