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सहिजन एक अमूल्य औषधि

प्रकाशित: 23 September 2026, 11:48 am

(डॉ० श्रीविजयकुमारजी पाठक, बी०ए०एम०एस०)

सहिजन सम्पूर्ण भारतमें पाया जानेवाला एक वृक्ष-विशेष है। इसकी फल्ली सब्जीके रूपमें प्रयुक्त होती है। इसे शोभांजन, शिग्रु, कृष्णबीज, सजिना, सजना, सुरजना, सुलजना, सेजना, सेंजना, सरगनो, सरगवो, सेकजो, शेवगा, मुआ, मरगाई, बड़ा डिंगन, मुंगा चेंगाड़, सरागु, मुंगराई, विद्रधिनाशन, स्त्रोचितहारी तथा इंडियन हार्स रेडिशट्रीके नामसे जाना जाता है।

आयुर्वेदके अनुसार इसका रस मधुर-कटु तथा गुण पाचक, अनुलोमक, शुक्रवर्धक, रुचिकारक, वातघ्न, नेत्रशोधक, कृमिघ्न, मेदघ्न, शोथहर, वेदनाशामक, गण्डमालाघ्न तथा विद्रधिनाशक है।

वैसे तो इसके सभी अङ्ग उपयोगमें लिये जाते हैं, परंतु विशेषरूपसे इसकी नरम फल्ली उदर एवं वात-रोगोंमें, पत्ती नेत्ररोग एवं रतौंधीमें, फूल उदरशूल, निर्बलता, कफवात आदिक रोगोंमें तथा मूल और छाल अन्तर्विद्रधि, गृध्रसी, दमा, सूजन, पथरी, जलोदर, यकृत, तिल्ली (प्लीहा), शोथ, गठिया, अर्धांगवात आदिमें प्रयुक्त किये जाते हैं।

सहिजनके दो विशिष्ट अनुभूत प्रयोग

१-सहिजनकी छालका स्वरस (ताजा रस) आधा-एक छटाक (३० मिलीलि०), शहद आधा चम्मच, मकरध्वज १/४ रत्ती—इन सभीको मिलाकर सायं-प्रातः खाली पेट लेनेसे अनेक वातज तथा कफज रोग एवं विद्रधि नष्ट होती है। इसका प्रयोग कम-से-कम पंद्रह दिनतक करना चाहिये।

यदि कैंसरपर इसका प्रयोग किया जाय तो लाभकी सम्भावना हो सकती है।

२-सहिजनके जड़की अन्तश्छाल आधा पाव (१०० ग्राम)-को आधा सेर जलमें एक या दो घंटे डालकर अच्छी तरह मसलकर आँचपर रख दे। आठवाँ भाग शेष बचनेपर अच्छी तरह मसलकर छान ले। उसमें अजवाइन ४ रत्ती, सोंठ ४ रत्ती, हींग १ रत्ती डालकर शीतल होनेपर पीये।

इससे गृध्रसी मात्र तीन दिनोंमें तथा गठिया वात, पक्षाघात, अर्धांगवात एवं अन्य वातज रोग पंद्रह दिनोंमें नष्ट हो सकते हैं।

इसका सेवन दोनों समय (प्रातः-सायं) खाली पेट करना चाहिये।

उपर्युक्त दोनों प्रयोगोंमें पथ्य तथा अपथ्य वातरोगके अनुसार करना चाहिये।

साभार : गीताप्रेस, गोरखपुर से प्रकाशित कल्याण—पचहत्तरवें वर्षका विशेषांक ‘आरोग्य अंक’।

मारवाड़ पत्रिका का आवश्यक अस्वीकरण

यह सामग्री गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित कल्याण—पचहत्तरवें वर्ष के विशेषांक ‘आरोग्य अंक’ में प्रकाशित डॉ. श्रीविजयकुमारजी पाठक, बी.ए.एम.एस. के आलेख “सहिजन एक अमूल्य औषधि” से साभार ली गई है। इसमें वर्णित औषधीय प्रयोग, मात्राएँ, परिणाम और रोगों से संबंधित दावे मूल लेखक एवं प्रकाशन के हैं। मारवाड़ पत्रिका इनकी सत्यता, प्रभावशीलता, सुरक्षा अथवा परिणाम की पुष्टि नहीं करती और इनके उपयोग से होने वाले किसी लाभ, हानि या दुष्प्रभाव की जिम्मेदारी नहीं लेती। किसी भी औषधीय प्रयोग को अपनाने, नियमित दवा में बदलाव करने अथवा उपचार शुरू या बंद करने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। कैंसर तथा अन्य गंभीर रोगों में चिकित्सकीय उपचार का विकल्प मानकर इसका उपयोग न करें।