मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर CJP का उग्र रूप: दिल्ली छोड़ मुंबई से फूंका ‘जेल भरो आंदोलन’ का बिगुल!
मुंबई
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक बड़े आंदोलन की शुरुआत कर दी है। खास बात यह है कि इस बार प्रदर्शन के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर के बजाय मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क को चुना गया है। शुक्रवार शाम गेट नंबर 6 से इस ‘जेल भरो आंदोलन’ का शंखनाद हुआ।
आंदोलन के लिए मुंबई ही क्यों?
दीपके ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि मुंबई का चुनाव रणनीतिक है। इसका कारण महाराष्ट्र में हुए हालिया चुनाव परिणाम हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि तब महाराष्ट्र की 48 में से बीजेपी को मात्र 9 सीटें मिली थीं। इसके उलट, महज छह महीने बाद हुए विधानसभा चुनावों में महायुति गठबंधन ने 230 सीटों पर कब्जा जमा लिया। CJP इस बड़े राजनीतिक बदलाव पर गंभीर सवाल उठा रही है और इसी की पृष्ठभूमि में उन्होंने यह आंदोलन शुरू किया है।
आगे की क्या है रणनीति?
CJP की योजना इस आंदोलन को केवल मुंबई तक सीमित रखने की नहीं है। दीपके के अनुसार, यह प्रदर्शन मुंबई से शुरू होकर गोवा, कोलकाता और देश के अन्य प्रमुख हिस्सों तक ले जाया जाएगा। आंदोलन का अंतिम पड़ाव दिल्ली का जंतर-मंतर होगा, जहाँ बड़े पैमाने पर धरना दिया जाएगा। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, यह प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा।
पुलिस की रोक और गांधीवादी तर्क
इस आंदोलन को पुलिस से अनुमति नहीं मिली थी, लेकिन CJP ने इसे रोकने से इनकार कर दिया। गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के दिन प्रदर्शन शुरू करने के पीछे दीपके ने मुंबई के ऐतिहासिक महत्व का हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गांधी ने 1942 में मुंबई के ही गवालिया टैंक (अब अगस्त क्रांति मैदान) से ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की शुरुआत की थी। पुलिस द्वारा रोक लगाए जाने पर दीपके ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सवाल किया, “हम अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले बापू के सिद्धांतों पर चल रहे हैं, क्या अंग्रेजों ने कभी आंदोलन की इजाजत दी थी?”
अन्य दलों का क्या है रुख?
इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दल भी आक्रामक हैं। कांग्रेस ने रोहतक से लेकर उधमपुर और गुरुग्राम तक CEC के इस्तीफे की मांग करते हुए कई जगहों पर प्रदर्शन किए हैं। कांग्रेस ने तो प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के भी इस्तीफे की मांग कर दी है।
विश्लेषण:
यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों को हवा दे रहा है। महाराष्ट्र के अप्रत्याशित चुनावी नतीजों ने विपक्ष को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। CJP का ‘जेल भरो आंदोलन’ और कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि विपक्ष चुनाव आयोग पर दबाव बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। इस विरोध प्रदर्शन के भविष्य पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी, खासकर यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आंदोलन देश भर में कितना समर्थन जुटा पाता है।

