जालौर सभापति चुनाव में माली समाज के 14 पार्षद निर्णायक, भाजपा-कांग्रेस के सामने प्रत्याशी चयन की दुविधा
नामांकन की अंतिम तारीख कल; कांग्रेस बहुमत से दो कदम दूर, सात निर्दलीय पार्षदों पर टिकी बोर्ड की चाबी
जालौर। नगर परिषद जालौर के सभापति पद के लिए नामांकन प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख कल, बुधवार 16 सितंबर है। अंतिम दिन बड़ी संख्या में नामांकन-पत्र दाखिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। प्राप्त सूचनाओं के अनुसार निर्वाचित पार्षदों के साथ पार्षद चुनाव हार चुके कुछ प्रत्याशी और इस बार चुनाव नहीं लड़ने वाले लोग भी सभापति पद के लिए नामांकन प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं।
नामांकन-पत्रों की संवीक्षा 17 सितंबर को होगी। अभ्यर्थी 18 सितंबर को अपराह्न तीन बजे तक नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद ही सभापति पद के वास्तविक मुकाबले की तस्वीर स्पष्ट होगी।
कांग्रेस 19 पर, भाजपा के पास 14 पार्षद
नगर परिषद के 40 वार्डों में कांग्रेस के 19, भाजपा के 14 और सात निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए हैं। सभापति के निर्वाचन में जीत के लिए 21 मतों की आवश्यकता होगी। कांग्रेस बहुमत से केवल दो मत दूर है, जबकि भाजपा को जीत के लिए अपने सभी 14 पार्षदों के साथ सात अतिरिक्त मत जुटाने होंगे।
संख्या के आधार पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिखाई देती है, लेकिन गुप्त मतदान, निर्दलीय पार्षदों की भूमिका और संभावित क्रॉस वोटिंग के कारण अंतिम परिणाम के बारे में अभी निश्चित दावा करना कठिन है।
अलग-अलग बाड़ेबंदी में दोनों दलों के पार्षद
प्राप्त सूचनाओं के अनुसार भाजपा और कांग्रेस दोनों के निर्वाचित पार्षद अलग-अलग बाड़ेबंदी में हैं। दोनों दल अपने पार्षदों को एकजुट रखने के साथ निर्दलीय पार्षदों का समर्थन प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं।
सातों निर्दलीय पार्षद फिलहाल राजनीतिक संपर्क से दूर अथवा राजनीतिक भाषा में ‘भूमिगत’ बताए जा रहे हैं। उनसे संपर्क स्थापित करने के लिए दोनों प्रमुख दलों और सभापति पद के संभावित दावेदारों को मशक्कत करनी पड़ रही है। निर्दलीय पार्षदों ने अभी तक सामूहिक रूप से किसी दल को समर्थन देने की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है।
माली समाज के 14 पार्षद बने सबसे प्रभावशाली समूह
नगर परिषद जालौर में इस बार माली समाज के 14 पार्षद निर्वाचित हुए हैं। इनमें भाजपा और कांग्रेस से निर्वाचित पार्षदों के साथ निर्दलीय पार्षद भी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या के कारण सभापति चुनाव में माली समाज के पार्षद अत्यंत प्रभावशाली और निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने सबसे बड़ी दुविधा सभापति प्रत्याशी के चयन को लेकर है। माली समाज को छोड़कर किसी अन्य समाज के व्यक्ति को अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने की स्थिति में उलट परिणाम सामने आने की आशंका व्यक्त की जा रही है। अलग-अलग दलों से निर्वाचित होने के बावजूद माली समाज के पार्षदों के रुख पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
सामाजिक प्रतिनिधित्व, व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय राजनीतिक समीकरण मतदान के समय पार्टीगत गणित को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण क्रॉस वोटिंग की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
भाजपा-कांग्रेस ने अभी नहीं खोले पत्ते
समाचार लिखे जाने तक भाजपा और कांग्रेस में से किसी भी दल ने जालौर सभापति पद के लिए अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। दोनों दल माली समाज के प्रतिनिधित्व, निर्दलीय पार्षदों के समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग का आकलन करने के बाद अंतिम निर्णय लेना चाहते हैं।
शहर में अलग-अलग नामों को लेकर कयास और दावे किए जा रहे हैं। कई लोग अपनी ओर से संभावित प्रत्याशियों के नाम आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन किसी दल की औपचारिक घोषणा नहीं होने के कारण फिलहाल किसी नाम को अधिकृत प्रत्याशी नहीं माना जा सकता।
फॉर्म लेने वालों की अधिकृत सूची का इंतजार
सभापति पद के लिए मंगलवार को किन-किन लोगों ने नामांकन-पत्र प्राप्त किए, इसकी प्रमाणित नामवार सूची अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। अंतिम स्थिति बुधवार को नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद स्पष्ट होगी।
सभापति पद के लिए मतदान 21 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक होगा। मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किया जाएगा।
