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पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ के मंच पर सावित्रीबाई फुले को प्रमुख स्थान, महिला शिक्षा के योगदान को मिला सम्मान

प्रकाशित: 23 August 2026, 3:16 pm

द्वारा- दाताराम सैनी

छात्राओं से जुड़े शिक्षा, सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता के विषयों पर हुआ संवाद

पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में 22 अगस्त 2026 को आयोजित “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्राओं और महिलाओं से संवाद किया। कार्यक्रम के मंच पर भारत की अग्रणी महिला शिक्षिका एवं महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले का विशाल चित्र प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। चित्र के साथ शिक्षा, जागृति और सामाजिक रूढ़ियों से मुक्ति का संदेश भी अंकित था।

ऑल इंडिया श्री शिवाजी मेमोरियल सोसायटी (AISSMS) कॉलेज मैदान में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वतंत्रता, समानता और सामाजिक भागीदारी से जुड़े विषय प्रमुखता से उठाए गए। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में देश की लगभग 70 करोड़ महिलाओं को भारत की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक बताते हुए उनकी स्वतंत्र पहचान और समान अधिकारों पर जोर दिया। कार्यक्रम में शामिल छात्राओं ने भी शिक्षा, सुरक्षा, सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न से संबंधित अपने अनुभव एवं प्रश्न रखे।

फुले दंपती की ऐतिहासिक कर्मभूमि है पुणे

पुणे महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की ऐतिहासिक कर्मभूमि रही है। फुले दंपती ने वर्ष 1848 में पुणे के भिड़े वाड़ा में बालिकाओं के लिए विद्यालय प्रारम्भ कर महिला शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल की थी। सावित्रीबाई फुले ने सामाजिक विरोध और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए बालिकाओं, वंचित वर्गों और महिलाओं तक शिक्षा पहुंचाने का कार्य किया।

छात्राओं और महिलाओं पर केंद्रित कार्यक्रम के मंच पर सावित्रीबाई फुले के चित्र को प्रमुख स्थान दिए जाने को उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान के प्रति सम्मान और सार्वजनिक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है।

महात्मा ज्योतिबा फुले राष्ट्रीय संस्थान ने किया स्वागत

महात्मा ज्योतिबा फुले राष्ट्रीय संस्थान, सेक्टर-3, विद्याधर नगर, जयपुर के एग्जीक्यूटिव एवं संयोजक दाताराम सैनी ने इस पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पुणे की पावन धरती पर आयोजित कार्यक्रम के मंच पर सावित्रीबाई फुले के चित्र को प्रमुखता देना महिला शिक्षा के लिए महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्य को सम्मान एवं पहचान प्रदान करने वाला कदम है।

दाताराम सैनी ने कहा कि शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के लिए फुले दंपती द्वारा दिया गया संदेश आज भी समाज के लिए प्रासंगिक और प्रेरणादायी है।