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राजस्थान से असम तक पहुँचा सिद्धयोग आधारित नशामुक्ति अभियान

प्रकाशित: 23 September 2026, 11:45 am

सैकड़ों स्थानों पर कार्यक्रमों का क्रम जारी; विद्यालयों-महाविद्यालयों में हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों और नागरिकों की सहभागिता

जोधपुर। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के साथ राष्ट्रीय समझौता ज्ञापन होने के बाद अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, जोधपुर ने सिद्धयोग ध्यान के माध्यम से नशामुक्ति का संदेश देशभर में पहुँचाने का अभियान तेज कर दिया है। संस्था की विभिन्न शाखाओं, साधकों और स्वयंसेवकों द्वारा विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा सामाजिक संस्थानों में लगातार सामूहिक ध्यान एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

संस्था से प्राप्त जानकारी के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों में सैकड़ों स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों, युवाओं और नागरिकों तक नशामुक्ति का संदेश पहुँचाया गया है। कार्यक्रमों में नशीले पदार्थों से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक नुकसान की जानकारी देने के साथ संजीवनी मंत्र तथा सिद्धयोग ध्यान की विधि समझाई जाती है।

बूंदी में 950 से अधिक विद्यार्थियों और स्टाफ की भागीदारी

राजस्थान के बूंदी जिले में पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, सीतापुरा तथा बाल विद्या निकेतन, अकतासा में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र की कोटा शाखा ने सिद्धयोग ध्यान एवं नशामुक्ति कार्यक्रम आयोजित किए। दोनों शिक्षण संस्थानों में 950 से अधिक विद्यार्थियों और स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया।

प्रतिभागियों को समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग द्वारा प्रवर्तित सिद्धयोग दर्शन की जानकारी दी गई। इसके बाद सामूहिक ध्यान कराया गया और विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों से दूर रहकर स्वस्थ तथा अनुशासित जीवन अपनाने की शपथ दिलाई गई।

बूंदी जिले के बरुंधन स्थित स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल में भी नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभाव बताते हुए आत्मसंयम, सकारात्मक संगति और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कोटा के शिक्षण संस्थानों में सामूहिक ध्यान

कोटा के प्रतापनगर, सेक्टर-26 स्थित उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र की कोटा शाखा के सहयोग से सिद्धयोग ध्यान कार्यक्रम आयोजित हुआ। विद्यार्थियों को ध्यान के माध्यम से एकाग्रता, मानसिक स्थिरता और आत्मानुशासन विकसित करने का संदेश दिया गया।

नयागांव स्थित कौटिल्य कॉलेज में 17 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक और मानसिक दुष्परिणामों से अवगत कराया गया। सामूहिक ध्यान के बाद विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने नशामुक्त जीवन जीने की शपथ ली।

सीकर में स्काउट्स-गाइड्स ने लिया संकल्प

सीकर के गोकुलपुरा स्थित हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स जिला मुख्यालय में 23 सितंबर को विशेष सिद्धयोग ध्यान एवं योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के सिद्धयोग दर्शन और संजीवनी मंत्र पर आधारित ध्यान-पद्धति की जानकारी दी गई।

सामूहिक ध्यान के दौरान विद्यार्थियों को आत्मसंयम, मानसिक एकाग्रता और सकारात्मक जीवनशैली विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने जीवनभर सभी प्रकार के नशों से दूर रहने का सामूहिक संकल्प लिया।

असम के तिनसुकिया में 450 से अधिक सहभागी

असम के तिनसुकिया कॉमर्स कॉलेज में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र के संयोजन में आयोजित सिद्धयोग ध्यान सत्र में 150 विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को मानसिक एकाग्रता, तनाव प्रबंधन और नशामुक्त जीवनशैली का महत्त्व समझाया गया।

तिनसुकिया क्षेत्र के बोडौसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल, माकुम तथा जी.बी. चौखानी स्कूल में हुए कार्यक्रमों में लगभग 300 विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया। कार्यक्रमों के अंत में प्रतिभागियों ने नशीले पदार्थों से दूर रहने की शपथ ली।

उपदेश के साथ ध्यान का व्यावहारिक अभ्यास

अभियान की विशेषता यह है कि इसमें विद्यार्थियों को केवल भाषण अथवा नशामुक्ति की शपथ तक सीमित नहीं रखा जा रहा। प्रत्येक कार्यक्रम में उन्हें सिद्धयोग की ध्यान-विधि बताकर सामूहिक अभ्यास भी कराया जाता है। आयोजकों का मानना है कि नशे की शुरुआत रोकने के लिए युवाओं में आत्मविश्वास, आत्मसंयम और मानसिक दृढ़ता विकसित करना भी आवश्यक है।

अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र के साधक कार्यक्रमों में यह संदेश दे रहे हैं कि नशे से जूझ रहे व्यक्ति को तिरस्कार के बजाय संवेदनशील सहयोग, उचित परामर्श, चिकित्सा और पुनर्वास की आवश्यकता होती है। ध्यान और आध्यात्मिक जीवनशैली ऐसे व्यक्ति में उपचार स्वीकार करने तथा नशे से बाहर निकलने का संकल्प मजबूत करने में सहायक हो सकती है।

राजस्थान और असम में सामने आए ये कार्यक्रम देशव्यापी अभियान की एक झलक हैं। संस्था के अनुसार विभिन्न राज्यों में स्थानीय शाखाओं और साधकों के माध्यम से आयोजन लगातार जारी हैं। भारत सरकार और अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र की यह साझेदारी सिद्धयोग ध्यान को नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता, आत्मानुशासन और सामाजिक सहभागिता के व्यापक अभियान से जोड़ रही है।