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सावधान! कंपनी के असली ‘बॉस’ की डीपी लगाकर ठगी कर रहे साइबर अपराधी: राजस्थान पुलिस की नई एडवाइजरी जारी

प्रकाशित: 1 September 2026, 12:35 pm

जयपुर।

डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन ठगी के लिए एक और नया खतरनाक पैंतरा आजमाया है, जिसे ‘बॉस स्कैम’ (Boss Scam) का नाम दिया गया है। साइबर ठग अब आम नागरिकों के बजाय कॉरपोरेट सेक्टर, कंपनियों और सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान पुलिस ने एक सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर कर्मचारियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

क्या है ‘बॉस स्कैम’ और कैसे बिछाया जा रहा है जाल?​

‘बॉस स्कैम’ (जिसे सोशल इंजीनियरिंग अटैक भी कहा जाता है) में ठग किसी कंपनी या संस्थान के उच्च अधिकारियों (CEO, MD या सीनियर मैनेजर) की जानकारी हासिल करते हैं। इसके बाद वे उस अधिकारी के नाम और तस्वीर (DP) का उपयोग करके एक फर्जी व्हाट्सएप नंबर या फर्जी ईमेल आईडी तैयार करते हैं।​

आपातकाल का बहाना:

ठग जूनियर कर्मचारियों को संदेश भेजते हैं कि “बॉस किसी बेहद जरूरी मीटिंग में व्यस्त हैं” और फोन रिसीव नहीं कर सकते।​अर्जेंट फंड या गिफ्ट कार्ड की मांग: मैसेज में लिखा होता है कि क्लाइंट को तुरंत गिफ्ट कार्ड, वाउचर या यूपीआई (UPI) ट्रांसफर की सख्त जरूरत है।​

दबाव और गोपनीयता:

कर्मचारियों को यह कहकर गुमराह किया जाता है कि यह काम अत्यधिक गोपनीय है और इसे तुरंत पूरा किया जाए, जिससे कर्मचारी बिना सोचे-समझे पैसे या कोड शेयर कर बैठते हैं।​

साइबर एक्सपर्ट्स और पुलिस की मुख्य सलाह​राजस्थान पुलिस ने इस तरह के झांसे से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:​

क्रॉस-वेरिफिकेशन जरूर करें:

किसी भी सीनियर अधिकारी के नाम से मिले पैसों के लेन-देन से जुड़े मैसेज की तुरंत पुष्टि करें। भले ही मैसेज में मना किया गया हो, फिर भी फोन कॉल करके या व्यक्तिगत रूप से बात करके पुष्टि करें।​

संदिग्ध नंबर जांचें:

व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर फोटो (DP) देखकर ही भरोसा न करें। मैसेज भेजने वाले का असली मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी जरूर चेक करें।

​जल्दबाजी से बचें:

साइबर अपराधी हमेशा ‘अर्जेंट’ (आपातकालीन) स्थिति का माहौल बनाते हैं ताकि सोचने का समय न मिले। पैसों का लेन-देन हमेशा तय प्रोटोकॉल के तहत ही करें।​

उपस्थिति की जांच:

यदि बॉस किसी मीटिंग में हैं, तो उनके पर्सनल सेक्रेटरी या सहकर्मियों से संपर्क कर संदेश की प्रामाणिकता की जांच करें।​ठगी होने पर क्या करें?​यदि कोई व्यक्ति या कर्मचारी इस तरह के साइबर अपराध का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए:​तु रंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल दर्ज कराएं।​ आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज करें।