दोषसिद्धि के आधार पर स्वतः नहीं रोकी जा सकती पेंशन, कर्मचारी को सुनवाई का अवसर देना जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राहुल राजपुरोहित, युवा अधिवक्ता
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी की आपराधिक मामले में दोषसिद्धि होने मात्र से उसकी पेंशन स्वतः समाप्त नहीं की जा सकती। पेंशन रोकने अथवा समाप्त करने से पहले संबंधित कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सुनवाई का उचित अवसर देना आवश्यक है।
न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की एकलपीठ ने रोहिताश मीणा पुत्र प्रभुराम मीणा बनाम राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम मामले में यह व्यवस्था दी। न्यायालय ने कर्मचारी की पेंशन समाप्त करने संबंधी आदेश को प्रक्रियागत आधार पर निरस्त करते हुए प्रकरण को नए सिरे से विचार के लिए निगम के पास भेज दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि गंभीर विषय हो सकती है और सक्षम प्राधिकारी नियमानुसार पेंशन पूरी तरह अथवा आंशिक रूप से रोकने पर निर्णय ले सकता है। लेकिन दंड की प्रकृति और सीमा निर्धारित करने से पहले कर्मचारी को अपना पक्ष तथा व्यक्तिगत परिस्थितियां प्रस्तुत करने का अवसर देना अनिवार्य है।
अदालत ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन को महत्वपूर्ण मानते हुए कहा कि वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध होने मात्र से प्रत्येक परिस्थिति में हाईकोर्ट की रिट क्षेत्राधिकारिता समाप्त नहीं होती।
न्यायालय ने पूर्व के रामजीलाल जांगिड़ बनाम राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम मामले में दिए निर्णय का भी उल्लेख किया। उस निर्णय में पेंशन को वर्षों की सेवा से अर्जित महत्वपूर्ण वैधानिक अधिकार मानते हुए बिना उचित प्रक्रिया अपनाए इसे समाप्त नहीं करने की व्यवस्था दी गई थी।
हाईकोर्ट ने निगम को कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस और सुनवाई का अवसर देकर नियमानुसार नया निर्णय लेने का निर्देश दिया। साथ ही नया आदेश पारित होने तक पेंशन कानून के अनुसार जारी रखने को कहा गया है।
निर्णय का आशय: हाईकोर्ट ने दोषसिद्ध कर्मचारी के विरुद्ध पेंशन संबंधी कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई है। अदालत ने केवल यह सुनिश्चित किया है कि ऐसी कार्रवाई स्वतः या एकतरफा न होकर निर्धारित नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार की जाए।
