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आयकर पोर्टल पर एकीकृत भुगतान मॉड्यूल शुरू, पुराने और नए कानून का कर एक ही स्थान से जमा होगा

प्रकाशित: 28 September 2026, 12:09 pm

वित्त वर्ष 2025-26 तक आयकर अधिनियम, 1961 और कर वर्ष 2026-27 से आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत भुगतान की सुविधा

आयकर विभाग ने ई-फाइलिंग पोर्टल पर नया एकीकृत भुगतान मॉड्यूल शुरू कर दिया है। इस व्यवस्था के माध्यम से करदाता अब पुराने आयकर अधिनियम, 1961 और नए आयकर अधिनियम, 2025—दोनों के अंतर्गत देय कर का भुगतान एक ही इंटरफेस से कर सकेंगे।

नई व्यवस्था विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम, 2025 प्रभावी हो चुका है, लेकिन वित्तीय वर्ष 2025-26 और उससे पहले की आय तथा बकाया कर से जुड़े मामलों का निपटारा आयकर अधिनियम, 1961 के अंतर्गत ही किया जाएगा। इसके विपरीत एक अप्रैल 2026 से शुरू हुए कर वर्ष 2026-27 और उसके बाद की कर देनदारियाँ नए आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत आएंगी।

आयकर विभाग के अनुसार करदाता अब वित्तीय वर्ष 2025-26 तक की देनदारियों का भुगतान पुराने अधिनियम के अंतर्गत तथा कर वर्ष 2026-27 से संबंधित भुगतान नए अधिनियम के अंतर्गत एक ही भुगतान प्रणाली से कर सकते हैं। इससे अलग-अलग कानूनों और भुगतान व्यवस्थाओं के बीच होने वाला भ्रम कम होने की उम्मीद है।

करदाताओं के लिए इसका क्या अर्थ है

किसी करदाता को यदि वित्तीय वर्ष 2025-26 अथवा उससे पहले का अग्रिम कर, स्व-मूल्यांकन कर, नियमित निर्धारण कर, बकाया मांग, ब्याज अथवा दूसरी आयकर देनदारी जमा करनी है, तो उसे आयकर अधिनियम, 1961 से संबंधित विकल्प चुनना होगा।

एक अप्रैल 2026 से अर्जित आय अर्थात कर वर्ष 2026-27 से संबंधित भुगतान नए आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत किया जाएगा। नए कर वर्ष से संबंधित भुगतान के लिए नए चालानों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

भुगतान से पहले इन बातों की जाँच जरूरी

कर भुगतान करते समय करदाता को संबंधित कानून, वित्तीय वर्ष अथवा कर वर्ष, निर्धारण वर्ष, भुगतान का प्रकार और राशि सावधानीपूर्वक चुननी चाहिए। गलत वर्ष या गलत भुगतान श्रेणी में राशि जमा होने पर बाद में कर क्रेडिट मिलान अथवा बकाया मांग के समायोजन में समस्या हो सकती है।

भुगतान पूरा होने के बाद चालान की प्रति, सीआईएन अथवा भुगतान संदर्भ संख्या सुरक्षित रखनी चाहिए। राशि बैंक खाते से कटने के बावजूद चालान तैयार नहीं होने पर तुरंत दोबारा भुगतान करने के बजाय पोर्टल पर ‘कर भुगतान की स्थिति जानें’ सुविधा से लेन-देन की स्थिति जाँचनी चाहिए।

नया मॉड्यूल करदाताओं, व्यापारियों, कंपनियों, साझेदारी फर्मों और कर पेशेवरों के लिए उपयोगी है। फिर भी पुराने और नए कानून के संक्रमण काल में भुगतान करते समय केवल आय की तारीख नहीं, बल्कि लागू वित्तीय वर्ष, कर वर्ष और संबंधित अधिनियम की पहचान करना आवश्यक रहेगा।

महत्वपूर्ण सावधानी: यह सूचना सामान्य कर जागरूकता के लिए है। बड़ी रकम, पुराने बकाया, कर मांग अथवा विवादित देनदारी का भुगतान करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या अधिकृत कर सलाहकार से विवरण की पुष्टि करना उचित रहेगा।