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जालौर जिले के निकाय चुनाव: पांच में से तीन निकायों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत, जालौर और भीनमाल में निर्दलीय तय करेंगे बोर्ड

प्रकाशित: 14 September 2026, 1:10 pm

जालौर। राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव-2026 में जालौर जिले के पांच प्रमुख नगर निकायों के परिणाम सामने आ गए हैं। जालौर नगर परिषद तथा आहोर, सायला, भीनमाल और सांचौर नगरपालिकाओं के कुल 165 वार्डों में भारतीय जनता पार्टी ने 82, इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 50 और निर्दलीय प्रत्याशियों ने 33 सीटें जीती हैं। जिले के समेकित परिणाम में भाजपा सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनकर उभरी है।

आहोर, सायला और सांचौर में भाजपा को अपने दम पर स्पष्ट बहुमत मिला है। जालौर नगर परिषद में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत से दो सीट दूर है। भीनमाल में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी है, मगर बहुमत के लिए उसे भी दो निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। इसलिए पांच में से तीन निकायों का राजनीतिक परिणाम स्पष्ट है, जबकि दो निकायों में बोर्ड की अंतिम तस्वीर निर्दलीय पार्षद तय करेंगे।

नगर निकाय| कुल वार्ड| भाजपा| कांग्रेस| निर्दलीय| बहुमत| संभावित बोर्ड
जालौर नगर परिषद| 40| 14| 19| 7| 21| कांग्रेस की संभावना अधिक; दो निर्दलीय चाहिए
आहोर नगरपालिका| 25| 13| 8| 4| 13| भाजपा का स्पष्ट बोर्ड
सायला नगरपालिका| 25| 17| 7| 1| 13| भाजपा का स्पष्ट बोर्ड
भीनमाल नगरपालिका| 40| 19| 8| 13| 21| भाजपा की संभावना अधिक; दो निर्दलीय चाहिए
सांचौर नगरपालिका| 35| 19| 8| 8| 18| भाजपा का स्पष्ट बोर्ड
कुल| 165| 82| 50| 33| —| भाजपा का समग्र दबदबा

जालौर नगर परिषद: कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी, मगर सत्ता की चाबी निर्दलीयों के पास

जालौर नगर परिषद के सभी 40 वार्डों में कांग्रेस ने 19, भाजपा ने 14 और निर्दलीय प्रत्याशियों ने सात सीटें जीती हैं। बोर्ड बनाने के लिए 21 पार्षदों का समर्थन चाहिए। कांग्रेस बहुमत से केवल दो सीट दूर है, जबकि भाजपा को सात अतिरिक्त पार्षदों की आवश्यकता है।

संख्यात्मक रूप से जालौर नगर परिषद का झुकाव कांग्रेस की ओर दिखाई देता है। कांग्रेस यदि सात निर्दलीय पार्षदों में से केवल दो का समर्थन प्राप्त कर लेती है तो आसानी से बोर्ड बना सकती है। इसके विपरीत भाजपा को सभी सात निर्दलीयों को एक साथ अपने पक्ष में लाना होगा। यह संभव तो है, लेकिन कांग्रेस की तुलना में भाजपा की राह कहीं अधिक कठिन है।

इस चुनाव में कांग्रेस ने 2019 के मुकाबले अपनी स्थिति मजबूत की है। वर्ष 2019 में भाजपा को 18, कांग्रेस को 14 और निर्दलीयों को आठ सीटें मिली थीं। इस बार कांग्रेस 19 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि भाजपा घटकर 14 सीटों पर आ गई। इस प्रकार जालौर शहर के मतदाताओं ने किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं दिया, लेकिन कांग्रेस को बोर्ड गठन के सबसे निकट अवश्य पहुंचा दिया है।

जालौर नगर परिषद सभापति का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। सभापति का चुनाव नवनिर्वाचित पार्षद करेंगे। वर्तमान संख्या के आधार पर कांग्रेस समर्थित सभापति बनने की संभावना अधिक है, परंतु निर्दलीयों का अंतिम रुख सामने आने तक इसे निश्चित परिणाम नहीं कहा जा सकता।

