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बंशीलाल की जीत में समाज की एकजुटता बनी निर्णायक, तीन निर्दलीय बने ‘कोहिनूर’, वेलाराम माली और लक्ष्मणसिंह सांखला ने निभाई सूत्रधार की भूमिका; समाज ने जताया हृदय से आभार

प्रकाशित: 21 September 2026, 9:54 am

आलेख: धर्मेंद्र सुंदेशा, संस्थापक, मारवाड़ पत्रिका डॉट कॉम,

जालोर।

जालोर नगर परिषद के सभापति चुनाव में कांग्रेस के बंशीलाल माली की 23 मतों से हुई जीत के पीछे राजनीतिक रणनीति के साथ माली समाज की एकजुटता और समाज के प्रमुख लोगों की सक्रिय भूमिका भी चर्चा में है।

समाज की ओर से निर्दलीय पार्षद बसंती देवी, नर्मदा कुमारी और हुकमीचंद माली को इस जीत के तीन ‘कोहिनूर’ बताते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया जा रहा है।

वहीं पूर्व पार्षद वेलाराम माली तथा अधिवक्ता लक्ष्मणसिंह सांखला को समाज और पार्षदों को एकजुट रखने वाले प्रमुख सूत्रधार के रूप में देखा जा रहा है।

नगर परिषद के सभापति चुनाव में बंशीलाल माली को 23 और भाजपा प्रत्याशी जयसिंह को 17 मत मिले। गुप्त मतदान होने के कारण किसी पार्षद के व्यक्तिगत मत की आधिकारिक पुष्टि संभव नहीं है। हालांकि चुनाव से पहले बने समर्थन के समीकरण और सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों के आधार पर समाज में बसंती देवी, नर्मदा कुमारी और हुकमीचंद माली की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समाजबंधुओं का कहना है कि इन निर्दलीय पार्षदों ने व्यक्तिगत दबाव और प्रलोभनों से ऊपर उठकर जनभावना, सामाजिक एकता तथा अपने वार्ड के मतदाताओं की अपेक्षाओं का सम्मान किया। उन्होंने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में जनबल और जनविश्वास की शक्ति धनबल तथा भुजबल से कहीं अधिक प्रभावशाली होती है।

इस पूरे घटनाक्रम में पूर्व पार्षद वेलाराम माली का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। उन्होंने निर्दलीय पार्षदों को एकजुट रखने और समाज तथा जालोर के हित में बंशीलाल माली के समर्थन में लाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। वे चुनावी दबावों के सामने झुके बिना खुलकर बंशीलाल माली के पक्ष में खड़े रहे। वेलाराम माली इससे पहले स्वयं नगर परिषद के पार्षद रह चुके हैं। पूर्व के एक सभापति चुनाव में भी समाज के प्रत्याशी को विजयी बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा था। वर्तमान चुनाव में दोबारा सामाजिक एकता का झंडा बुलंद रखने के कारण विभिन्न स्थानों पर समाजबंधुओं द्वारा उनका अभिनंदन किया जा रहा है।

कांग्रेस के संघर्षशील कार्यकर्ता एवं पेशे से अधिवक्ता लक्ष्मणसिंह सांखला की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं रही। वे पूर्व में कांग्रेस पार्षद रह चुके हैं। इस बार वार्ड संख्या 21 से चुनाव लड़ते हुए मात्र दस मतों के अंतर से पराजित हो गए। इसके बावजूद उन्होंने अपनी व्यक्तिगत हार को पीछे छोड़कर कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों को एकजुट रखने तथा निर्दलीय पार्षदों को बंशीलाल माली के समर्थन में साथ लाने के लिए पूरी सक्रियता से काम किया।

लक्ष्मणसिंह सांखला की पहचान स्पष्टवादिता, संघर्षशीलता और संगठन के भीतर मजबूत संपर्क रखने वाले कार्यकर्ता के रूप में है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं तक उनकी राजनीतिक पहुँच मानी जाती है। यदि वे अपने वार्ड से विजयी हुए होते तो सभापति पद के प्रमुख दावेदारों में उनका नाम भी स्वाभाविक रूप से सामने आ सकता था। लेकिन अपनी हार के बाद भी उन्होंने बंशीलाल माली के लिए वही प्रयास किए, जो संभवतः वे स्वयं के लिए करते।

इस प्रकार बंशीलाल माली की जीत किसी एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि पार्षदों, समाज के वरिष्ठ लोगों, कांग्रेस संगठन और शहर की जनभावना के सम्मिलित सहयोग का परिणाम मानी जा रही है। समाजबंधुओं ने बसंती देवी, नर्मदा कुमारी, हुकमीचंद माली, वेलाराम माली और लक्ष्मणसिंह सांखला के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है।

अब इस एकजुटता की वास्तविक सार्थकता तभी सिद्ध होगी, जब नया नगर परिषद बोर्ड राजनीतिक और सामाजिक सीमाओं से ऊपर उठकर जालोर के सभी 40 वार्डों के समान विकास के लिए काम करेगा। बंशीलाल माली और उनके सहयोगियों के सामने शहर की सफाई, सड़क, नाली, जल निकासी, पेयजल, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था तथा लंबित विकास कार्यों को गति देने की बड़ी जिम्मेदारी है। समाज ने एकता का संदेश दिया है; अब नगर परिषद को सेवा, सुशासन और विकास का उदाहरण प्रस्तुत करना होगा।