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प्रकाशित: 7 September 2026, 3:56 pm

7 सितंबर 2026

राजस्थान में निर्माण कार्यों में कम से कम 50 प्रतिशत एम-सैंड का उपयोग अनिवार्य

जयपुर। राजस्थान सरकार के नगरीय विकास एवं आवासन विभाग ने निर्माण कार्यों में उपयोग की जाने वाली खनिज बजरी की मात्रा के मुकाबले न्यूनतम 50 प्रतिशत एम-सैंड का उपयोग अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है। विभाग ने यह आदेश 7 सितंबर 2026 को सार्वजनिक किया।

इससे पहले विभाग ने 22 जुलाई 2024 को निर्माण कार्यों में न्यूनतम 25 प्रतिशत एम-सैंड के उपयोग से संबंधित आदेश जारी किया था। नए आदेश में यह मात्रा बढ़ाकर न्यूनतम 50 प्रतिशत कर दी गई है। इससे प्रदेश में एम-सैंड की मांग बढ़ने के साथ प्राकृतिक बजरी पर निर्भरता कम होने की संभावना है।

इस निर्णय का प्रभाव नगरीय विकास से संबंधित निर्माण एजेंसियों, स्थानीय निकायों, विकास प्राधिकरणों, नगर सुधार न्यासों, निर्माण ठेकेदारों, भवन निर्माताओं और निर्माण सामग्री आपूर्तिकर्ताओं पर पड़ सकता है। एम-सैंड उत्पादन इकाइयों के लिए भी यह आदेश व्यावसायिक संभावनाएँ बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

आदेश किन निर्माण कार्यों और संस्थाओं पर लागू होगा, एम-सैंड की गुणवत्ता और परीक्षण के लिए क्या मानक होंगे तथा अनुपालन की जिम्मेदारी किस अधिकारी की रहेगी—इन विषयों में मूल विभागीय आदेश ही अंतिम रूप से मान्य होगा।


राजस्थान में जल जीवन मिशन पर सीएजी की गंभीर टिप्पणियाँ, जल गुणवत्ता मद की 91.69 प्रतिशत राशि रही खर्च से बाहर

जयपुर। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने राजस्थान में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को लेकर वित्तीय उपयोग, जल गुणवत्ता परीक्षण, प्रयोगशालाओं की क्षमता, कर्मचारियों की कमी और दूषित पानी पर उपचारात्मक कार्रवाई में गंभीर कमियाँ दर्ज की हैं। सीएजी की रिपोर्ट संख्या 4/2026 में अगस्त 2019 से मार्च 2024 तक जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की गतिविधियों की प्रदर्शन लेखा परीक्षा की गई है। रिपोर्ट 21 अगस्त 2026 को विधानसभा में रखी गई थी और राजस्थान वित्त विभाग ने इसे 7 सितंबर को अपनी वेबसाइट पर प्रमुखता से उपलब्ध कराया।

जल गुणवत्ता की 486.23 करोड़ की राशि में से केवल 40.39 करोड़ खर्च

सीएजी के अनुसार वर्ष 2019 से 20 जनवरी 2025 तक जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्विलांस गतिविधियों के लिए विभाग को कुल 486.23 करोड़ रुपये उपलब्ध हुए। इसमें से केवल 40.39 करोड़ रुपये, अर्थात 8.31 प्रतिशत, खर्च किए गए। शेष 445.84 करोड़ रुपये, यानी 91.69 प्रतिशत राशि, खर्च नहीं हो सकी।

वर्ष 2022-23 में उपलब्ध 173.66 करोड़ रुपये में से केवल 6.45 करोड़ और वर्ष 2024-25 में 20 जनवरी तक उपलब्ध 73.18 करोड़ रुपये में से मात्र 1.88 करोड़ रुपये खर्च किए गए। विभाग ने कम खर्च के पीछे स्वीकृतियों में देरी, चुनाव आचार संहिता और वार्षिक कार्ययोजना अनुमोदित नहीं होने जैसे कारण बताए। सीएजी ने कहा कि कम खर्च का प्रमुख असर जल परीक्षण, ब्लॉक प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षण गतिविधियों पर पड़ा।

प्रदेश की 9,002 बस्तियाँ जल गुणवत्ता से प्रभावित

अप्रैल 2024 तक राजस्थान की कुल 1,19,215 बस्तियों में से 9,002 बस्तियाँ जल गुणवत्ता से प्रभावित पाई गईं। इनमें 4,20,270 परिवारों की लगभग 24.53 लाख आबादी निवास करती थी।

इन प्रभावित बस्तियों में सर्वाधिक 8,467 बस्तियाँ खारे पानी, 421 नाइट्रेट, 110 फ्लोराइड और चार बस्तियाँ आयरन की समस्या से प्रभावित थीं। इस प्रकार जल गुणवत्ता से प्रभावित बस्तियों में खारेपन की हिस्सेदारी लगभग 94 प्रतिशत थी।

प्रयोगशालाओं में 45.73 प्रतिशत तकनीकी पद रिक्त

फरवरी 2024 में राज्य की जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में 223 स्वीकृत तकनीकी पदों के मुकाबले केवल 121 कर्मचारी कार्यरत थे। कुल 102 पद, यानी 45.73 प्रतिशत पद रिक्त थे। प्रयोगशाला परिचारकों के 77.14 प्रतिशत, वरिष्ठ प्रयोगशाला सहायकों के 55.55 प्रतिशत और कनिष्ठ रसायनज्ञों के 45.94 प्रतिशत पद खाली मिले।

