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GST में व्यापारियों को राहत: गिरफ्तारी की शक्ति हटाने का फैसला, तेज रिफंड और कम सामान्य जुर्माने की तैयारी

प्रकाशित: 8 October 2026, 9:41 pm

57वीं बैठक में कर दरें यथावत; कारोबारियों का डर और फँसी पूँजी का बोझ घटाने पर जोर

जीएसटी काउंसिल की 8 अक्टूबर को हुई 57वीं बैठक में कारोबारियों को कर प्रशासन से जुड़ी परेशानियों से राहत देने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति हटाना, अभियोजन की मौद्रिक सीमा बढ़ाना, सामान्य जुर्माना घटाना और रिफंड प्रक्रिया तेज करना शामिल है। कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, काउंसिल के निर्णयों को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी संशोधन और अधिसूचनाएँ जारी होनी होंगी।

गिरफ्तारी की शक्ति हटेगी: धारा 69 से जुड़ा बदलाव

CGST एक्ट की धारा 69 में आयुक्त को निर्धारित अपराधों में गिरफ्तारी अधिकृत करने की शक्ति मिली हुई है। यह धारा 132 के अंतर्गत आने वाले कुछ गंभीर अपराधों से जुड़ी है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि पहले प्रत्येक छोटी गलती या देर से रिटर्न भरने पर गिरफ्तारी हो सकती थी। काउंसिल ने अब जीएसटी के अंतर्गत गिरफ्तारी की शक्ति हटाने का निर्णय लिया है।

इसके लागू होने पर जीएसटी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तारी किए जाने का जोखिम हटेगा। इससे कारोबारियों और उनके परिवारों में गिरफ्तारी की आशंका से पैदा होने वाला तनाव घट सकता है। लेकिन गिरफ्तारी की शक्ति हटना कर, ब्याज और जुर्माने की देनदारी समाप्त होना नहीं है। गंभीर अपराधों में अभियोजन की व्यवस्था भी अलग विषय है।

अभियोजन की सीमा बढ़ेगी: धारा 132 में राहत

धारा 132 अपराध और सजा से संबंधित है। मौजूदा प्रावधानों में सामान्यतः संबंधित अपराधों के लिए दो करोड़ रुपये से अधिक की राशि पर कारावास का प्रावधान है; बिना वास्तविक आपूर्ति के बिल जारी करने वाले अपराध में एक करोड़ रुपये से अधिक की अलग सीमा है। इसलिए सभी अपराधों की पुरानी सीमा एक करोड़ रुपये बताना अधूरा होगा।

काउंसिल ने अभियोजन की सीमा पाँच करोड़ रुपये करने का निर्णय लिया है। यह सीमा कारोबार के टर्नओवर की नहीं, संबंधित अपराध में शामिल कर अथवा गलत ITC या रिफंड की राशि से जुड़ी है। लागू होने पर कम राशि वाले मामलों में आपराधिक मुकदमे का दायरा घटेगा। किस अपराध पर कौन-सी शर्त लागू होगी, यह अंतिम संशोधित कानून से स्पष्ट होगा।

सामान्य जुर्माना घटेगा: धारा 125 से संबंधित निर्णय

धारा 125 उन उल्लंघनों के लिए सामान्य जुर्माने का प्रावधान करती है, जिनके लिए एक्ट में अलग जुर्माना निर्धारित नहीं है। इसकी वर्तमान अधिकतम सीमा ₹25,000 है। काउंसिल ने इसे ₹10,000 करने का निर्णय लिया है। इससे इस श्रेणी में अधिकतम जुर्माने का बोझ ₹15,000 घटेगा। इसे सभी प्रकार के GST जुर्मानों में कटौती नहीं माना जाना चाहिए।

रिफंड जल्दी मिलेगा: धारा 54 और नियम 90–91 से जुड़ी प्रक्रिया

रिफंड का मुख्य प्रावधान धारा 54 में है। नियम 90 के अंतर्गत आवेदन की पूर्णता जाँचकर पावती देने की अवधि अभी 15 दिन है। इसे 10 दिन करने का निर्णय हुआ है। घोषित व्यवस्था में इस अवधि में पावती या कमी का पत्र जारी नहीं होने पर आवेदन स्वीकार माना जाएगा।

नियम 91 से जुड़ी पात्र अनंतिम रिफंड प्रक्रिया में सात दिन की जगह पावती के बाद तीन कार्यदिवस में 90 प्रतिशत राशि की स्वीकृति का निर्णय हुआ है। जोखिम आकलन के आधार पर सिस्टम की भूमिका बढ़ेगी। उदाहरण के लिए, ₹10 लाख के पात्र दावे में ₹9 लाख का अनंतिम रिफंड जल्दी मिलने से खरीद, मजदूरी और अन्य भुगतान के लिए पूँजी उपलब्ध हो सकेगी। यह सभी दावों का पूरा रिफंड तीन दिन में मिलने की गारंटी नहीं है।

पंजीकरण में सामान्य बदलाव आसान होंगे: धारा 28 और नियम 19

पंजीकरण विवरण में संशोधन धारा 28 और नियम 19 के तहत होता है। अभी कुछ बदलावों में अधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होती है। काउंसिल ने व्यापार नाम, निदेशक या साझेदार तथा अतिरिक्त व्यवसाय स्थल से संबंधित सामान्य संशोधनों को स्वतः स्वीकार करने का निर्णय लिया है। इससे आवेदन की प्रतीक्षा और दस्तावेजों का बार-बार जवाब देने की परेशानी घट सकती है।

इन सुधारों का व्यावहारिक लाभ गिरफ्तारी का डर घटाने, प्रक्रिया में समय बचाने और कारोबार का पैसा जल्दी लौटाने में होगा। तेज रिफंड से उधारी और ब्याज का बोझ कम हो सकता है; हालांकि पुराने व्यावसायिक नुकसान की भरपाई के लिए किसी अलग मुआवजे की घोषणा इन पुष्ट फैसलों में नहीं है।