बैंकिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: समय और लागत की बचत के साथ बढ़ रही कार्यकुशलता और उत्पादकता
कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब बैंकिंग क्षेत्र में केवल ग्राहक सेवा तक सीमित नहीं रही है। इसका उपयोग ऋण मूल्यांकन, जोखिम आकलन, दस्तावेजों की जांच, धोखाधड़ी की पहचान और वित्तीय निर्णय प्रक्रिया में तेजी से बढ़ रहा है। इससे समय और लागत की बचत के साथ बैंकिंग कार्यों की गति तथा कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ने की संभावनाएं भी स्पष्ट हो रही हैं।
देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में नए और पुराने ग्राहकों को करीब ₹1 लाख करोड़ के ऋण दिए। बैंक ने ₹5 करोड़ तक के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम ऋणों के मूल्यांकन में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किया। इससे संबंध प्रबंधकों को आवश्यक आंकड़े जुटाने और ऋण आवेदन की प्रारंभिक जांच में लगने वाला समय कम हुआ है।
हाल में आयोजित बैंकिंग सम्मेलन में भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष सी.एस. शेट्टी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र तक ऋण की पहुंच बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बैंक कृषि ऋण संबंधी निर्णयों में भी इस तकनीक का उपयोग बढ़ा रहा है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग संदिग्ध लेन-देन की पहचान, धोखाधड़ी रोकने, दस्तावेजों के डिजिटलीकरण और ऋण स्वीकृति से पहले जोखिम परीक्षण में भी बढ़ रहा है। जिन कार्यों में कर्मचारियों का काफी समय प्रारंभिक जांच और आंकड़े एकत्र करने में लगता था, वे अब अधिक तेजी से पूरे किए जा सकते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऋण व्यवस्था में वैसा परिवर्तन ला सकती है जैसा यूपीआई ने भुगतान व्यवस्था में किया। साथ ही उन्होंने मानवीय निगरानी और जवाबदेही बनाए रखने पर जोर दिया है।