राज्य स्तरीय प्रयोगशाला के लिए निर्धारित 78 मानकों के मुकाबले केवल 41 मानकों की जाँच उपलब्ध थी। रेडियोधर्मी और विषाणु संबंधी परीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। जिला प्रयोगशालाओं को कम से कम 34 मानकों की जाँच करनी थी, लेकिन चयनित जिलों में क्षमता केवल 9 से 22 मानकों तक मिली।

मारवाड़ के संदर्भ में जालोर से जुड़े पाली, जोधपुर और सिरोही की जिला प्रयोगशालाओं में क्रमशः 11, 12 और 22 मानकों की जाँच क्षमता दर्ज की गई। पाली जिला प्रयोगशाला का प्रभार उस समय एक सहायक अभियंता—सिविल को दिया गया था, जिसे जल गुणवत्ता परीक्षण का विशेष प्रशिक्षण नहीं था। सरकार ने बाद में बताया कि यह प्रभार वरिष्ठ रसायनज्ञ को सौंप दिया गया है।

68.45 प्रतिशत जल स्रोतों का निर्धारित परीक्षण नहीं हुआ

सीएजी के अनुसार वर्ष 2022-23 और 2023-24 में जल स्रोतों के निर्धारित रासायनिक और जीवाणु परीक्षण में कुल 68.45 प्रतिशत की कमी रही। वर्ष 2021-22 में ग्रामीण परिवारों को 20,619 नलकूपों से पानी दिया गया, लेकिन विभाग ने उस वर्ष इनका जल गुणवत्ता परीक्षण नहीं किया।

इसके बाद 2022-23 में 20,640 नलकूपों में से केवल 1,869 और 2023-24 में 9,409 नलकूपों का परीक्षण किया गया। सीएजी ने विशेष रूप से जीवाणु परीक्षण का दायरा कम रहने पर चिंता जताई।

दूषित पाए गए हजारों नमूनों पर पूरी कार्रवाई नहीं

वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच प्रयोगशाला परीक्षणों में 1,06,113 नमूनों में रासायनिक और 472 नमूनों में जीवाणु प्रदूषण मिला। इसके बावजूद रासायनिक रूप से दूषित केवल 53,734 नमूनों—50.64 प्रतिशत और जीवाणु प्रदूषण वाले 299 नमूनों—63.35 प्रतिशत मामलों में उपचारात्मक कार्रवाई दर्ज की गई।

सरकार ने जवाब दिया कि वैकल्पिक स्रोत, टैंकर से आपूर्ति और क्लोरीनेशन जैसे उपाय किए जाते हैं। सीएजी ने विभाग के ही आँकड़ों के आधार पर कहा कि दूषित नमूनों के अनुपात में उपचारात्मक कार्रवाई पूरी नहीं थी।

खर्च के बाद भी ब्लॉक स्तरीय प्रयोगशाला चालू नहीं

ब्लॉक स्तरीय प्रयोगशालाओं को विकसित करने पर वर्ष 2021 से 2024 के बीच 2.94 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन जुलाई 2024 तक एक भी प्रयोगशाला चालू नहीं हुई। सरकार ने नवंबर 2025 में बताया कि 149 प्रयोगशाला भवनों के उन्नयन का कार्य पूरा हो चुका है और उपकरण खरीदने की प्रक्रिया जारी है। इसके बावजूद सीएजी ने दर्ज किया कि नवंबर 2025 तक कोई ब्लॉक स्तरीय प्रयोगशाला कार्यशील नहीं हुई थी।

सीएजी ने जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए पर्याप्त धन होने के बावजूद अत्यंत कम खर्च, प्रयोगशालाओं और विशेषज्ञ कर्मचारियों की कमी, अधूरे परीक्षण तथा दूषित पानी पर अपर्याप्त कार्रवाई को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य के लिए बड़ी चुनौती बताया है।


न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल ने राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति पद की शपथ ली

जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को लोकभवन में न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल को राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति पद की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति अग्रवाल ने अंग्रेजी भाषा में पद की शपथ ली।

शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राष्ट्रपति द्वारा जारी मुख्य न्यायाधिपति की नियुक्ति अधिसूचना और वारंट पढ़कर सुनाया। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल से न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल को शपथ दिलाने का आग्रह किया।

समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा, मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि, राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी, अधिवक्ता तथा मुख्य न्यायाधिपति के परिजन उपस्थित रहे।

जोधपुर डिस्कॉम का सीसी बाबू 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार

श्रीगंगानगर। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने श्रीगंगानगर में जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एक सीसी बाबू को कथित रूप से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

एसीबी ने इस कार्रवाई की आधिकारिक सूचना 7 सितंबर 2026 को जारी की। मामले में रिश्वत की कथित मांग किस कार्य के बदले की गई थी और परिवादी का कौन-सा प्रकरण लंबित था, इस संबंध में ब्यूरो की विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति और आगे की जाँच अंतिम रूप से मान्य होगी।

एसीबी ने आम नागरिकों से सरकारी कार्य के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत ब्यूरो की हेल्पलाइन 1064 अथवा व्हाट्सऐप नंबर 9413502834 पर देने की अपील की है।