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छोटे से कमरे से ग्लोबल पहचान: सोजत के छात्र ने NEET/JEE क्रैक कर खड़ी की टेक कंपनी, IIT मद्रास और हार्वर्ड से कर रहे डिग्री

प्रकाशित: 8 September 2026, 12:06 pm

सोजत, राजस्थान

“बड़े सपने सिर्फ बड़े शहरों की मोहताज नहीं होते, संकल्प पक्का हो तो एक छोटे से कमरे से भी दुनिया बदली जा सकती है।” इस बात को सच कर दिखाया है सोजत (पाली) के स्वामी विवेकानंद गवर्नमेंट मॉडल स्कूल के छात्र मनीष चौहान ने, जिनकी प्रतिभा और हिम्मत की चर्चा आज पूरे मारवाड़ में हो रही है।

मनीष कम उम्र में ही सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करने वाले इस युवा उद्यमी ने न केवल मेडिकल और इंजीनियरिंग की कठिन परीक्षाओं को पास किया, बल्कि पारंपरिक राह छोड़कर तकनीक और एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

माता-पिता का सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन मंजिल कुछ और थी, साधारण पृष्ठभूमि और सीमित शैक्षणिक संसाधनों वाले परिवार से आने वाले इस मेधावी छात्र के माता-पिता की पढ़ाई सेकेंडरी तक ही सीमित थी। उनका सपना था कि बेटा बड़ा होकर डॉक्टर बने। छात्र ने माता-पिता के सपने का सम्मान करते हुए पहले ही प्रयास में NEET और JEE जैसी कठिन परीक्षाएं पास कर लीं। हालांकि, उनकी अपनी सोच सिर्फ एक करियर बनाने तक सीमित नहीं थी; वे तकनीक और इनोवेशन के जरिए समाज में बड़ा बदलाव लाना चाहते थे।

असफलता से ली सीख, 11वीं कक्षा में शुरू किया ‘Devoq Labs’तकनीक के प्रति गहरा लगाव ही था कि उन्होंने महज आठवीं कक्षा से प्रोफेशनल काम शुरू कर दिया था।

कक्षा 10: पहला स्टार्टअप शुरू किया, जो असफल रहा। लेकिन इस असफलता को उन्होंने सीखने का मौका माना।

कक्षा 11: हार न मानते हुए Devoq Labs की नींव रखी।आज Devoq Labs के जरिए वे अपने घर से ही दुनिया भर के ग्लोबल क्लाइंट्स के लिए आईटी, डिजिटल प्रोजेक्ट्स और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेंचर्स पर काम कर रहे हैं।

एक साथ 3 प्रतिष्ठित इंटरनेशनल डिग्रियां और टेक कंपनीउनकी अकादमिक यात्रा भी किसी को भी हैरान कर सकती है। एंटरप्रेन्योरशिप के साथ-साथ वे एक साथ तीन विश्वस्तरीय डिग्री प्रोग्राम पूरे कर रहे हैं: 1. IIT Madras: BS in Data Science 2. Harvard University: इंटरनेशनल डिग्री प्रोग्राम 3. University of the People: उच्च शिक्षा डिग्री प्रोग्राम

मारवाड़ के युवाओं के लिए मिसाल

NEET जैसी परीक्षा क्रैक करने के बाद एक सुरक्षित करियर का रास्ता छोड़ने का फैसला आसान नहीं था। जब मनीष से बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा: “सवाल यह नहीं था कि मुझे सिर्फ एक अच्छा करियर बनाना है या नहीं, बल्कि सवाल यह था कि क्या मैं सोजत जैसे छोटे शहर से निकलकर ऐसा रास्ता बना सकता हूँ, जिससे मारवाड़ का हर युवा अपने कमरे में बैठकर बड़े सपने देखने की हिम्मत कर सके।”

बिना किसी बड़े बिजनेस बैकग्राउंड या महंगे स्कूल के, केवल सीखने की ललक और लगातार कोशिश के दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।सोजत की माटी से निकलकर ग्लोबल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में कदम रखने वाले इस युवा की कहानी आज मारवाड़ के हर उस विद्यार्थी के लिए प्रेरणा है, जो साधनों की कमी का बहाना बनाकर अपने सपनों को छोटा कर लेते हैं। सचमुच, इनकी कहानी अभी शुरू हुई है!