अमानक दवाओं पर सवाल बरकरार: जांच में सुधार या व्यवस्था में बदलाव?
अमानक दवाओं पर सवाल बरकरार: जांच में सुधार या व्यवस्था में बदलाव?
जयपुर। प्रदेश में अमानक दवाओं को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चिंता बनी हुई है। विशेष रूप से प्रसूताओं की मौतों और अस्पतालों में दवा गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बाद औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा जांच अभियान तेज किया गया। विभिन्न समाचारों में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में इंजेक्शन की शीशी में दवा के स्थान पर पानी मिलने जैसी गंभीर अनियमितताएं भी जांच के दायरे में आईं।
इसी बीच जुलाई माह की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट में एक अलग तस्वीर सामने आई है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 587 दवा नमूनों की जांच में 579 नमूने मानक (स्टैंडर्ड) पाए गए, जबकि केवल 8 नमूने अमानक (NSQ) घोषित किए गए। यानी लगभग 98.64 प्रतिशत नमूने मानक और 1.36 प्रतिशत नमूने अमानक पाए गए। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कंपनियों के नमूनों को अमानक बताया गया तथा आगे नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
यह रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़ा करती है। पहले जिन जांच अभियानों में कुछ स्थानों पर बड़ी संख्या में दवाओं की गुणवत्ता पर प्रश्न उठे थे और कठोर कार्रवाई की गई थी, वहीं अब अधिकांश नमूनों का मानक पाया जाना कई स्वाभाविक जिज्ञासाएं उत्पन्न करता है। क्या कठोर कार्रवाई और निगरानी का सकारात्मक प्रभाव पड़ा? क्या निर्माण एवं आपूर्ति व्यवस्था में सुधार हुआ? या फिर नमूना चयन और जांच प्रक्रिया में कोई बदलाव आया? इन प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर संबंधित विभाग की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट और पारदर्शी जानकारी से ही मिल सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दवा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं हो सकता, क्योंकि एक भी अमानक दवा किसी मरीज, विशेषकर गंभीर रोगियों, बच्चों और प्रसूताओं के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसलिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नियमित सैंपलिंग, स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण, जांच रिपोर्टों का सार्वजनिक प्रकटीकरण, दोषी पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई तथा पूरी आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शी निगरानी भी उतनी ही आवश्यक है।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी कंपनी या संस्था के विरुद्ध जांच रिपोर्ट, नियामकीय निष्कर्ष और विधिक प्रक्रिया अंतिम आधार होते हैं। इसलिए किसी पर आरोप लगाने से अधिक महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध प्रत्येक दवा सुरक्षित, प्रभावी और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हो।
