वित्त एवं व्यापार जगत

IDBI बैंक के करोड़ों ग्राहकों के लिए बड़ी खबर: बैंक को मिला नया मालिक, 52 हजार करोड़ में पूरी हुई बिकवाली!

प्रकाशित: 16 October 2026, 9:57 am

ऐतिहासिक बैंकिंग डील: ₹52,878 करोड़ में बिका IDBI बैंक, फेयरफैक्स बनी नई मालिक!

भारत के बैंकिंग इतिहास में एक बड़े फैसले के तहत केंद्र सरकार ने लंबे समय से प्रतीक्षित IDBI बैंक के रणनीतिक निजीकरण (Privatization) को अंतिम मंजूरी दे दी है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने 14 अक्टूबर 2026 को कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड (Fairfax Financial Holdings Ltd.) की सहायक इकाई ‘10955230 Canada Inc.’ को बैंक का रणनीतिक खरीदार घोषित किया है। यह महा-सौदा ₹52,878.08 करोड़ में तय हुआ है, जिसके तहत फेयरफैक्स को बैंक की कुल 60.72% हिस्सेदारी सौंपी जाएगी।

इस बड़े समझौते के तहत, भारत सरकार IDBI बैंक में अपनी 30.48% हिस्सेदारी बेचेगी, जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगा। बिक्री की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, बैंक में सरकार की 15% और LIC की 19% हिस्सेदारी शेष बचेगी, और दोनों बैंक के बोर्ड से अपने प्रतिनिधि हटाकर केवल आम सार्वजनिक शेयरधारक बनकर रह जाएंगे। स्वतंत्र वैल्यूएशन एजेंसियों ने बैंक का बेंचमार्क मूल्य ₹75.99 प्रति शेयर तय किया था, लेकिन फेयरफैक्स ने ₹81 प्रति शेयर की सबसे ऊंची बोली लगाकर मालिकाना हक हासिल कर लिया।

यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) है, जो अर्थव्यवस्था में बड़े सुधारों का संकेत देता है। सौदे की अहम शर्तों के मुताबिक, नए खरीदार द्वारा लगाई गई पूंजी अगले तीन साल के लिए लॉक-इन (Lock-in) रहेगी। बैंक के ग्राहकों के लिए अच्छी खबर यह है कि इस सौदे के बाद भी ‘IDBI बैंक’ का ब्रांड नाम नहीं बदलेगा। भारतीय मूल के दिग्गज निवेशक प्रेम वत्स के नेतृत्व वाली फेयरफैक्स कंपनी के इस निवेश से बैंक में नई पूंजी आएगी और इसकी कार्यक्षमता में इजाफा होगा।

निजीकरण की इस बड़ी खबर का शेयर बाजार में भी व्यापक असर देखने को मिला। खबर आते ही IDBI बैंक के शेयरों में कारोबार के दौरान लगभग 13% का भारी उछाल आया और शेयर ₹93.60 के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। सरकार का मानना है कि इस नई रणनीतिक साझेदारी से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और छोटे कारोबारियों को कर्ज मिलने में सहूलियत होगी, जिससे बैंकिंग सेक्टर और देश के बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलेगी।