प्रमुख वित्तीय समाचार
3 सितंबर 2026
निर्यातकों को बड़ी सुविधा: फ्री सेल एंड कॉमर्स सर्टिफिकेट अब स्वचालित रूप से जारी होगा
नई दिल्ली। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने निर्यातकों के लिए फ्री सेल एंड कॉमर्स सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया को स्वचालित कर दिया है। निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले आवेदनों पर अब डीजीएफटी पोर्टल से प्रमाणपत्र स्वतः जारी हो सकेगा।
यह प्रमाणपत्र विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत उन उत्पादों के लिए दिया जाता है, जो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के दायरे में नहीं आते। अभी तक डीजीएफटी के क्षेत्रीय कार्यालय आवेदन और दस्तावेजों की जांच करने के बाद प्रमाणपत्र जारी करते थे।
नई व्यवस्था से पात्र निर्यातकों को कार्यालय स्तर की मैन्युअल जांच की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। इससे प्रमाणपत्र मिलने में लगने वाला समय और अनुपालन भार कम होने की संभावना है। जोखिम प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से जारी प्रमाणपत्रों की बाद में जांच की जा सकेगी।
देशभर में चलेगा एफटीए उपयोग अभियान, जिलों और एमएसएमई तक पहुंचेगी जानकारी
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ अधिकाधिक कारोबारियों और निर्यातकों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने पर जोर दिया है।
मंत्रालय के अनुसार एफटीए से संबंधित जानकारी केवल बड़े निर्यातकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे प्रत्येक जिले के एमएसएमई, व्यापारी, उद्यमी, स्टार्टअप और महिला उद्यमियों तक पहुंचाया जाएगा। उद्योग संगठनों, निर्यात संवर्धन परिषदों तथा सरकारी एजेंसियों से भी जागरूकता और मार्गदर्शन गतिविधियां बढ़ाने को कहा गया है।
इस अभियान का उद्देश्य कारोबारियों को शुल्क में मिलने वाली रियायतों, निर्यात बाजारों में प्रवेश की शर्तों, उत्पाद मानकों और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी देना है। मारवाड़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों के छोटे एवं मध्यम कारोबारी अपने उत्पादों के संभावित विदेशी बाजार और लागू शुल्क लाभ की जानकारी संबंधित निर्यात संवर्धन परिषद अथवा डीजीएफटी से प्राप्त कर सकते हैं।
सरकारी साधारण बीमा कंपनियों को ग्राहक शिकायतें शीघ्र निपटाने के निर्देश
नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों के वित्तीय और व्यावसायिक प्रदर्शन की समीक्षा की है। बैठक की अध्यक्षता विभाग के सचिव संजय लोहिया ने की।
समीक्षा में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बीमा कारोबार, दावों के अनुपात, डिजिटल सेवाओं और प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों की स्थिति देखी गई। कंपनियों को लाभकारी बीमा क्षेत्रों पर ध्यान देने और इनकर्ड क्लेम रेशियो नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।
सरकारी बीमा कंपनियों को प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाओं का उपयोग बढ़ाने, बीमा की पहुंच का विस्तार करने तथा कम बीमा-सुविधा वाले वर्गों तक सेवाएं पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए। ग्राहक शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। कंपनियों के वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रदर्शन की तुलनात्मक समीक्षा के लिए समान मानकों वाली प्रणाली विकसित करने तथा हर तिमाही इसकी समीक्षा करने की बात कही गई है।
आरबीआई की विशेष स्वैप सुविधा से 136.37 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष डॉलर-रुपया विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा के अंतर्गत 31 अगस्त 2026 तक अधिकृत बैंकों ने कुल 136.377 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा प्रवाह की प्रारंभिक जानकारी दी है।
आरबीआई के अनुसार इसमें 127.226 अरब डॉलर एफसीएनआर-बी जमाओं, 5.260 अरब डॉलर ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग तथा 3.891 अरब डॉलर एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग के माध्यम से आए हैं।
एफसीएनआर-बी जमाओं के लिए विशेष सुविधा 31 अगस्त तक उपलब्ध थी। बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा उधारी के लिए यह व्यवस्था 31 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े प्रारंभिक हैं और अंतिम रिपोर्टिंग तथा मिलान के बाद इनमें परिवर्तन हो सकता है।
भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग बढ़कर ‘ए-माइनस’, आउटलुक स्थिर
नई दिल्ली। जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग को ‘बीबीबी-प्लस’ से बढ़ाकर ‘ए-माइनस’ कर दिया है। एजेंसी ने भारत के लिए आउटलुक स्थिर रखा है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अनुसार रेटिंग सुधार के पीछे मजबूत आर्थिक वृद्धि, सरकारी व्यय की गुणवत्ता में सुधार, वित्तीय क्षेत्र की बेहतर स्थिति और मजबूत बाहरी वित्तीय आधार जैसे कारण बताए गए हैं। बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों की परिसंपत्ति गुणवत्ता तथा पूंजी पर्याप्तता में सुधार को भी सकारात्मक माना गया है।
ऊंची सॉवरेन रेटिंग से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ऋण साख मजबूत होती है। इससे सरकार तथा भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी पूंजी जुटाने की लागत और निवेशकों की धारणा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
