आत्मचेतना से नशामुक्ति का मार्ग दिखाता सद्गुरुदेव सियाग का सिद्धयोग दर्शन
बाबा गंगाई नाथ जी योगी की नाथ परम्परा को जनसाधारण तक पहुँचाया; भारत सरकार ने अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र के साथ किया राष्ट्रीय MoU
जोधपुर। व्यक्ति को केवल बाहरी उपदेश से नहीं, बल्कि उसके भीतर आत्मचेतना और आत्मसंयम जागृत करके हानिकारक प्रवृत्तियों से मुक्त करने का विचार समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के सिद्धयोग दर्शन का आधार है। जोधपुर मुख्यालय वाला अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र—AVSK आज इसी आध्यात्मिक विचार के आधार पर भारत सरकार के ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग का जन्म 24 नवंबर 1926 को बीकानेर जिले के पालना गांव में हुआ। साधारण पारिवारिक परिवेश में उनका पालन-पोषण हुआ और उन्होंने भारतीय रेल में सेवा की। आध्यात्मिक अनुभूतियों के बाद उनके जीवन की दिशा बदली और वे नाथ परम्परा के सिद्धयोगी बाबा श्री गंगाई नाथ जी योगी की शरण में पहुँचे।
बाबा गंगाई नाथ जी से प्राप्त हुआ आध्यात्मिक मार्गदर्शन
जामसर, बीकानेर से संबंधित बाबा श्री गंगाई नाथ जी योगी नाथ सम्प्रदाय की साधना परम्परा से जुड़े सिद्धयोगी थे। सद्गुरुदेव सियाग उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु और पथ-प्रदर्शक मानते थे। उनसे प्राप्त मार्गदर्शन के बाद श्री रामलाल जी सियाग ने अपना जीवन सिद्धयोग के प्रचार-प्रसार और मानव की आंतरिक चेतना जागृत करने के उद्देश्य को समर्पित कर दिया।
उनका मानना था कि मनुष्य के भीतर सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों प्रकार की प्रवृत्तियाँ विद्यमान रहती हैं। नशा, क्रोध, हिंसा, भय, तनाव और अनियंत्रित इच्छाएँ व्यक्ति को उसके वास्तविक स्वरूप से दूर करती हैं। आध्यात्मिक साधना के माध्यम से सात्त्विक प्रवृत्तियों को विकसित करके मनुष्य अपने जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
सद्गुरुदेव सियाग ने सिद्धयोग को किसी जाति, धर्म, वर्ग अथवा देश की सीमा में नहीं बाँधा। उनका संदेश मानवमात्र के आंतरिक रूपांतरण, आत्मबोध और विश्वकल्याण पर आधारित था। इसी उद्देश्य से उन्होंने अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, जोधपुर की स्थापना की और भारत सहित विदेशों में भी सिद्धयोग दर्शन का प्रचार किया।
मंत्र-जप और ध्यान पर आधारित सिद्धयोग
सद्गुरुदेव सियाग द्वारा प्रवर्तित सिद्धयोग मुख्यतः संजीवनी मंत्र के मानसिक जप और ध्यान पर आधारित साधना पद्धति है। साधक पहले सद्गुरुदेव की वाणी में संजीवनी मंत्र सुनता है। इसके बाद आरामदायक स्थिति में बैठकर सद्गुरुदेव के चित्र को कुछ समय देखता है और आंखें बंद करके ललाट के मध्य उनके स्वरूप का ध्यान करने का प्रयास करता है।
साधक मन ही मन सद्गुरुदेव से लगभग 15 मिनट ध्यान करवाने की प्रार्थना करता है और ध्यान के दौरान बिना होंठ हिलाए संजीवनी मंत्र का मानसिक जप करता रहता है। साधकों को सुबह और शाम नियमित ध्यान तथा दैनिक कार्य करते समय यथासंभव मंत्र का मानसिक जप करने की सलाह दी जाती है।
संस्था के अनुसार यह साधना पूरी तरह निःशुल्क है। इसके लिए किसी प्रकार का सदस्यता शुल्क, पाठ्यक्रम शुल्क अथवा आर्थिक शर्त नहीं रखी गई है। नियमित सिद्धयोग ध्यान से आत्मानुशासन, एकाग्रता, मानसिक संतुलन तथा नकारात्मक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण में सहायता मिलने की बात कही जाती है। इसी आधार पर इसे युवाओं में नशे के विरुद्ध आत्मबल विकसित करने के अभियान से जोड़ा गया है।
नशे की गंभीर निर्भरता की स्थिति में ध्यान के साथ आवश्यक चिकित्सकीय उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास सेवाएँ लेना भी महत्त्वपूर्ण है।
9 सितंबर को भारत सरकार के साथ हुआ राष्ट्रीय MoU
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने 9 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र सहित चार प्रमुख आध्यात्मिक संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। अन्य संगठनों में चिन्मय मिशन, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान और हरे कृष्णा मूवमेंट शामिल हैं।
विभाग की ओर से नशामुक्ति निदेशक अस्तिक कुमार पांडे और अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र की ओर से चंद्र सिंह ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समारोह में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव सुधांश पंत, संयुक्त सचिव—नशीले पदार्थ रोकथाम डॉ. संदीप आर. राठौड़ तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस राष्ट्रीय साझेदारी का उद्देश्य अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र के व्यापक साधक और स्वयंसेवक नेटवर्क के माध्यम से नशे के विरुद्ध जागरूकता, रोकथाम, सहायता, उपचार तथा पुनर्वास का संदेश जमीनी स्तर तक पहुँचाना है। इसके अंतर्गत विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और सार्वजनिक आयोजनों में सिद्धयोग ध्यान, आध्यात्मिक परामर्श, मूल्य आधारित जीवनशैली और नशामुक्ति संकल्प को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सद्गुरुदेव सियाग के महाप्रयाण के बाद भी अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र उनके दर्शन को आगे बढ़ा रहा है। भारत सरकार के साथ हुआ राष्ट्रीय समझौता इस आध्यात्मिक अभियान को नशामुक्ति के व्यापक सामाजिक उद्देश्य से जोड़ने वाला महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
