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भ्रष्टाचार मामले में दोषसिद्धि के बावजूद पेंशन पर सीधा रोक नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश किया निरस्त, सुनवाई का अवसर देना जरूरी

By Adv. Rahul Rajpurohit प्रकाशित: 17 September 2026, 12:40 pm

जोधपुर।

राजस्थान हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषसिद्ध सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन बंद करने के आदेश को निरस्त करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा कि किसी कर्मचारी के दोषसिद्ध होने मात्र से उसकी पेंशन स्वतः समाप्त नहीं की जा सकती। पेंशन रोकने अथवा समाप्त करने से पहले कर्मचारी को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने तथा दंड की प्रकृति और सीमा के संबंध में अपनी परिस्थितियां प्रस्तुत करने का उचित अवसर दिया जाना आवश्यक है।

न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश रोहिताश मीणा बनाम राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम एवं अन्य मामले में दिया। याचिकाकर्ता वर्ष 2023 में राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम में सहायक लेखाधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुआ था। उसके विरुद्ध वर्ष 2011 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी और इसी संबंध में विभागीय कार्यवाही भी शुरू की गई थी। सेवानिवृत्ति के समय आपराधिक मामला और विभागीय जांच लंबित होने के कारण उसे अनंतिम पेंशन तथा 50 प्रतिशत ग्रेच्युटी दी गई थी। बाद में आपराधिक मामले में दोषसिद्धि होने पर विभाग ने उसकी पेंशन का अधिकार समाप्त कर दिया।कर्मचारी ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम कर्मचारी पेंशन विनियम, 1989 के विनियम 4 के तहत पेंशन रोकने की कार्रवाई से पहले उसे नोटिस दिया जाना आवश्यक था, लेकिन विभाग ने ऐसा नहीं किया। विभाग की ओर से याचिका की पोषणीयता पर भी आपत्ति जताई गई।

हाईकोर्ट ने कहा कि वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने का सिद्धांत हर स्थिति में रिट याचिका पर रोक नहीं लगाता, विशेषकर तब जब संबंधित आदेश में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ हो। अदालत ने पाया कि विनियम 4 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और कर्मचारी को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था।

अदालत ने पूर्व के रामजीलाल जांगिड़ बनाम आरएसआरटीसी एवं अन्य मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें पेंशन को कर्मचारी की वर्षों की सेवा से अर्जित महत्वपूर्ण वैधानिक अधिकार माना गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि के बावजूद कर्मचारी को प्रस्तावित दंड की प्रकृति और सीमा के संबंध में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने पेंशन समाप्त करने संबंधी आदेश निरस्त कर मामले को विभाग के पास नए सिरे से विचार के लिए भेज दिया। विभाग को कर्मचारी को शो-कॉज नोटिस जारी कर उचित सुनवाई का अवसर देने तथा इसके बाद नियमानुसार नया निर्णय लेने के निर्देश दिए गए। तब तक कर्मचारी की पेंशन कानून के अनुसार बहाल कर जारी रखने का भी आदेश दिया गया।