आहोर नगरपालिका: भाजपा को ठीक बहुमत, एकजुटता बनाए रखना जरूरी

आहोर नगरपालिका के 25 वार्डों में भाजपा ने 13, कांग्रेस ने आठ और निर्दलीयों ने चार सीटें जीती हैं। यहां बहुमत का जादुई आंकड़ा 13 है, जिसे भाजपा ने अपने दम पर हासिल कर लिया है। इसलिए किसी निर्दलीय पार्षद के समर्थन के बिना भी भाजपा अपना बोर्ड और अध्यक्ष बना सकती है।

हालांकि भाजपा का बहुमत केवल एक सीट का है। सभी 13 पार्षदों की एकजुटता बनी रहने पर बोर्ड गठन में कोई समस्या नहीं होगी, लेकिन एक भी पार्षद अनुपस्थित रहता है अथवा क्रॉस-वोटिंग करता है तो अध्यक्ष पद के चुनाव का गणित प्रभावित हो सकता है। इसलिए भाजपा निर्दलीयों में से एक या दो पार्षदों का अतिरिक्त समर्थन हासिल करने का प्रयास कर सकती है।

आहोर नगरपालिका अध्यक्ष का पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में भाजपा को अध्यक्ष पद के लिए अपने निर्वाचित ओबीसी पार्षदों में से उम्मीदवार चुनना होगा। संख्याबल के आधार पर आहोर में भाजपा का बोर्ड बनना लगभग निश्चित है।

सायला नगरपालिका: भाजपा का सबसे मजबूत प्रदर्शन

सायला नगरपालिका के 25 वार्डों में भाजपा ने 17 सीटें जीतकर स्पष्ट और आरामदायक बहुमत प्राप्त किया है। कांग्रेस को सात और निर्दलीय को केवल एक सीट मिली। बहुमत के लिए 13 पार्षद आवश्यक हैं और भाजपा इस आंकड़े से चार सीट आगे है।

जिले के पांचों निकायों में सायला का परिणाम भाजपा के लिए सबसे निर्णायक परिणामों में शामिल है। यहां न तो निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन को प्रभावित कर सकता है और न ही कांग्रेस के पास भाजपा को रोकने लायक संख्या है। भाजपा के भीतर अध्यक्ष पद के उम्मीदवार पर सहमति बनाना ही अब मुख्य राजनीतिक प्रक्रिया रहेगी।

सायला नगरपालिका अध्यक्ष का पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है। इसलिए अध्यक्ष भाजपा के निर्वाचित अनुसूचित जाति पार्षदों में से चुने जाने की प्रबल संभावना है। भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत होने के कारण सायला में बोर्ड गठन पूरी तरह सुरक्षित माना जा सकता है।

भीनमाल नगरपालिका: भाजपा सबसे बड़ी पार्टी, 13 निर्दलीय बने निर्णायक

भीनमाल नगरपालिका के 40 वार्डों में भाजपा ने 19, कांग्रेस ने आठ और निर्दलीय प्रत्याशियों ने 13 सीटें जीती हैं। बोर्ड बनाने के लिए 21 पार्षद चाहिए। भाजपा बहुमत से केवल दो सीट दूर है, जबकि कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचने के लिए 13 अतिरिक्त पार्षदों की आवश्यकता होगी।

संख्यात्मक दृष्टि से भीनमाल में भाजपा का बोर्ड बनने की संभावना बहुत अधिक है। उसे 13 निर्दलीयों में से केवल दो का समर्थन चाहिए। कांग्रेस तभी बोर्ड बना सकती है, जब सभी 13 निर्दलीय पार्षद एक साथ उसके पक्ष में आ जाएं। स्थानीय राजनीति में ऐसा गठबंधन असंभव नहीं है, लेकिन व्यावहारिक रूप से अत्यंत कठिन माना जाएगा।

भीनमाल में निर्दलीयों की संख्या असाधारण रूप से बड़ी है। कुल 40 में से 13 पार्षद निर्दलीय जीते हैं, यानी लगभग एक-तिहाई सदन किसी प्रमुख पार्टी के चुनाव चिह्न पर निर्वाचित नहीं हुआ। इससे नगर की राजनीति में स्थानीय नेतृत्व और व्यक्तिगत जनाधार का प्रभाव स्पष्ट होता है।

अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। भाजपा को केवल दो निर्दलीयों का समर्थन चाहिए, इसलिए बोर्ड का प्रारंभिक झुकाव स्पष्ट रूप से भाजपा की ओर है। इसके बावजूद अध्यक्ष पद की दावेदारी, राजनीतिक समझौते और निर्दलीय समूह की शर्तें अंतिम परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं।

सांचौर नगरपालिका: भाजपा ने बहुमत के आंकड़े को पार किया

सांचौर नगरपालिका के 35 वार्डों में भाजपा ने 19, कांग्रेस ने आठ और निर्दलीयों ने आठ सीटें जीती हैं। बोर्ड गठन के लिए 18 पार्षदों का समर्थन आवश्यक है। भाजपा के पास बहुमत से एक सीट अधिक है, इसलिए वह अपने दम पर अध्यक्ष और बोर्ड बना सकती है।

आहोर की तरह सांचौर में भी बहुमत बहुत बड़ा नहीं है। भाजपा के सभी 19 पार्षद एकजुट रहते हैं तो बोर्ड गठन निश्चित है। किसी संभावित अनुपस्थिति अथवा क्रॉस-वोटिंग से बचने के लिए पार्टी निर्दलीय पार्षदों का अतिरिक्त समर्थन जुटाने का प्रयास कर सकती है। कांग्रेस और निर्दलीयों की संयुक्त संख्या 16 बैठती है, जो बहुमत से दो कम है। इसलिए भाजपा के भीतर टूट के बिना विपक्ष के लिए बोर्ड बनाना संभव नहीं दिखता।

सांचौर नगरपालिका अध्यक्ष का पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। वर्तमान परिणाम के आधार पर यहां भाजपा का अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना है।

जिले की समग्र राजनीतिक तस्वीर

पांचों निकायों के कुल 165 वार्डों में भाजपा ने 82 सीटें जीती हैं। इसका अर्थ है कि जिले के लगभग आधे वार्ड भाजपा के खाते में गए हैं। कांग्रेस ने 50 सीटें जीतकर जालौर नगर परिषद में सबसे बड़ी पार्टी बनने के साथ अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई है। वहीं 33 निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत बताती है कि जिले की स्थानीय राजनीति में व्यक्तिगत प्रभाव, सामाजिक समीकरण और वार्ड स्तर का जनसंपर्क अभी भी बहुत महत्वपूर्ण है।

निकायवार देखें तो आहोर, सायला और सांचौर में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है। भीनमाल में भाजपा को केवल दो निर्दलीयों का समर्थन चाहिए, इसलिए वहां भी भाजपा का बोर्ड बनने की संभावना अधिक है। जालौर नगर परिषद में कांग्रेस को केवल दो निर्दलीयों की आवश्यकता है और भाजपा को सभी सात निर्दलीयों का समर्थन चाहिए; इसलिए जालौर शहर में कांग्रेस समर्थित बोर्ड बनने की संभावना अधिक दिखाई देती है।

इस प्रकार वर्तमान राजनीतिक गणित के अनुसार जिले के पांच में से चार निकायों—आहोर, सायला, सांचौर और संभवतः भीनमाल—में भाजपा का बोर्ड बन सकता है। जालौर नगर परिषद में कांग्रेस के नेतृत्व वाला बोर्ड बनने की संभावना अधिक है। हालांकि जालौर और भीनमाल में अंतिम निर्णय निर्दलीय पार्षदों के समर्थन और अध्यक्ष-सभापति चुनाव के समय होने वाले मतदान से ही होगा।

चुनाव परिणामों ने भाजपा को जिले की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनाया है, लेकिन जालौर नगर परिषद में कांग्रेस की बढ़त और भीनमाल में 13 निर्दलीयों की जीत यह भी बताती है कि स्थानीय मतदाता ने हर स्थान पर किसी एक दल के पक्ष में समान जनादेश नहीं दिया। अब वास्तविक राजनीतिक परीक्षा बोर्ड गठन, अध्यक्ष-सभापति के चयन और निर्वाचित पार्षदों की एकजुटता की होगी।