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राजस्थान सेवा नियमों में बड़ा संशोधन: सरोगेट मदर को 180 दिन और कमीशनिंग मदर को 90 दिन का अवकाश

प्रकाशित: 4 September 2026, 3:00 am

जयपुर। राजस्थान सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण, चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी मातृत्व अवकाश से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। वित्त विभाग के नियम प्रभाग ने 3 सितंबर 2026 को अधिसूचना संख्या F.1(12)FD/Rules/2026 जारी कर राजस्थान सेवा नियम, 1951 में संशोधन किया है। संशोधित नियमों को राजस्थान सेवा (संशोधन) नियम, 2026 नाम दिया गया है और ये तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

नए नियमों के अनुसार, राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद अनिवार्य प्रशिक्षण प्राप्त करने वाला कर्मचारी यदि प्रशिक्षण के दौरान अथवा प्रशिक्षण पूरा होने के दो वर्ष के भीतर इस्तीफा देता है या दूसरी नौकरी स्वीकार करता है, तो उसे सरकार द्वारा प्रशिक्षण पर किया गया खर्च लौटाना होगा। हालांकि कर्मचारी को दिया गया वेतन तथा यात्रा एवं दैनिक भत्ता इस वसूली में शामिल नहीं होगा। प्रशिक्षण प्रारंभ होने से पहले कर्मचारी को निर्धारित प्रारूप में बॉन्ड भरना होगा।

भारत में तीन महीने से अधिक अवधि के प्रशिक्षण पर भेजे गए कर्मचारी को भी बॉन्ड देना होगा। तीन महीने से अधिक और छह महीने तक के प्रशिक्षण के बाद कर्मचारी को कम से कम एक वर्ष तथा छह महीने से अधिक के प्रशिक्षण के बाद दो वर्ष तक राज्य सरकार की सेवा करनी होगी।

यदि कर्मचारी उचित माध्यम से आवेदन करके केंद्र सरकार, दूसरी राज्य सरकार, सरकारी अथवा अर्ध-सरकारी संगठन, सार्वजनिक उपक्रम, भारतीय रिजर्व बैंक या ग्रामीण बैंक में नियुक्ति प्राप्त करता है, तो प्रशिक्षण खर्च लौटाने की पुरानी शर्त लागू नहीं होगी। ऐसे मामले में कर्मचारी से नए नियोक्ता की सेवा करने के लिए नया बॉन्ड लिया जाएगा।

चाइल्ड केयर लीव के नियमों में भी बदलाव किया गया है। सामान्य महिला सरकारी कर्मचारी को एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम तीन बार चाइल्ड केयर लीव मिल सकेगी। एक बार में पांच दिन से कम छुट्टी स्वीकृत नहीं होगी। अविवाहित, विधवा या तलाकशुदा महिला सरकारी कर्मचारी को वर्ष में अधिकतम छह बार यह अवकाश मिल सकेगा।

सरकार ने राजस्थान सेवा नियमों में नया नियम 103D जोड़कर सरोगेसी मातृत्व अवकाश का स्पष्ट प्रावधान किया है। सरकारी कर्मचारी सरोगेट मदर को अधिकतम 180 दिन तथा कमीशनिंग मदर को अधिकतम 90 दिन का मातृत्व अवकाश मिलेगा। इस अवधि में उन्हें अवकाश पर जाने से ठीक पहले प्राप्त वेतन के बराबर अवकाश वेतन दिया जाएगा। यह छुट्टी नियमित अवकाश खाते से नहीं काटी जाएगी, लेकिन इसकी अलग प्रविष्टि सेवा पुस्तिका में की जाएगी।

सरोगेट मदर का विवाहित सरकारी कर्मचारी होना, आयु 25 से 35 वर्ष के बीच होना और भ्रूण प्रत्यारोपण के समय उसका स्वयं का एक बच्चा होना आवश्यक है। कमीशनिंग मदर की आयु 23 से 50 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। पात्रता और प्रमाणन के मामलों में सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के प्रावधान लागू होंगे।