शादी, धार्मिक आयोजन या जुलूस—मनमाने ढंग से डीजे बजाने की अनुमति नहीं, राष्ट्रीय नियमों में तय है आवाज की सीमा
लाउडस्पीकर के लिए लिखित अनुमति अनिवार्य, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक खुले स्थानों पर रोक
शादी-विवाह, धार्मिक कार्यक्रम, शोभायात्रा, राजनीतिक सभा और अन्य आयोजनों में डीजे तथा लाउडस्पीकर के तेज शोर से आम लोगों को होने वाली परेशानी रोकने के लिए देश में स्पष्ट नियम लागू हैं। ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के अंतर्गत डीजे, लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और ध्वनि विस्तारक उपकरणों का प्रयोग नियंत्रित किया गया है।
किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में लाउडस्पीकर अथवा पब्लिक एड्रेस सिस्टम चलाने से पहले सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। अनुमति मिलने का अर्थ यह नहीं है कि डीजे किसी भी आवाज में और किसी भी समय बजाया जा सकता है। आयोजक को निर्धारित समय और ध्वनि सीमा का पालन करना होगा।
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक खुले स्थानों पर लाउडस्पीकर और डीजे बजाने पर रोक है। बंद ऑडिटोरियम, सम्मेलन कक्ष, सामुदायिक भवन और बैंक्वेट हॉल के भीतर सीमित उपयोग की अनुमति हो सकती है, लेकिन वहां भी आवाज परिसर से बाहर जाकर आसपास के लोगों को परेशान नहीं कर सकती।
विशेष अवसर पर भी रात 12 बजे तक ही सीमित छूट
राज्य सरकार किसी विशेष सांस्कृतिक अथवा धार्मिक उत्सव पर रात 10 से 12 बजे तक लाउडस्पीकर चलाने की सशर्त अनुमति दे सकती है। यह छूट पूरे कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 15 दिनों के लिए ही दी जा सकती है। किसी विवाह, निजी आयोजन अथवा जुलूस के आधार पर रातभर डीजे चलाने का स्वतः अधिकार नहीं मिलता।
रिहायशी क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 डेसीबल सीमा
राष्ट्रीय मानकों के अनुसार औद्योगिक क्षेत्र में दिन के समय 75 और रात में 70 डेसीबल, व्यावसायिक क्षेत्र में 65 और 55 डेसीबल, रिहायशी क्षेत्र में 55 और 45 डेसीबल तथा शांत क्षेत्र में 50 और 40 डेसीबल की सीमा निर्धारित है।
सार्वजनिक स्थान पर डीजे अथवा लाउडस्पीकर की आवाज आयोजन स्थल की सीमा पर उस क्षेत्र के निर्धारित मानक से 10 डेसीबल अधिक अथवा अधिकतम 75 डेसीबल—इनमें से जो भी कम हो—से अधिक नहीं हो सकती। निजी परिसर में चलने वाले साउंड सिस्टम की आवाज परिसर की सीमा पर स्थानीय मानक से पांच डेसीबल से अधिक नहीं होनी चाहिए।
अस्पताल, विद्यालय और न्यायालय के आसपास विशेष प्रतिबंध
अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और न्यायालयों के चारों ओर कम-से-कम 100 मीटर क्षेत्र को सक्षम प्राधिकारी शांत क्षेत्र घोषित कर सकता है। ऐसे क्षेत्रों में डीजे, लाउडस्पीकर, हॉर्न, ढोल और अन्य तेज ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों पर विशेष प्रतिबंध लागू होते हैं।
रात के समय नियमों का उल्लंघन होने अथवा आवाज निर्धारित सीमा से अधिक होने पर पुलिस, जिला प्रशासन अथवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शिकायत दी जा सकती है। सक्षम अधिकारी डीजे बंद करवाने के साथ उपकरण जब्त करने और संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई करने का आदेश दे सकता है।
सुप्रीम कोर्ट भी स्पष्ट कर चुका है कि धार्मिक स्वतंत्रता, उत्सव या अभिव्यक्ति का अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को जबरन तेज आवाज सुनाने अथवा उसकी नींद, पढ़ाई, स्वास्थ्य और शांतिपूर्ण जीवन को प्रभावित करने का अधिकार नहीं देता। सार्वजनिक उत्सव और व्यक्तिगत आनंद वहीं तक उचित हैं, जहां उनसे दूसरे नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

