प्रमुख वाणिज्य एवं कर समाचार
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से एमएसएमई और निर्यातकों को नए अवसर
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता किसानों, मछुआरों, एमएसएमई, लघु उद्योगों, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों, विनिर्माताओं और सेवा प्रदाताओं के लिए बड़े अवसर खोलेगा। इससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलने और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ने की संभावना है। मंत्री ने भारतीय उद्योगों से गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय मानकों, प्रतिस्पर्धी मूल्य और समयबद्ध आपूर्ति पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। समझौते का वास्तविक लाभ उत्पादवार शुल्क रियायतों, मूल स्थान संबंधी नियमों और अनुपालन शर्तों पर निर्भर करेगा। निर्यातकों को अंतिम अधिसूचनाओं और अपने क्षेत्र से संबंधित प्रावधानों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए।
रीसाइकिल वस्त्र उत्पादों को सरकारी बाजार से जोड़ेंगे जेम और वस्त्र समिति
नई दिल्ली। गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस और वस्त्र समिति ने पुराने कपड़ों, कपड़ा कचरे तथा स्क्रैप से तैयार रीसाइकिल और अपसाइकिल उत्पादों की सरकारी खरीद बढ़ाने के लिए समझौता किया है। वस्त्र समिति पात्र निर्माताओं की पहचान, सत्यापन और प्रमाणीकरण करने के साथ उत्पादों के तकनीकी मानक विकसित करेगी। जेम इन उत्पादों के लिए अलग श्रेणियाँ बनाकर विक्रेताओं को सरकारी खरीददारों से ऑनलाइन जोड़ेगा। महिला उद्यमियों, एमएसएमई, कारीगरों, रीसाइक्लिंग इकाइयों और स्थानीय उद्यमों को प्रशिक्षण तथा पंजीकरण सहायता भी दी जाएगी। इस पहल से कपड़ा कचरे को उपयोगी वस्तुओं में बदलने वाले छोटे कारोबारियों के लिए सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों की खरीद में नया बाजार खुलने की संभावना है।
टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर
नई दिल्ली। आयकर अधिनियम के अंतर्गत टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले कारोबारियों और पेशेवरों को वित्त वर्ष 2025-26 तथा आकलन वर्ष 2026-27 की टैक्स ऑडिट रिपोर्ट 30 सितंबर 2026 तक जमा करनी होगी। संबंधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की सामान्य अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 है। टैक्स ऑडिट रिपोर्ट निर्धारित प्रपत्र 3सीए अथवा 3सीबी के साथ 3सीडी में अपलोड करनी होगी। ट्रांसफर प्राइसिंग वाले मामलों में ऑडिट रिपोर्ट की समय-सीमा 31 अक्टूबर बताई गई है। कारोबारियों को बिक्री, खरीद, बैंक खाते, टीडीएस, जीएसटी और खर्च से जुड़े अभिलेख समय रहते अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट को उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि अंतिम समय में तकनीकी परेशानी और त्रुटियों से बचा जा सके।
चार वर्षों में 1.32 करोड़ अपडेटेड रिटर्न, सरकार को ₹16,083 करोड़ अतिरिक्त कर
नई दिल्ली। आयकर विभाग के सुधारों और करदाताओं के लिए चलाए गए जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप पिछले चार वर्षों में 1.32 करोड़ से अधिक अपडेटेड आयकर रिटर्न दाखिल किए गए हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की सदस्य पल्लवी अग्रवाल के अनुसार इन रिटर्न के माध्यम से सरकार को ₹16,083 करोड़ का अतिरिक्त कर प्राप्त हुआ। अपडेटेड रिटर्न की सुविधा ऐसे करदाताओं को अपनी पहले दाखिल विवरणी की भूल सुधारने अथवा छूटी हुई आय घोषित करने का अवसर देती है। यह सुविधा कर चोरी की कार्रवाई शुरू होने से पहले स्वैच्छिक अनुपालन बढ़ाने के उद्देश्य से दी गई है। करदाताओं को वार्षिक सूचना विवरण और फॉर्म 26एएस का रिटर्न से मिलान कर किसी अंतर को समय रहते सुधारना चाहिए।
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक अब 7 अक्टूबर को प्रस्तावित
नई दिल्ली। जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक अब 7 अक्टूबर 2026 को आयोजित किए जाने की संभावना है। बैठक पहले 12 सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन कार्यक्रम संबंधी कारणों से तारीख बदलने की जानकारी सामने आई है। केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट से संबंधित विवाद कम करने, जीएसटी पंजीकरण को सरल बनाने और मुकदमेबाजी घटाने के उपायों पर विचार किया जा सकता है। प्रतिमाह ₹2.5 लाख से अधिक इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने वाले बड़े व्यवसायों के पंजीकरण के लिए केंद्र और राज्यों की एक समान प्रक्रिया पर भी चर्चा संभव है। परिषद की अंतिम स्वीकृत सिफारिशें बैठक के बाद जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति से ही स्पष्ट होंगी।
ई-वे बिल की प्रस्तावित नई सुविधाएँ फिलहाल स्थगित
नई दिल्ली। जीएसटी नेटवर्क ने ई-वे बिल व्यवस्था में प्रस्तावित दो नए तकनीकी परिवर्तनों का क्रियान्वयन अगले आदेश तक स्थगित रखा है। इनमें ‘बिल-टू, शिप-टू’ लेनदेन में शिप-टू जीएसटीआईएन का अनिवार्य सत्यापन और ई-वे बिल बंद करने की नई सुविधा शामिल है। ये परिवर्तन पहले 1 अगस्त 2026 से लागू किए जाने थे। स्थगन के कारण व्यापारी और करदाता फिलहाल मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार ही ई-इनवॉइस तथा ई-वे बिल तैयार कर सकते हैं। जीएसटी नेटवर्क द्वारा नई प्रभावी तारीख घोषित किए जाने तक प्रस्तावित सत्यापन व्यवस्था अनिवार्य नहीं होगी। व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों को किसी बदलाव से पहले जीएसटी पोर्टल पर प्रकाशित आधिकारिक एडवाइजरी की जांच करते रहना चाहिए।
