1 अप्रैल 2027 से बदलेंगे लोन से जुड़े नियम, ब्याज दर और बैंकिंग प्रक्रिया में बढ़ेगी पारदर्शिता
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग व्यवस्था में लोन की ब्याज दर तय करने और उसमें बदलाव की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। प्रस्तावित व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने की बात कही गई है। इसका असर होम लोन, पर्सनल लोन और MSME लोन समेत विभिन्न प्रकार के फ्लोटिंग रेट वाले ऋणों पर पड़ सकता है।
क्या बदलेगा?
नए प्रस्ताव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक लोन की ब्याज दर और उसमें होने वाले बदलाव को मनमाने तरीके से तय न करें। खास तौर पर फ्लोटिंग रेट वाले लोन में बेंचमार्क और बैंक के स्प्रेड को लेकर अधिक स्पष्टता लाने का प्रस्ताव है।
बेंचमार्क बदलने के लिए ग्राहक की सहमति
प्रस्तावित नियमों के अनुसार लोन से जुड़े बेंचमार्क में बदलाव को लेकर ग्राहक की सहमति और उसे स्पष्ट जानकारी देने पर जोर दिया गया है। यदि कोई बेंचमार्क बंद हो जाता है तो बैंक को ग्राहक को उसके प्रभाव और आगे की प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी।
बैंक मनमाने तरीके से स्प्रेड नहीं बढ़ा सकेंगे
RBI के प्रस्ताव में बैंक द्वारा लोन के स्प्रेड में मनमाने बदलाव को रोकने और ब्याज दर निर्धारण को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। इससे फ्लोटिंग रेट लोन लेने वाले ग्राहकों को ब्याज दर में बदलाव को समझने में आसानी हो सकती है।
क्या 730 CIBIL स्कोर जरूरी होगा?
सोशल मीडिया और कुछ खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि CIBIL स्कोर 730 से कम होने पर 1 अप्रैल 2027 से लोन मिलना मुश्किल या बंद हो जाएगा। फिलहाल ऐसा कोई सार्वभौमिक RBI नियम सामने नहीं है।
CIBIL स्कोर बैंक या NBFC के लिए क्रेडिट मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है, लेकिन लोन स्वीकृति केवल एक निश्चित 730 स्कोर पर निर्भर नहीं होती। बैंक आवेदक की आय, रोजगार/व्यवसाय, मौजूदा कर्ज, भुगतान इतिहास, लोन की राशि और अपनी आंतरिक क्रेडिट पॉलिसी जैसे कई कारकों को देखते हैं।
