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आयुष्मान भारत योजना—अंक 1 गंभीर बीमारी में आर्थिक सुरक्षा का बड़ा माध्यम

प्रकाशित: 6 August 2026, 7:26 am अपडेट: 12 August 2026, 6:00 am

आयुष्मान भारत योजना—अंक 1

गंभीर बीमारी में आर्थिक सुरक्षा का बड़ा माध्यम

गंभीर बीमारी किसी परिवार के लिए केवल स्वास्थ्य संकट नहीं होती। अस्पताल में भर्ती, ऑपरेशन, जांच, दवाइयों और विशेषज्ञ उपचार पर होने वाला खर्च परिवार की वर्षों की बचत समाप्त कर सकता है। कई परिवारों को उपचार के लिए कर्ज लेना, आभूषण अथवा संपत्ति बेचना या बीच में ही इलाज छोड़ना पड़ता है।

इसी आर्थिक संकट को कम करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने 23 सितंबर 2018 को आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, अर्थात एबी-पीएमजेएवाई प्रारंभ की। योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक के द्वितीयक और तृतीयक स्तर के अस्पताल उपचार की सुविधा दी जाती है।

योजना में पात्र परिवार सूचीबद्ध सरकारी या निजी अस्पताल में निर्धारित चिकित्सा पैकेज के अंतर्गत कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकता है। इसका अर्थ यह है कि स्वीकृत पैकेज वाले उपचार के लिए लाभार्थी को अस्पताल में पहले भुगतान करके बाद में प्रतिपूर्ति लेने की सामान्यतः आवश्यकता नहीं होती।

देश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी को सुरक्षा देने का लक्ष्य

भारत सरकार के अनुसार योजना लगभग 12 करोड़ गरीब और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए लागू की गई है। ये परिवार देश की आबादी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा माने गए हैं।

मार्च 2024 में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी सहायिकाओं और उनके परिवारों को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया। इस विस्तार से लगभग 37 लाख परिवारों को लाभार्थी वर्ग में जोड़ा गया।

योजना की मूल पात्रता सामाजिक-आर्थिक मानकों और सरकार के उपलब्ध लाभार्थी डेटाबेस के आधार पर निर्धारित होती है। इसलिए केवल आर्थिक कठिनाई का सामना कर रहा प्रत्येक परिवार स्वतः योजना का पात्र नहीं हो जाता। संबंधित परिवार को आधिकारिक पोर्टल, आयुष्मान ऐप, कॉमन सर्विस सेंटर या सूचीबद्ध अस्पताल के आयुष्मान सहायता केंद्र पर अपनी पात्रता जांचनी चाहिए।

70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक भी शामिल

वर्ष 2024 में योजना का एक महत्वपूर्ण विस्तार करते हुए 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना, स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाने का निर्णय किया गया।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए जारी किए जाने वाले विशेष कार्ड को आयुष्मान वय वंदना कार्ड कहा जाता है। सरकार ने इस विस्तार से लगभग 4.5 करोड़ परिवारों के करीब 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया था।

यह प्रावधान उन परिवारों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिनमें बुजुर्ग सदस्यों को हृदय रोग, कैंसर, हड्डी एवं जोड़ संबंधी बीमारी, किडनी रोग, न्यूरोलॉजी या अन्य गंभीर बीमारियों के नियमित और महंगे उपचार की आवश्यकता पड़ती है।

किन उपचारों की सुविधा?

भारत सरकार के नवीनतम राष्ट्रीय हेल्थ बेनिफिट पैकेज के अनुसार आयुष्मान भारत योजना में 27 चिकित्सा विशेषज्ञताओं से संबंधित 1,961 उपचार प्रक्रियाएं शामिल हैं।

इनमें सामान्य चिकित्सा, सामान्य सर्जरी, हृदय रोग, कैंसर उपचार, हड्डी रोग, मूत्र रोग, न्यूरोसर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग, नेत्र रोग तथा अन्य गंभीर उपचार शामिल हैं।

योजना का मुख्य केंद्र अस्पताल में भर्ती होकर किया जाने वाला द्वितीयक और तृतीयक उपचार है। सामान्य ओपीडी परामर्श या प्रत्येक प्रकार की जांच स्वतः योजना के अंतर्गत नहीं आती। इसलिए अस्पताल जाने से पहले आवश्यक उपचार के संबंधित पैकेज में शामिल होने की पुष्टि करना जरूरी है।

देशभर में उपचार की सुविधा

योजना की एक प्रमुख विशेषता इसकी पोर्टेबिलिटी है। पात्र लाभार्थी अपने गृह राज्य के अतिरिक्त दूसरे राज्य में स्थित सूचीबद्ध अस्पताल में भी उपचार प्राप्त कर सकता है। यह व्यवस्था प्रवासी मजदूरों, दूसरे राज्यों में रोजगार करने वाले लोगों और परिवार से दूर रहने वाले लाभार्थियों के लिए उपयोगी है।

आयुष्मान भारत योजना ने गरीब एवं कमजोर परिवारों को बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों तक पहुंच देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम उपलब्ध कराया है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब नागरिक अपनी पात्रता, कार्ड, सूचीबद्ध अस्पताल और उपलब्ध उपचार पैकेजों की सही जानकारी रखें।

अगले अंक में पढ़िए: अब तक कितने आयुष्मान कार्ड बने, कितने उपचार हुए, उपचारों का कुल अधिकृत मूल्य कितना रहा और वरिष्ठ नागरिकों को कितना लाभ मिला।

आधिकारिक आधार: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार द्वारा मार्च, जून और जुलाई 2026 में जारी विवरण।