राजस्थान के खनन विभाग में करोड़ों रुपये की वसूली लंबित, CAG ने निगरानी व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
जयपुर।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने राजस्थान के खान एवं भूविज्ञान विभाग में अवैध एवं अनधिकृत खनन से संबंधित करोड़ों रुपये की मांग नहीं उठाने और बकाया राशि की वसूली नहीं करने के मामले उजागर किए हैं। ये निष्कर्ष राजस्थान सरकार की मार्च 2024 को समाप्त अवधि की अनुपालन लेखापरीक्षा रिपोर्ट संख्या 3/2026 में शामिल हैं। रिपोर्ट 21 अगस्त 2026 को राजस्थान विधानसभा में प्रस्तुत की गई।
CAG ने खान एवं भूविज्ञान विभाग की 23 इकाइयों की लेखापरीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार, दस खनन अभियंताओं एवं सहायक खनन अभियंताओं ने आवश्यक ‘Consent to Operate’ नहीं होने अथवा उसमें स्वीकृत मात्रा से अधिक खनन किए जाने के मामलों में ₹192.72 करोड़ की वसूली नहीं की।
44 खनन पट्टों से 23.83 लाख मीट्रिक टन खनिज के अनधिकृत प्रेषण का मामला
CAG के अनुसार 44 खनन पट्टों से कथित रूप से 23.83 लाख मीट्रिक टन खनिज का अनधिकृत उत्खनन और प्रेषण हुआ। इसके लिए संबंधित खनन पट्टों के नाम पर जारी रवन्नों का उपयोग किया गया। पांच खनन पट्टों के आसपास और पट्टों के बीच की खाली भूमि में भी अवैध खनन पाया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधित खनन अभियंता और सहायक खनन अभियंता समय रहते इन मामलों का पता लगाने तथा खनिज की लागत के रूप में ₹191.10 करोड़ की वसूली करने में विफल रहे।
ई-रवन्ना शुल्क के ₹6.97 करोड़ भी नहीं वसूले
राजस्थान गौण खनिज रियायत नियम, 2017 में 3 जनवरी 2022 को संशोधन कर प्रत्येक ई-रवन्ना अथवा ई-ट्रांजिट पास जारी करने के लिए ₹10 शुल्क निर्धारित किया गया था। CAG ने पाया कि 15 खनन अभियंता एवं सहायक खनन अभियंता 69.71 लाख ई-रवन्ना और ई-ट्रांजिट पास पर देय ₹6.97 करोड़ का शुल्क पट्टाधारकों, अल्पकालीन परमिटधारकों और डीलरों से वसूल नहीं कर सके।
एक अन्य प्रकरण में एक पट्टाधारक ने बिना ई-रवन्ना बनाए 42,185.77 मीट्रिक टन खनिज भेज दिया। संबंधित खनन अभियंता इसका पता नहीं लगा सके, जिससे ₹2.36 करोड़ की मांग नहीं उठाई गई और राशि की वसूली नहीं हुई।
स्वीकृत Mining Plan के बिना खनन पर ₹52.63 करोड़ की मांग नहीं
CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि पांच खनन अभियंता एवं सहायक खनन अभियंता 15 पट्टाधारकों द्वारा स्वीकृत Mining Plan अथवा Simplified Mining Scheme के बिना निकाले गए 8.01 लाख मीट्रिक टन खनिज के लिए ₹33.22 करोड़ की मांग नहीं उठा सके।
इसी प्रकार सात अधिकारियों द्वारा दस पट्टाधारकों से स्वीकृत योजना में निर्धारित मात्रा से अधिक निकाले गए 3.73 लाख मीट्रिक टन खनिज पर ₹19.41 करोड़ की मांग नहीं उठाई गई। दोनों प्रकार के मामलों में कुल ₹52.63 करोड़ की वसूली नहीं होने की बात रिपोर्ट में दर्ज है।
बजरी परिवहन, रॉयल्टी और प्रीमियम में भी कमियाँ
रिपोर्ट में अन्य मामलों का भी उल्लेख किया गया है:
- अवैध बजरी परिवहन में शामिल वाहनों से राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा निर्धारित ₹21 लाख की कंपाउंडिंग फीस नहीं वसूली गई।
- ईंट-मिट्टी परमिटधारक से रॉयल्टी और जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट अंशदान के ₹15.73 लाख की मांग नहीं उठाई गई।
- खातेदारी भूमि में स्वीकृत खनन पट्टे की प्रीमियम किस्त के ₹14.33 लाख की वसूली नहीं हुई।
- खनन पट्टे की स्वीकृति अवधि बढ़ाने से संबंधित विलंब शुल्क की मांग ₹24.90 लाख कम लगाई गई।
- निगरानी और राजस्व वसूली व्यवस्था पर सवाल
CAG के निष्कर्ष खनिज उत्पादन, ई-रवन्ना, अनुमोदित Mining Plan, CTO और वास्तविक प्रेषण के बीच प्रभावी डिजिटल मिलान तथा विभागीय निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। रिपोर्ट से यह प्रश्न भी उठता है कि विभागीय ऑनलाइन प्रणाली उपलब्ध होने के बावजूद अनधिकृत खनन और खनिज परिवहन का समय पर पता क्यों नहीं लगाया गया।
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि CAG द्वारा बताई गई प्रत्येक राशि को स्वतः गबन या प्रमाणित सरकारी नुकसान नहीं कहा जा सकता। इनमें मुख्यतः मांग नहीं उठाने, शुल्क कम लगाने और बकाया राशि की वसूली नहीं करने से जुड़े लेखापरीक्षा निष्कर्ष हैं। इन पर विभागीय जवाब, वसूली की कार्रवाई और लोक लेखा समिति की आगे की समीक्षा महत्त्वपूर्ण होगी।
CAG की आधिकारिक रिपोर्ट का लिंक:
https://cag.gov.in/ag2/rajasthan/en/audit-report/details/126115
उक्त आधिकारिक पृष्ठ पर पूरी रिपोर्ट के साथ Executive Summary, संबंधित अध्याय और परिशिष्ट भी उपलब्ध हैं।
