जीएसटी में गिरफ्तारी से पहले बताना होगा आधार, सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी मामलों में गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। ‘Union of India बनाम Sunil Biyani’ प्रकरण में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 69 के तहत गिरफ्तारी अधिकृत करने वाले आदेश को संबंधित व्यक्ति तक गिरफ्तारी से पहले संप्रेषित किया जाना आवश्यक है।
यह मामला जीएसटी इंटेलिजेंस की एक जांच से जुड़ा था। संबंधित व्यक्ति ने गिरफ्तारी की आशंका में अग्रिम जमानत मांगी थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आवेदन को स्वीकार्य नहीं माना था, लेकिन गिरफ्तारी आदेश की जानकारी मिलने के बाद एक सप्ताह की सुरक्षा प्रदान की थी। केंद्र सरकार ने इसी व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा दी गई एक सप्ताह की सुरक्षा को हटाते हुए गिरफ्तारी प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी। न्यायालय ने कहा कि आयुक्त द्वारा धारा 69 के तहत दर्ज किए गए ‘विश्वास करने के कारण’ वाले आदेश को गिरफ्तारी से पहले संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाया जाना चाहिए। आदेश इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी दिया जा सकता है।
यह निर्णय 12 अगस्त 2026 का है। व्यापारियों और करदाताओं के लिए इसका महत्व इसलिए है कि जीएसटी मामले में गिरफ्तारी से पहले उन्हें गिरफ्तारी के आधार की जानकारी मिल सकेगी।
