चीनी के दामों में जोरदार उछाल, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमतें; सरकार ने उठाए कई बड़े कदम
आलेख:- महिपाल सिंह (सह- संपादक)
नई दिल्ली। देश में चीनी की कीमतों में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। त्योहारी सीजन से पहले बढ़ती मांग और घरेलू बाजार में उपलब्धता पर दबाव के चलते चीनी के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए हैं। अगस्त की शुरुआत में ही भारतीय बाजार में चीनी की कीमत करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ चुकी थी।
उपभोक्ता बाजार में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई 2026 को चीनी की औसत कीमत करीब ₹48.18 प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर करीब ₹55.70 प्रति किलो हो गई।
उत्पादन अनुमान घटा, आपूर्ति पर बढ़ा दबाव
चीनी की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण चालू 2025-26 सीजन में उत्पादन का अनुमान कम होना बताया जा रहा है। सरकार के ताजा अनुमान के अनुसार चीनी उत्पादन अब करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पहले करीब 343 लाख टन का अनुमान लगाया गया था। यानी उत्पादन अनुमान में लगभग 11 प्रतिशत की कमी आई है।
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम संबंधी नुकसान और फसल में बीमारी का असर भी उत्पादन पर पड़ा है। इससे घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ा है।
त्योहारों से पहले मांग बढ़ने की चिंता
गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान मिठाइयों, पेय पदार्थों और खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में बाजार में मांग बढ़ने के साथ सीमित स्टॉक ने कीमतों को और ऊपर धकेला है।
चीनी के एक्स-मिल भाव भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार कुछ प्रमुख बाजारों में एक्स-मिल कीमतें ₹5,400-5,500 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं।
क्या इथेनॉल उत्पादन है कीमत बढ़ने की मुख्य वजह?
चीनी महंगी होने के बाद इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा तेजी के लिए केवल इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। सरकार के अनुसार इस वर्ष इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा पहले की तुलना में कम रहा है।
सरकार ने कीमतों में तेजी के पीछे कम उत्पादन, मौसम से फसल को नुकसान, सीमित उपलब्धता और कुछ मामलों में जमाखोरी जैसे कारणों पर भी ध्यान दिया है।
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को दी मंजूरी
बढ़ती कीमतों और घरेलू आपूर्ति को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह कदम घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध कराने और कीमतों पर दबाव कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। आयात की यह सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी।
जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट
सरकार ने चीनी की जमाखोरी और कृत्रिम कमी रोकने के लिए स्टॉक सीमा भी तय की है। बड़े थोक उपभोक्ताओं को उनकी जरूरत के मुकाबले सीमित मात्रा में ही चीनी रखने की अनुमति होगी। सरकार ने बाजार में उपलब्ध स्टॉक की निगरानी बढ़ाने और चीनी मिलों में भौतिक जांच के निर्देश भी दिए हैं।
आम आदमी की जेब पर कितना असर?
चीनी की कीमतों में लगातार तेजी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ सकता है। इसके अलावा मिठाई, बिस्किट, पेय पदार्थ और अन्य चीनी आधारित खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। त्योहारी सीजन में मांग और बढ़ने की स्थिति में कीमतों पर दबाव बना रहने की आशंका है।
हालांकि, सरकार के आयात और स्टॉक नियंत्रण संबंधी कदमों से बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले सप्ताहों में इन उपायों का असर कीमतों पर कितना पड़ता है, यह घरेलू उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और त्योहारी मांग पर निर्भर करेगा।
