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राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय

प्रकाशित: 6 August 2026, 7:20 am अपडेट: 30 August 2026, 12:45 pm

बेनामी संपत्ति मामले में आयकर विभाग को ही प्रस्तुत करने होंगे ठोस प्रमाण

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बेनामी संपत्ति कानून से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि किसी संपत्ति को केवल संदेह अथवा अनुमान के आधार पर बेनामी घोषित नहीं किया जा सकता। संपत्ति को बेनामी साबित करने का दायित्व आयकर विभाग का है और विभाग को अपनी कार्रवाई के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।

यह मामला एक कंपनी की लगभग 11.16 करोड़ रुपये मूल्य की 79 संपत्तियों से संबंधित है। आयकर विभाग ने वर्ष 2022 में इन संपत्तियों को कथित रूप से बेनामी मानते हुए कार्रवाई शुरू की थी। कंपनी ने विभाग की कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि संपत्तियां वैध बैंकिंग माध्यम से खरीदी गई थीं और कंपनी ही उनकी वास्तविक एवं कानूनी स्वामी है।

राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि किसी संपत्ति को बेनामी साबित करने के लिए केवल परिस्थितियों, आशंकाओं या अनुमान को पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। विभाग को यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित संपत्ति वास्तव में किसी अन्य व्यक्ति के लाभ के लिए खरीदी गई थी अथवा उसका वास्तविक स्वामी अभिलेखों में दर्शाए गए स्वामी से अलग है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बेनामी संपत्ति कानून और आयकर कानून के अंतर्गत होने वाली कार्यवाहियां अलग-अलग प्रकृति की होती हैं। इसके बावजूद, जब दोनों कार्यवाहियां एक ही लेन-देन और समान तथ्यों से संबंधित हों, तो एक कार्यवाही में सामने आए निष्कर्षों की दूसरी कार्यवाही में पूरी तरह उपेक्षा नहीं की जा सकती।

मामले में आयकर आकलन अधिकारी पहले ही यह स्वीकार कर चुका था कि कंपनी ने संबंधित संपत्तियां वैध रूप से और बैंकिंग माध्यम से खरीदी थीं तथा उन पर कोई अतिरिक्त कर देयता नहीं बनती। हाईकोर्ट ने कहा कि इस महत्वपूर्ण तथ्य पर विचार किया जाना आवश्यक था।

न्यायालय ने प्रकरण में नए सिरे से सुनवाई किए जाने की आवश्यकता बताते हुए कंपनी को अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए सभी उपलब्ध अभिलेखों और प्रमाणों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाना चाहिए।

यह निर्णय बेनामी संपत्ति से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फैसले से यह सिद्धांत पुनः स्थापित हुआ है कि किसी व्यक्ति या कंपनी की संपत्ति को केवल आशंका के आधार पर बेनामी नहीं माना जा सकता और आरोप को प्रमाणित करने की जिम्मेदारी कार्रवाई करने वाले विभाग की ही होगी।