मातृ-मुक्ति का पावन तीर्थ सिद्धपुर: बिंदु सरोवर में मातृ-श्राद्ध से मिलता है मातृऋण चुकाने का पुण्य अवसर
सिद्धपुर
भारतीय सनातन परंपरा में गुजरात के पाटन जिले में स्थित सिद्धपुर को मातृ-मुक्ति, मातृ-श्राद्ध और तर्पण की पवित्र भूमि माना गया है। गया धाम में पितृपक्ष के पूर्वजों का श्राद्ध करने की परंपरा है, वहीं सिद्धपुर का बिंदु सरोवर दिवंगत माता और मातृवंश की पुण्य स्मृतियों को समर्पित विशिष्ट तीर्थ है।
इसी कारण सिद्धपुर को श्रद्धापूर्वक ‘मातृगया’ कहा जाता है।बिंदु सरोवर का पावन वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध में मिलता है—
“यस्मिन् भगवतो नेत्रान्न्यपतन्नश्रुबिन्दवः।
कृपया सम्परीतस्य प्रपन्नेऽर्पितया भृशम्॥
तद्वै बिन्दुसरो नाम सरस्वत्या परिप्लुतम्।
पुण्यं शिवामृतजलं महर्षिगणसेवितम्॥”
अर्थात शरणागत महर्षि कर्दम के प्रति भगवान के हृदय में करुणा उमड़ी और उनके नेत्रों से गिरे पवित्र अश्रुबिंदुओं से यह सरोवर ‘बिंदु सरोवर’ कहलाया। सरस्वती के जल से परिपूर्ण इस पुण्य सरोवर को कल्याणकारी, अमृतमय और महर्षियों द्वारा सेवित बताया गया है।
सिद्धपुर महर्षि कर्दम, माता देवहूति और भगवान कपिल की साधना-भूमि भी है। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान कपिल ने इसी पवित्र क्षेत्र में अपनी माता देवहूति को सांख्य दर्शन, आत्मज्ञान, भक्ति और मोक्ष का दिव्य उपदेश दिया था। माता को मोक्ष-मार्ग का ज्ञान प्रदान करने वाले इस प्रसंग ने सिद्धपुर को मातृ-कल्याण की अनुपम भूमि के रूप में प्रतिष्ठित किया।
तीर्थ-परंपरा में भगवान परशुराम का प्रसंग भी अत्यंत श्रद्धा से स्मरण किया जाता है। मान्यता है कि उन्होंने बिंदु सरोवर के तट पर अपनी माता रेणुका के निमित्त श्राद्ध और तर्पण किया। तभी से यह स्थान माता के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने, मातृऋण का स्मरण करने और दिवंगत मातृशक्ति की शांति एवं सद्गति की प्रार्थना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
प्रतिवर्ष देश-विदेश से हजारों परिवार सिद्धपुर पहुँचकर विद्वान तीर्थ-पुरोहितों के सान्निध्य में मातृ-श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और मातृ-षोडशी संपन्न करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सिद्धपुर में विशाल धार्मिक मेला भरता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। श्रद्धालु बिंदु सरोवर और कपिलमुनि आश्रम के दर्शन करते हुए अपनी माता, मातृवंश और पूर्वजों का भावपूर्ण स्मरण करते हैं।
बिंदु सरोवर, अल्पा सरोवर और ज्ञानवापिका से सुशोभित यह तीर्थ माता के त्याग, वात्सल्य और जीवनदायिनी शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की पवित्र भूमि है। सिद्धपुर की यात्रा केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि उस जननी के चरणों में श्रद्धा का अर्पण है, जिसके ऋण से मनुष्य जीवनभर उऋण नहीं हो सकता।
