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आयकर के मोर्चे पर महत्वपूर्ण बदलाव: टैक्स ऑडिट की समय-सीमा नजदीक, संपत्ति टीडीएस और विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण के नए नियम

प्रकाशित: 26 September 2026, 12:42 pm

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर

जिन कारोबारियों और अन्य करदाताओं पर आयकर कानून के अंतर्गत टैक्स ऑडिट लागू होता है, उनके लिए ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की वर्तमान अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 है। ट्रस्ट और संस्थाओं के लिए लागू फॉर्म 10B अथवा 10BB की समय-सीमा भी 30 सितंबर निर्धारित बताई गई है।

अंतिम दिनों में आयकर पोर्टल पर दबाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए कारोबारियों को अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से ऑडिट रिपोर्ट, डिजिटल हस्ताक्षर, बैलेंस शीट, लाभ-हानि खाता और रिपोर्ट अपलोड होने की स्थिति तत्काल जांच लेनी चाहिए। केवल दस्तावेज चार्टर्ड अकाउंटेंट को सौंप देना पर्याप्त नहीं है; करदाता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रिपोर्ट निर्धारित समय के भीतर पोर्टल पर सफलतापूर्वक दाखिल और स्वीकार हो गई है।

अनिवासी से संपत्ति खरीदने पर टीडीएस रिपोर्टिंग में बदलाव

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने अधिसूचना संख्या 121/2026 के माध्यम से अनिवासी व्यक्ति द्वारा निवासी व्यक्ति अथवा हिंदू अविभाजित परिवार को अचल संपत्ति बेचने से संबंधित टीडीएस रिपोर्टिंग व्यवस्था में बदलाव किया है। संशोधित व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की सूचना है तथा इससे संबंधित फॉर्म 132 और 141 में भी परिवर्तन किया गया है।

किसी अनिवासी भारतीय अथवा अन्य अनिवासी व्यक्ति से मकान, दुकान, भूखंड या दूसरी अचल संपत्ति खरीदने वाले खरीददार को सामान्य निवासी विक्रेता वाला एक प्रतिशत टीडीएस नियम स्वतः लागू नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में धारा 195 के तहत पूंजीगत लाभ, विक्रेता की आवासीय स्थिति, लागू दर और कम टीडीएस प्रमाणपत्र की स्थिति की जांच आवश्यक होती है। गलत दर से टीडीएस काटने पर खरीददार स्वयं ब्याज, जुर्माने और कर-मांग का सामना कर सकता है।

विदेशी आय और संपत्ति घोषित करने के लिए 31 दिसंबर तक अवसर

सरकार ने ‘फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स—डिस्क्लोजर स्कीम 2026’ के माध्यम से पात्र छोटे करदाताओं को पूर्व में घोषित नहीं की गई निर्दिष्ट विदेशी आय अथवा विदेशी संपत्ति का खुलासा करने का अवसर दिया है। इसके लिए घोषणा दाखिल करने की अवधि 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध है।

योजना में विदेशी बैंक खाते, शेयर, निवेश अथवा अन्य निर्धारित विदेशी संपत्ति रखने वाले पात्र करदाता निर्धारित कर या शुल्क चुकाकर खुलासा कर सकते हैं। नियमों का पालन करने पर ब्लैक मनी कानून के अंतर्गत आगे की कर, जुर्माना और अभियोजन कार्रवाई से निर्धारित सुरक्षा मिल सकती है। प्रत्येक मामले में पात्रता और भुगतान की गणना अलग होगी, इसलिए घोषणा करने से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना आवश्यक है।

कर-बकाया वसूली में गिरफ्तारी और हिरासत का प्रावधान हटाया

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने कर-वसूली नियमों में संशोधन करते हुए टैक्स डिफॉल्ट की वसूली के लिए गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित प्रावधान हटा दिए हैं। यह परिवर्तन 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना गया है।

इस संशोधन का अर्थ यह नहीं है कि कर-बकाया माफ हो जाएगा। आयकर विभाग बैंक खाते अथवा संपत्ति की कुर्की, वसूली और संपत्ति बिक्री जैसी वैधानिक कार्रवाई अभी भी कर सकता है। बदलाव का मुख्य उद्देश्य कर-वसूली में व्यक्तिगत गिरफ्तारी के स्थान पर संपत्ति-आधारित उपायों पर जोर देना है।