RIICO औद्योगिक भूमि के नए नियम: प्रॉपर्टी बाजार और उद्योग पर क्या असर पड़ेगा?
राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग द्वारा 6 अगस्त 2026 को जारी “Rajasthan Land Revenue (Vesting of Land in the RIICO and Disposal of Land) Rules, 2026” का असर केवल नई औद्योगिक भूमि के आवंटन तक सीमित नहीं रहेगा। ये नियम RIICO के अधीन औद्योगिक भूमि के आवंटन, लीज, ट्रांसफर, प्लॉट विभाजन, मर्जर, भू-उपयोग परिवर्तन और पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के प्रबंधन के लिए नया वैधानिक ढांचा निर्धारित करते हैं।
नियमों में “Industry” की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है। अब पारंपरिक निर्माण और प्रोसेसिंग के अलावा IT/ITES, बायोटेक्नोलॉजी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, पावर जनरेशन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर तथा बिजनेस और नॉलेज प्रोसेस गतिविधियां भी इसके दायरे में आती हैं। इससे RIICO औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि की मांग केवल फैक्ट्री लगाने वाले उद्योगों तक सीमित न रहकर सेवा, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी क्षेत्र तक बढ़ सकती है।
नए नियमों में प्लॉट ट्रांसफर को स्पष्ट रूप से नियंत्रित किया गया है। RIICO की पूर्व अनुमति के बिना प्लॉट ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। इसलिए RIICO भूमि को सामान्य फ्रीहोल्ड प्रॉपर्टी की तरह स्वतंत्र रूप से खरीद-बिक्री योग्य नहीं माना जा सकता। इसी तरह प्लॉट के subdivision और merger के लिए भी अनुमति आवश्यक होगी।
प्लॉट विभाजन की स्थिति में प्रत्येक नया प्लॉट कम से कम 500 वर्गमीटर का होना जरूरी है। इसका सकारात्मक प्रभाव यह हो सकता है कि आवश्यकता से अधिक बड़े औद्योगिक प्लॉटों का नियमानुसार विभाजन करके छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध हो सके। दूसरी ओर न्यूनतम सीमा औद्योगिक भूमि के अत्यधिक छोटे-छोटे टुकड़ों में विखंडन को भी रोकती है।
भू-उपयोग परिवर्तन की व्यवस्था भी दी गई है, लेकिन इसे पूरी तरह स्वतंत्र नहीं किया गया है। जिस उद्देश्य के लिए भूमि आवंटित की गई है, सामान्यतः उसी उद्देश्य के अनुसार उसका उपयोग करना होगा। किसी अन्य अनुमत गतिविधि में परिवर्तन RIICO की मंजूरी, निर्धारित शुल्क तथा संबंधित Master Plan और Development Plan के अनुरूप ही संभव होगा।
भूमि सामान्यतः अधिकतम 99 वर्ष की प्रारंभिक लीज पर दी जा सकेगी और निर्धारित शर्तों के अधीन आगे भी अधिकतम 99 वर्ष तक नवीनीकरण किया जा सकेगा। लंबी लीज अवधि उद्योगों को दीर्घकालिक निवेश, फैक्ट्री निर्माण और वित्तीय योजना के लिए स्थिर आधार दे सकती है। हालांकि 99 वर्ष की लीज की अवधारणा RIICO व्यवस्था में पूरी तरह नई नहीं है; नए नियमों का महत्व इसे व्यापक वैधानिक ढांचे में शामिल किए जाने में है।
नई औद्योगिक भूमि RIICO को देते समय उसका मूल्य संबंधित क्षेत्र की कृषि भूमि के बाजार मूल्य, DLC आधारित दर और राज्य सरकार द्वारा तय मूल्य में से लागू उच्चतर आधार पर निर्धारित किया जाएगा। इससे भूमि मूल्य निर्धारण में स्पष्टता बढ़ सकती है। दूसरी ओर जिन क्षेत्रों में भूमि मूल्य अधिक है, वहां नई औद्योगिक भूमि की प्रारंभिक लागत भी बढ़ सकती है। इसका अंतिम असर प्लॉट की कीमतों पर कितना पड़ेगा, यह RIICO की विकास लागत और शुल्क पर निर्भर करेगा।
औद्योगिक क्षेत्र के ले-आउट में कम से कम 50 प्रतिशत क्षेत्र उद्योग तथा सहायक सुविधाओं के लिए रखना होगा। शेष क्षेत्र सड़क, हरित क्षेत्र, यूटिलिटी और कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर में उपयोग किया जा सकेगा। इससे औद्योगिक क्षेत्र का मूल स्वरूप बनाए रखने और गैर-औद्योगिक उपयोग के अत्यधिक विस्तार को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
इन नियमों का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव पुराने RIICO औद्योगिक क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। जो औद्योगिक क्षेत्र, प्लॉट और संपत्तियां पहले से RIICO के प्रबंधन या नियंत्रण में हैं, उन पर भी ट्रांसफर, लीज नवीनीकरण, भू-उपयोग परिवर्तन, नियमितीकरण, subdivision और merger संबंधी नई व्यवस्था लागू होगी। हालांकि पहले से वैध आवंटन और लीज स्वतः समाप्त नहीं होते।
कुल मिलाकर नए नियम RIICO औद्योगिक संपत्ति को खुली फ्रीहोल्ड प्रॉपर्टी में परिवर्तित नहीं करते, बल्कि उसके आवंटन, उपयोग और सौदों को अधिक स्पष्ट और नियंत्रित कानूनी ढांचे में लाते हैं। इससे उद्योगों और प्रॉपर्टी सौदों में नियमों की स्पष्टता बढ़ सकती है, जबकि अनुमति, शुल्क और भू-उपयोग नियंत्रण जैसी शर्तें आगे भी महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।
