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जीएसटी के मोर्चे पर बड़े घटनाक्रम: यूपीआई एमडीआर, आगामी जीएसटी परिषद बैठक और फर्जी आईटीसी पर कार्रवाई

प्रकाशित: 26 September 2026, 12:39 pm

15 अक्टूबर से बड़े व्यापारी यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर

15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू होने वाला है। उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार यह शुल्क ग्राहक से अलग से नहीं वसूला जा सकेगा। जिन छोटे व्यापारियों का मासिक यूपीआई संग्रह ₹1 लाख तक है, उन्हें एमडीआर से छूट रहने की सूचना है।

महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 18 प्रतिशत जीएसटी पूरी भुगतान राशि पर नहीं, बल्कि केवल एमडीआर की राशि पर लगेगा। उदाहरण के लिए, ₹3,000 के पात्र यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की दर से ₹12 एमडीआर बनेगा और इस ₹12 पर ₹2.16 जीएसटी लगेगा। इस प्रकार कुल शुल्क ₹14.16 होगा। जीएसटी-पंजीकृत व्यापारी निर्धारित शर्तें पूरी होने पर एमडीआर पर दिए गए जीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त कर सकता है।

व्यापारियों को अपने बैंक अथवा भुगतान सेवा प्रदाता से यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि उनके खाते की मर्चेंट श्रेणी, मासिक यूपीआई संग्रह और लेन-देन पर यह शुल्क लागू होगा अथवा नहीं।

जीएसटी परिषद की अगली बैठक 7 अक्टूबर को संभावित

सितंबर में प्रस्तावित जीएसटी परिषद की बैठक अब 7 अक्टूबर 2026 को होने की सूचना है। बैठक में व्यापारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण अनुपालन और इनपुट टैक्स क्रेडिट विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

सबसे महत्वपूर्ण विषय वास्तविक माल खरीदने वाले ईमानदार खरीददार के इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुरक्षा से जुड़ा है। वर्तमान व्यवस्था में कई मामलों में खरीददार ने माल प्राप्त कर लिया, भुगतान कर दिया और पूरा जीएसटी भी विक्रेता को दे दिया, लेकिन सप्लायर द्वारा सरकार को टैक्स जमा नहीं कराने पर खरीददार का आईटीसी विवादित हो जाता है। व्यापारिक संगठनों की मांग है कि वास्तविक खरीद और भुगतान प्रमाणित होने पर ईमानदार खरीददार को सप्लायर की गलती का दंड नहीं दिया जाना चाहिए।

परिषद की बैठक और सरकार की अधिसूचना जारी होने तक संभावित राहत को लागू नियम नहीं माना जा सकता।

फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पर देशव्यापी सख्ती

जीएसटी विभाग ने फर्जी बिलों और अस्तित्वहीन सप्लायरों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने वालों के विरुद्ध कार्रवाई तेज कर दी है। हैदराबाद में सीजीएसटी की एंटी-इवेजन शाखा ने कथित रूप से ₹32.28 करोड़ का फर्जी आईटीसी लेने के मामले में एक कारोबारी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि निष्क्रिय, अस्तित्वहीन अथवा रद्द जीएसटी पंजीयन वाले सप्लायरों के बिलों पर बिना वास्तविक माल प्राप्त किए आईटीसी लिया और उसका उपयोग टैक्स देनदारी चुकाने में किया गया।

इस कार्रवाई से ईमानदार व्यापारियों के लिए भी महत्वपूर्ण चेतावनी सामने आती है। केवल सप्लायर का जीएसटी बिल और जीएसटी नंबर अपने पास रखना पर्याप्त सुरक्षा नहीं है। खरीददार को सप्लायर का सक्रिय पंजीयन, ई-वे बिल, माल परिवहन प्रमाण, माल प्राप्ति रसीद, बैंक के माध्यम से भुगतान, स्टॉक रजिस्टर और संबंधित पत्राचार सुरक्षित रखना चाहिए।

बड़ी खरीद अथवा नए सप्लायर से कारोबार करने से पहले उसके जीएसटी रिटर्न और व्यावसायिक अस्तित्व की जांच करना भविष्य के आईटीसी विवाद से बचने में सहायक हो सकता है।